बीट अफसर की बढ़ेगी जवाबदेही और जिम्मेदारी, अब इनके जरिए ही थानों में दर्ज होगी रिपोर्ट

- हर बीट अफसर पर होगा 5500 लोगों की निगरानी का जिम्मा
- गोरखपुर के एडीजी जोन अखिल कुमार ने बीट सिपाही का अधिकार व जिम्मेदारी तय करने के दिए निर्देश

By: Hariom Dwivedi

Published: 28 Feb 2021, 03:20 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
गोरखपुर. उत्तर प्रदेश में पुलिसिंग की व्यवस्था पूरी तरह से बदली-बदली नजर आएगी। लोगों से जुड़ने, उन्हें सुरक्षा का भरोसा दिलाने और बदमाशों की निगरानी के लिए फिर से बीट पुलिस ऑफिसर (बीपीओ) को सक्रिय किया जाएगा। बीट पर तैनात सिपाहियों में से सीनियर सिपाही को बीपीओ बनाया जाएगा, जिसे एक सीयूजी मोबाइल भी दिया जाएगा। बीट के अन्य सिपाही उसके अंडर में काम करेंगे। इन्हें दो गांव या दो मोहल्लों का इंचार्ज बनाया जाएगा। उन्हें जिन दो गांव या मोहल्ले का इंचार्ज बनाया जाएगा, वहां से जुड़ीं सभी शिकायतें और जांच उन्हीं से होकर थाने जाएंगी। मुकदमे में उनकी जांच रिपोर्ट मायने रखेगी। इतना ही नहीं, बीपीओ का पूरा लेखा-जोखा थाना, सीओ और एडिशनल एसपी के पास भी होगा। एक मानक के हिसाब से एक बीपीओ पर 5500 लोगों की सुरक्षा का जिम्मा होगा। हल्का या फिर चौकी इंचार्ज को बीपीओ प्रतिदिन की गतिविधि रिपोर्ट देगा। नई व्यवस्था में बीट अफसर की जवाबदेही और जिम्मेदारी बढ़ेगी।

बीपीओ के पास अपने क्षेत्र के संभ्रांत लोगों के साथ क्रिमनल्स का पूरा रिकॉर्ड होगा। बदमाशों पर उनकी पैनी नजर रहेगी। इसके अलावा इलाके में होने वाले जुआ, शराब और अन्य छोटे-छोटे अपराधों की पूरी सूचना भी बीपीओ को बीट बुक में नोट करनी होगी। बीपीओ के पास इलाके के लेखपाल सहित अन्य राजस्व व ब्लॉककर्मियों के मोबाइल नंबर भी होंगे। इनको सरकारी बाइक, एंड्राइड मोबाइल, रिवॉल्वर, बॉडी बार्म कैमरा के अलावा एक बस्ता दिए जाएगा। बस्ते में क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर अपराधियों के रिकॉर्ड, कोर्ट समन, वारंट, एनसीआर के मुकदमे, थाने से आए शिकायती प्रार्थना पत्र, पासपोर्ट व चरित्र सत्यापन की जांच संबंधी प्रपत्र रहेंगे। बीते वर्ष पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर गोरखपुर जिले के शहर और देहात के एक-एक थानों में यह व्यवस्था शुरू की गई थी। अब फिर एक बार बीट पुलिसिंग को सक्रिय करने की योजना है।

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यहां पहले से लागू है बीट व्यवस्था
उत्तर प्रदेश में बीट व्यवस्था पहले से लागू है। पहले एक बीट पर तैनात पुलिसवाले के पास पांच-छह गांव की जिम्मेदारी होती थी। अब दो गांवों के हिसाब से बंटवारा कर बीपीओ बनाया जा रहा है। आबादी और चौकी/हल्का में पुलिसकर्मियों की संख्या के आधार पर बीपीओ को जिम्मेदारी दी जाएगी। अधिकतम एक बीपीओ के पास 5500 लोगों की जिम्मेदारी हो, ऐसी नई व्यवस्था तैयार की जा रही है।

उपद्रवियों को 107/16 में पाबंद कर सकेंगे बीट अफसर
गोरखपुर के एडीजी जोन अखिल कुमार ने बीट सिपाही का अधिकार बढ़ाने के साथ उनकी जिम्मेदारी तय करने के निर्देश जिले के कप्तानों को दिए हैं। बीट सिपाही के पास अधिकार होगा कि वह अपने क्षेत्र के उपद्रवियों को 107/16 में पाबंद कर निरोधात्मक कार्रवाई कर सकेंगे। इसके साथ प्रार्थना पत्र पर वह क्षेत्र में जाकर आख्या रिपोर्ट देंगे, जिसके बाद दारोगा और थानेदार आवश्यक कार्रवाई करेंगे।

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