UP में निषाद पार्टी के भाजपा से गठबंधन के बाद बदला समीकरण, जानिये महागठबंधन पर क्या पड़ेगा प्रभाव

गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में तकरीबन 3.5 लाख निषाद हैं, यहां से सपा- बसपा गठबंधन से रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया गया है ।

By: Akhilesh Tripathi

Published: 04 Apr 2019, 06:48 PM IST

वाराणसी/गोरखपुर. निषाद पार्टी के बीजेपी के साथ गठबंधन करने और प्रवीण निषाद के भाजपा में शामिल होने के बाद यह तय हो गया है कि प्रवीण निषाद एक बार फिर गोरखपुर से चुनाव लड़ सकते हैं । बीजेपी को उपचुनाव में गोरखपुर सीट पर हार का सामना करना पड़ा था, बीजेपी प्रवीण निषाद के जरिये इस सीट को एक बार फिर अपने कब्जे में करना चाहती है। वहीं निषाद पार्टी के बीजेपी के साथ आने से महागठबंधन को पूर्वांचल में बड़े झटके के तौर पर देखा जा रहा है ।


गोरखपुर लोकसभा सीट पर निषाद वोटर निर्णायक भूमिका में होते हैं । गोरखपुर संसदीय क्षेत्र में तकरीबन 3.5 लाख निषाद हैं। सपा- बसपा गठबंधन से रामभुआल निषाद को प्रत्याशी बनाया गया है, ऐसे में अगर बीजेपी से प्रवीण निषाद को टिकट दिया जाता है तो निषाद वोटों में बिखराव होना तय है।


यूपी में तकरीबन 12 फीसदी आबादी मल्लाह, केवट और निषाद जातियों की है. यूपी की तकरीबन 18- 20 लोकसभा सीटें ऐसी हैं जहां निषाद वोटरों की संख्या अधिक है. पूर्वांचल की कई लोकसभा सीटों पर इनकी संख्या और भी अधिक है ।


गोरखपुर, मिर्जापुर, भदोही, वाराणसी, इलाहाबाद ,फतेहपुर, गाजीपुर, बलिया, संतकबीर नगर और मऊ लोकसभा सीटों पर निषाद वोटरों की संख्या अधिक है, महागठबंधन की इन सीटों पर स्थिति मजबूत मानी जा रही थी, मगर चुनाव से ठीक पहले निषाद पार्टी के अलग हो जाने से महागठबंधन को नुकसान होना तय है, हालांकि ये परिणाम को कितना प्रभावित करेंगे यह कहना जल्दीबाजी होगी ।

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