योगी सरकार के खिलाफ इस बीजेपी विधायक ने खोला था मोर्चा, अब पार्टी ने दिया बड़ा झटका

योगी सरकार के खिलाफ इस बीजेपी विधायक ने खोला था मोर्चा, अब पार्टी ने दिया बड़ा झटका
radha mohan das agarwal

चार बार से गोरखपुर शहर विधानसभा से चुनाव जीत रहे राधा मोहन दास अग्रवाल

गोरखपुर. लगातार चार जीत हासिल करने वाले भाजपा विधायक डाॅ.राधा मोहन दास अग्रवाल इस बार विधानसभा में पार्टी के मुख्य सचेतक नहीं रहेंगे। सरकार में मंत्री पद की आस टूटने के बाद विधायक डाॅ. आरएमडी को यह दूसरा झटका लगा है। डाॅ.आरएमडी अभी कुछ दिन पहले अपनी ही सरकार में सड़क पर उतर अवैध शराब के खिलाफ आंदोलन व महिला पुलिस अधिकारी को सार्वजनिक रूप से बुरी तरह डांटने-फटकारने के लिए चर्चा में आए थे।

भाजपा के सीनियर एमएलए में शुमार डाॅ.राधा मोहन दास अग्रवाल कभी गोरक्षनाथ मंदिर के करीबी हुआ करते थे। पहला चुनाव उन्होंने मंदिर के आशीर्वाद से ही हिन्दू महासभा से लड़कर जीता था। इस चुनाव में उन्होंने चार बार से लगातार जीत हासिल करने वाले भाजपा के पूर्व मंत्री शिव प्रताप शुक्ल को करारी शिकस्त दी थी। यह 2002 की बात है। गोरखनाथ मंदिर के तात्कालीन उत्तराधिकारी व वर्तमान महंत तथा प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ बीजेपी विधायक शिव प्रताप शुक्ल से खासे नाराज हो गए थे। उन्होंने सीधे तौर पर बीजेपी के प्रत्याशी शिव प्रताप शुक्ला के खिलाफ ताल ठोकते हुए अखिल भारतीय हिंदू महासभा के प्रत्याशी डाॅ.राधा मोहन दास अग्रवाल के पक्ष में प्रचार शुरू कर दी। पूरे शहर में बीजेपी प्रत्याशी के खिलाफ योगी ने प्रचार व नुक्कड़ सभाएं की। नतीजा यह रहा कि मंदिर समर्थित उम्मीदवार डॉ.राधा मोहन दास अग्रवाल ने बीजेपी के शिवप्रताप का विजय रथ रोक दिया। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के डॉ.अग्रवाल 38830 वोट पाकर जीत गए। समाजवादी पार्टी के प्रमोद टेकरीवाल 20382 वोट पाकर दूसरे जबकि चार बार लगातार जीतने वाले शिव प्रताप शुक्ला 14509 वोट पाकर ही संतोष किये। जीतने के बाद डाॅ.आरएमडी भाजपाई हो गए।


2007 में बीजेपी ने शिवप्रताप शुक्ला की बजाय हिन्दू महासभा से जीत हासिल करने वाले डॉ.राधा मोहन दास अग्रवाल को अपने सिंबल पर उतारा। डॉ.अग्रवाल ने 49714 वोट पाकर बीजेपी का परचम लहराया। फिर 2012 में भी बीजेपी प्रत्याशी के रूप में डॉ.राधा मोहन दास उतरे और रिकॉर्ड 80680 वोट पाकर जीते तो 2017 में भी रिकार्ड मतों से जीत हासिल किए। हालांकि, पिछले दो चुनावों से बताया जा रहा है कि मंदिर से उनकी दूसरी भी जगजाहिर होने लगी। आलम यह कि दोनों चुनाव में योगी आदित्यनाथ के समर्थक यह मांग करते रहे कि बीजेपी डाॅ.आरएमडी को टिकट न दें। लेकिन पार्टी नेतृत्व अपने इस जिताउ प्रत्याशी को छोड़ना नहीं चाहती थी।



