यूपी के इस चर्चित सांसद की सांसद निधि के 89 लाख का पता नहीं

यूपी के इस चर्चित सांसद की सांसद निधि के 89 लाख का पता नहीं

Dheerendra Vikramadittya | Publish: Aug, 14 2019 09:09:09 AM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

  • 89 लाख रुपये लेने के बाद कार्यदायी संस्था न साध ली चुप्पी
  • डीआरडीए ढूंढ़ रहा 89 लाख का क्या क्या काम कराया गया

मुख्यमंत्री के जिले में सांसद निधि के 89 लाख का हिसाब किताब नहीं मिल रहा। उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड को सांसद निधि की यह रकम सोलर लाइट व इंडिया मार्का टू हैंडपंप लगाने को जारी किया गया था। लेकिन नौ माह बीतने के बाद भी धन कहां खर्च हुआ यह किसी को पता नहीं है। सांसद निधि का यह धन सपा से गोरखपुर उपचुनाव में सांसद बने प्रवीण निषाद के कार्यकाल का है। प्रवीण निषाद अब संतकबीरनगर से भाजपा के टिकट पर चुनकर संसद पहुंचे हैं।

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गोरखपुर से पांच बार सांसद रह चुके योगी आदित्यनाथ जब मुख्यमंत्री पद की कमान संभाले तो गोरखपुर लोकसभा क्षेत्र से संसद सदस्य के पद से इस्तीफा दे दिया था। उनके इस्तीफा के बाद गोरखपुर संसदीय उपचुनाव हुआ। इस चुनाव में महागठबंधन के प्रत्याशी के रूप में सपा के सिंबल पर प्रवीण निषाद मैदान में उतरे। उपचुनाव जीतकर करीब डेढ़ साल के लिए प्रवीण गोरखपुर के सांसद बने।
इस दौरान उन्होंने स्थानीय क्षेत्र विकास निधि योजना के तहत 196 सोलर लाइट और 161 इंडिया मार्का हैंडपंप लगाने के लिए स्वीकृति प्रदान की थी। 15 अक्टूबर 2018 को गोरखपुर के सांसद प्रवीण निषाद की निधि से प्रथम किश्त के रुप में 89,86,780 रुपये कार्यदायी संस्था उत्तर प्रदेश लघु उद्योग निगम लिमिटेड जारी कर दिया गया।

लेकिन धन जारी होने के बाद कितने सोलर लाइट लगे, कितने इंडिया मार्का हैंडपंप लगाए गए इसका कोई विवरण नहीं मिल सका है। करीब नौ महीना धन जारी हुए बीत चुके हैं। लोकसभा चुनाव होने के बाद सांसद भी बदल चुके हैं। अब गोरखपुर के सांसद रविकिशन हैं।

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पहली किश्त लेने के बाद दूसरी किश्त की मांग तक नहीं की

सबसे अहम बात यह कि एक किश्त के रुप में धन जारी होने के बाद कार्यदायी संस्था ने न तो काम कोई विवरण भी उपलब्ध कराया है न ही काम पूरा कराने के लिए दूसरी किश्त की ही डिमांड की है। सूत्रों की मानें तो इस धन के दुरुपयोग की भी गुंजाइश है इसलिए ही दूसरी किश्त की डिमांड नहीं की गई है। क्योंकि अगर दूसरी किश्त की डिमांड करेंगे तो पहली किश्त से कराए गए कार्याें का भी वितरण देना पड़ेगा।
उधर, इस बाबत डीआरडीए ने कार्यदायी संस्था को पत्र लिखकर विवरण उपलब्ध कराने को कहा है। कार्यपूर्ति नहीं जमा करने पर ब्याज सहित अवमुक्त पूरी धनराशि की वसूली की चेतावनी भी दी है। हालांकि, क्षेत्र बदल चुके सांसद अब इस बाबत कोई जानकारी नहीं होने की बात कह रहे।

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