UP Nagar Nikay Chunav 2017 : मुख्यमंत्री के शहर में बीजेपी को घूंघट की आड़ में राजनीति करने वाले पुरुष हैं पसंद

Gorakhpur Nagar Nikay Chunav में महिला के नाम पर पुरुष पदाधिकारियों के घरवालों को टिकट, पार्टी के लिये काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं की उपेक्षा

गोरखपुर। महिला सम्मान का दम्भ भरने वाली भारतीय जनता पार्टी की इस Gorakhpur Nagar Nikay Chunav में कलई खुल गयी है। पार्टी की निष्ठावान और समर्पित कार्यकर्ताओं को ही टिकट नहीं मिला है। पार्टी ने उन्हें ही समर्पित और निष्ठावान कार्यकर्ता मान लिया, जिनके नाम मे आगे या पीछे किसी पुरुष कार्यकर्ता या पदाधिकारी का नाम टैग किया गया या जो धनबल से प्रभावित करता रहा। पार्टी में काम करने वाली महिला कार्यकर्ताओं की सबसे अधिक उपेक्षा की गई। टिकट बंटवारे में इनको कोई तवज्जो नहीं मिली। हालांकि, कोई भी पूर्व या वर्तमान महिला पदाधिकारी फिलहाल कुछ बोल नहीं रहा। अलबत्ता दबी जुबान जरूर अपनी पीड़ा जरूर बयां कर रही हैं। मन में चल रही हलचल को अभी दबाए बैठी हैं और खुद को ठगा महसूस कर रही हैं।
बीते विधानसभा चुनाव के पहले महिलाओं के खिलाफ बसपा के तत्कालीन नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी के बयान को बीजेपी ने महिलाओं के सम्मान से जोड़कर वोटों की जमकर फसल काटी थी। राजनैतिक फायदे के लिए ही पलभर में अछूत करार दिए गए दयाशंकर सिंह की पत्नी स्वाति सिंह को हाथोहाथ लिया ही उनको पद देने के साथ दयाशंकर की पार्टी में सम्मानजनक वापसी भी हुई।
उस समय महिला के सम्मान के नारे लगाए जा रहे थे। आज भी देश और प्रदेश की सरकारों द्वारा भी महिला शक्ति की अनदेखी न करने की लगातार अपील की जा रही है।
लेकिन निकाय चुनाव में बीजेपी ने महिला कार्यकर्ताओं की अनदेखी कर दी। उन महिलाओं को भी टिकट के लिए पात्र नहीं समझा गया जिन्होंने अपना अच्छा खासा वक़्त पार्टी को दुर्दिन से उबारने में लगाया। राजनीति में समय देकर अच्छा करने वाली इन महिला कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों को न तो टिकट मिला, न ही किसी ने उनके कार्यों का सम्मान किया।

मन मसोस कर चुनाव प्रचार में जुटी महिला कार्यकर्ता

भाजपा में काम कर रही महिला कार्यकर्ता नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भाजपा द्वारा UP Nagar Nikay Chunav जीतने का हर सम्भव प्रयास किया जा रहा है। भाजपा ने कई जगहों पर बाहर से आए कार्यकर्ताओं को गले लगा कर अपनों को अलग-थलग छोड़ दिया है। इसका खामियाजा भुगतना पड सकता है। यह बात अलग है कि अंदरखाने में विरोध करने वालों की संख्या काफी कम है, फिर भी इसका कुछ असर तो दिखेगा।
नाखुश महिला कार्यकर्ताओं द्वारा सुभाष चन्द्र बोष नगर से पूर्व में भाजपा से पार्षद रही रेणुका श्रीवास्तव का उदाहरण भी दिया जा रहा है। जिन्होंने पार्टी की गाइडलाइन को दर-किनार कर खुद को निर्दल प्रत्याशी के रूप में मैदान में हैं।

पुरूष टैग वाली महिलाओं को टिकट देने का आरोप

Gorakhpur Nagar Nigam में कई वार्ड महिलाओं के लिए आरक्षित हैं। भाजपा ने भी इन वार्डों से महिलाओं को मैदान में उतारा है। लेकिन ये कोई निष्ठावान या समर्पित कार्यकर्ता नहीं हैं। जिनके नामों के आगे-पीछे किसी न किसी सफल राजनैतिक पुरुष का नाम टैग है। ये महिलाएं किसी वर्तमान या पूर्व पार्षद और पदाधिकारी की पत्नी या संबंधी हैं।

इनको देखिए
-महिला आरक्षित सीट मानबेला से भाजपा की प्रत्याशी सुधा देवी हैं। इनकी घोषणा करते वक़्त लिस्ट में स्पष्ट तौर पर लिखा गया है कि ये अमृतलाल भारती की भाभी हैं।

-सुभाष नगर से पार्षद मोहन सिंह की पत्नी आरती सिंह को

-झरना टोला से पार्षद रमेश गुप्ता की पत्नी संध्या गुप्ता को

-पार्षद मंतालाल की पत्नी मीरा यादव को घोषीपुरवा

-पार्षद रणंजय सिंह की माता निर्मला सिंह को गिराधरगंज से उम्मीदवार बनाया गया है।

-हियुवा के महानगर संयोजक रामभुआल कुशवाह की पत्नी अंजू कुशवाह को महेवा से उम्मीदवार बनाया गया है।

-पार्षद रामभवन निषाद की पत्नी हिरामती देवी को नौसढ़ से प्रत्याशी बनाया गया है।

ये भी मांग रहे थे टिकट लेकिन नहीं मिली सफलता


-रेणुका श्रीवास्तव, भाजपा से पूर्व पार्षद
-माया श्रीवास्तव, भाजपा के एक मंडल की कार्यसमिति सदस्य

-पदमा गुप्ता, भाजपा की मेन बॉडी में पदाधिकारी, महापौर के लिए आवेदन किया था

-अर्चना सिंह, महानगर भाजपा में पदाधिकारी

-निर्मला द्विवेदी, भाजपा महिला मोर्चा में क्षेत्रीय अध्यक्ष

-संध्या शाही, विसुनदेव शाही की पत्नी और सक्रिय कार्यकर्ता हैं। विसुनदेव शाही भाजपा कार्यसमिति में रहते हुए भाजपा के बुरे दिनों में साथी रहे हैं

 

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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