2019 लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लिये यहाँ सोशल इंजीनियरिंग का गणित साधना परेशानी का सबब


जातीय समीकरण में बिगड़ न जाये चुनावी समीकरण

गोरखपुर क्षेत्र में बीजेपी को अपने 2014 के इतिहास को दोहराना टेढ़ी खीर हो सकती है। ओबीसी व दलित कार्ड खेलने को आतुर बीजेपी के लिए इस क्षेत्र की सीटों पर सोशल इंजीनियरिंग का गणित फिट करना परेशानी का सबब बन सकता है। अगर जातीय समीकरण फिट करने की बीजेपी ने कोशिश की तो कई सीटों पर अपने प्रत्याशी बदलने पड़ेंगे।
बीजेपी ने 2014 लोकसभा चुनाव में ओबीसी कार्ड तो खेल था लेकिन मंडल म् टिकट बंटवारे में जातीय समीकरण को धता बता दिया था। आलम यह कि चार सीटों पर ब्राह्मण प्रत्याशी उतार दिए थे। दो सीटों पर ठाकुर प्रत्याशी मैदान में थे जबकि एक सीट कुर्मी व एक सीट कुशवाहा को दिया था। एक सीट अनुसूचित के लिए रिजर्व होने की वजह से अनुसूचित जाति का प्रत्याशी उतारा गया। लेकिन अन्य पिछड़ा वर्ग का प्रतिनिधित्व उसके अनुपात से नहीं मिल सका।


गोरखपुर-बस्ती मंडल में नौ लोकसभा सीट

गोरखपुर मंडल मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रभाव वाला क्षेत्र है। मंडल के चार जिलों गोरखपुर, कुशीनगर, देवरिया और महराजगंज में लोकसभा की छह सीटें हैं। इसमें गोरखपुर में दो लोकसभा सीट गोरखपुर और बांसगांव है। देवरिया जिले में भी दो लोकसभा सीटें हैं। यहां देवरिया व सलेमपुर लोकसभा सीट है। कुशीनगर जिले में एक लोकसभा सीट है जबकि महराजगंज जिले में भी एक ही लोकसभा सीट है। इसी तरह बस्ती मंडल में तीन लोकसभा सीट है। बस्ती में एक, डुमरियागंज और सन्तकबीरनगर।

2014 में भाजपा की झोली में सभी नौ लोकसभा सीट

गोरखपुर में 2014 लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने जोरदार प्रदर्शन किया था। गोरखपुर-बस्ती मंडल की सभी नौ सीटों पर बीजेपी ने जीत का परचम फहराया था। गोरखपुर से सांसद के रूप में योगी आदित्यनाथ पांचवीं बार संसद पहुंचे थे जबकि भाजपा के कमलेश पासवान बांसगांव से दूसरी बार लोकसभा पहुंचे थे। यह सीट अनुसूचित जाति के लिए रिजर्व सीट है। देवरिया लोकसभा सीट से भाजपा के कद्दावर नेता कलराज मिश्र भारी मतों से चुनाव जीते जबकि खांटी समाजवादी हरिकेवल के सुपुत्र रविंद्र कुशवाहा बीजेपी की टिकट पर सलेमपुर से सांसद बने। कुशीनगर लोकसभा सीट से सांसद के रूप में राजेश पांडेय उर्फ गुड्डू चुनाव जीते। राजेश पांडेय ने कांग्रेस सरकार के तत्कालीन गृह राज्य मंत्री आरपीएन सिंह को शिकस्त दी थी। महराजगंज से सांसद के रूप में बीजेपी के पंकज चैधरी ने जीत हासिल की थी।
जबकि बस्ती मंडल की बस्ती लोकसभा सीट से भाजयुमो के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष हरीश द्विवेदी ने चुनाव जीती। कांग्रेस छोड़ बीजेपी में आये जगदंबिका पाल डुमरियागंज से सांसद हुए। वही संतकबीर नगर से बीजेपी के कद्दावर नेता रामपति राम त्रिपाठी के सुपुत्र शरद त्रिपाठी सांसद बने थे।

सोशल इंजीनियरिंग थोड़ी परेशान कर सकती है बीजेपी को

बीजेपी इस बार टिकट बंटवारे को लेकर सभी जातियों को साधना चाहती है। पिछली बार ओबीसी कार्ड खेलने के बाद भी प्रत्याशी उतारने में जातीय समीकरण को दरकिनार कर दिया गया था। इस बार बीजेपी कोई मौका नहीं गंवाना चाहती है। वजह यह कि विपक्ष पूरी तैयारी के साथ सभी वोट बैंक का खयाल रखे हुए है। ऐसे में बीजेपी अपने कई सांसदों के टिकट काट सकती है। पार्टी के लिये यह तय करना भी मुश्किल हो सकती कि किस कद्दावर के टिकट को काट कौन प्रत्याशी को आगे लाये। जानकर मानते हैं कि पार्टी के लोग बगावत की आशंका से भी परेशान हैं। यह भी है कि अगर सभी प्रमुख जातियों को प्रतिनिधित्व नहीं मिला तो जनता में गलत संदेश भी जा सकता है।

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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