पार्टी सूत्रों की मानें तो इस बार तो चुनाव के पहले और चुनाव के दौरान भी काफी भितरघात हुए। फिर भी डाॅ.राधामोहन अपने जीत के प्रति आश्वस्त दिखे। यही नहीं प्रचंड बहुमत मिलने के बाद उनको उम्मीद थी कि सरकार में मंत्री पद से उनको जरूर नवाजा जाएगा। लेकिन मंत्रियों की लिस्ट में अपना नाम न देखकर उनको झटका लगा। अपनी टूटी उम्मीद को उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से जाहिर भी की थी।


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सरकार बनने के बाद जनता के साथ सड़क पर आ गए

उधर मंत्री पद नहीं मिलने से व्यथित शहर विधायक डाॅ.राधामोहन दास अग्रवाल पूरी तरह से सक्रिय हो गए। अपनी ही सरकार में वह जनता के मुद्दों को लेकर लगातार सड़कों पर आंदोलन करते दिखे। सबसे अधिक चर्चा कच्ची के खिलाफ लोगों के जनाक्रोश के समर्थन में उतरने पर उनको मिली। चिलुआताल क्षेत्र में कुछ महिलाएं शराब की दुकान खुलने का विरोध कर सड़क पर जाम लगाई थी। बताया जा रहा है कि महिलाएं इस प्रदर्शन में विधायक डाॅ.आरएमडी को भी बुलाई थी। लेकिन शहर विधायक थोड़ी देरी से पहुंचे इसके पहले वहां पुलिस पहुंच गई। पुलिस टीम की अगुवाई कर रही थी गोरखनाथ सीओ चारू निगम। आरोप है कि महिला आईपीएस ने महिलाओं को जबरिया हटवा दिया। उनके साथ पुलिस ने मारपीट की। इसमें बुजुर्ग महिला, गर्भवती व एक बच्चे को भी चोटें आई। थोड़ी देर में ही बीजेपी विधायक भी पहुंच गए। उन्होंने फिर सड़क जाम करवा दिया और खुद अगुवाई करने लगे। थोड़ी देर में ही मजिस्ट्रेट व महिला आईपीएस मौके पर पहुंच गए। विधायक महिला आईपीएस को देखते ही बिफर गए। सिटी मजिस्ट्रेट से बात करने के दौरान जब महिला आईपीएस ने विधायक को बीच में टोका तो उन्होंने सार्वजनिक डांट पिला दी। विधायक ने आईपीएस चारू निगम से बात करने से मना करते हुए किसी सीनियर को बुलाने का निर्देश दिया। मौके पर एसपी सिटी पहुंचे। विधायक की डांट से आईपीएस चारू रो पड़ी थी। यह मामला प्रदेश में चर्चित हो गए।


आईपीएस एसोसिएशन विधायक के खिलाफ आ गया। विधायक अपनी बात पर अड़े रहे। उन्होंने महिलाओं संग ज्यादती की बात सामने रखी। इसके बाद वह जनपद में चल रहे अवैध शराब के धंधे के खिलाफ आंदोलन का ऐलान कर दिया। अपनी ही सरकार में उन्होंने एक दिन की जनसुनवाई के लिए गांधी प्रतिमा के पास बैठने का निर्णय लिया। सरकारी मशीनरी के हाथ पांव फूलने लगे। सरकार की भी किरकिरी होने लगी। जिन अवैध धंधों पर बीजेपी दूसरी सरकारों को घेरती रही, वह उसके शासनकाल में बेखौफ चल रही। खुद उनके विधायक के सड़क पर आने से सरकार भी परेशान हो उठी। विधायक धरने पर बैठे तो मुख्यमंत्री आवास से उनसे संपर्क किया गया। विधायक लोगों की शिकायतें लेकर लखनउ गए और मुख्यमंत्री से मुलाकात भी किया। हालांकि, मामला इसके बाद ठंडा पड़ गया।
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