पूर्वांचल की बीमारियों के उन्मूलन के लिए 2020 से हो सकेगा शोध, सीएमआरसी का मुख्यमंत्री ने किया शिलान्यास, आर्इ बैंक का लोकार्पण

पूर्वांचल की बीमारियों के उन्मूलन के लिए 2020 से हो सकेगा शोध, सीएमआरसी का मुख्यमंत्री ने किया शिलान्यास, आर्इ बैंक का लोकार्पण

Dheerendra Vikramadittya | Publish: Sep, 03 2018 01:09:32 AM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

104 करोड़ की लागत वाली दो परियोजनाओं का शिलान्यास

सीएम योगी आदित्यनाथ ने रविवार को बीमारी से त्रस्त पूर्वांचल को संजीवनी देने वाली दो परियोजनाओं का शिलान्यास किया। सीएम ने बी.आर.डी. मेडिकल काॅलेज परिसर में 104 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली दो परियोजनाओं, 84 करोड़ की लागत से बनने वाली आर.एम.आर.सी. तथा 20 करोड़ की लागत से निर्मित होने वाली सी.आर.सी. का भूमि पूजन व शिलान्यास किया। सीएम ने आई बैंक का लोकार्पण भी किया। इसके बाद उन्होंने स्व. कुंवर बहादुर कौशिक द्वारा लिखित पुस्तक ’’हेमू विक्रमादित्य’’ का विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पूर्वी उत्तर प्रदेश में कोई आई बैंक नही था यह आई बैंक पूर्वी उत्तर प्रदेश का पहला है। उन्होंने यह भी बताया कि पूर्वान्चल पिछले 40 वर्षों से इंसेफलाइटिस जैसी बीमारी से त्रस्त रहा, इस बीमारी पर नियंत्रण पाने के उद्देश्य से आर.एम.आर.सी. का शिलान्यास किया गया है, यह संस्थान स्वास्थ्य शोध की समग्र स्थिति में सुधार एवं क्षमता निर्माण के विषय में कार्य करेगा और विभिन्न चिकित्सा संस्थानों को अनुसंधान के क्षेत्र में क्षमता निर्माण करेगा। यह शोध सेन्टर में पूर्वी उत्तर प्रदेश के लिए काफी लाभकारी सिद्ध होगा। उन्होंने वेक्टरजनित बीमारियों को पता कर उसका समय से उपचार यदि किया जाता है तो निश्चित रूप से परिणाम सार्थक सिद्ध होता है।

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मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि इंसेफलाइटिस बीमारी से पीड़ित बच्चों की मृत्यु दर 20 से 25 प्रतिशत है और जो बच्चे बचते है उसमें अधिकांश बच्चे शारीरिक रूप से दिव्यांगता के शिकार होते है। इस स्थिति पर नियंत्रण पाने के लिए सी.आर.सी. की स्थापना की जा रही है। यह मासूमों के सुनहरे भविष्य के लिए बेहतर सिद्ध होगा।
उन्होंने यह भी बताया कि प्रदेश में 250 करोड़ की लागत से 8 सुपर स्पेसलिटी अस्पताल बनकर तैयार हो गया है जिसे अगले माह लोकार्पित किया जायेगा इसके अतिरिक्त जनपद में एम्स की प्रगति काफी तीव्र है और वर्ष 2020 तक एम्स पूर्ण रूप से संचालित हो जायेगा। उन्होंने बताया कि शीघ्र ही 500 बेड का बाल रोग संस्थान भी प्रारम्भ हो जायेगा।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उत्तर प्रदेश के लिए 13 नये मेडिकल काॅलेज दिये है। उन्होंने यह भी बताया कि बी.एच.यू. को एम्स के स्तर का बनाने के लिए भी कार्य किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इंसेफलाइटिस पर काफी नियंत्रण पाया गया है और इसके उन्मूलन के लिए आवश्यक है कि सफाई पर विशेष ध्यान दिया जाये और स्वास्थ्य एवं स्वच्छता के प्रति लोगों में जागरूकता अति आवश्यक है तभी इस बीमारी को नियंत्रित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि यदि टीमवर्क होगा तो निश्चित रूप से उसके बेहतर परिणाम होंगे।
इसके पूर्व मुख्यमंत्री ने सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में अस्थायी रूप से निर्मित समेकित क्षेत्रीय केन्द्र (दिव्यांग जन) का लोकार्पण किया तथा विभिन्न कमरों में जाकर वहां की व्यवस्थाओं का भी निरीक्षण किया। यह केन्द्र अभी अस्थायी रूप से सीतापुर नेत्र चिकित्सालय में संचालित होगा और मेडिकल कालेज में भवन तैयार होने के उपरान्त वहां पर शिफ्ट होगा। सी.आर.सी. के संचालन से आज से ही दिव्यांग जनों को बेहतर सुविधाएं मिलने में सुविधा होगी।

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बी.आर.डी. मेडिकल कालेज में आयोजित जनसभा की अध्यक्षता कर रहे भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री थावर चन्द गहलोत ने कहा कि एक राज्य में एक सी.आर.सी. होता है लेकिन यूपी में दो सी.आर.सी. की स्थापना की गयी है जिसमें एक लखनऊ में तथा दूसरा गोरखपुर में होगा। उन्होंने दिव्यांगों के सशक्तिकरण के लिए एक्ट बनाया गया है जिसकी अन्य देशों में भी सराहना की जा रही तथा उसकी मांग हो रही है। प्रदेश में लगभग 3000 कैम्प आयोजित कर लाखों की संख्या में दिव्यांगों को लाभान्वित किया गया है। दिव्यांगों के हितार्थ अनेक योजनाएं संचालित की जा रही है। उन्होंने बताया कि 3 लाख दिव्यांगों को कौशल प्रशिक्षण तथा 7 लाख दिव्यांगों को 3 से 4 प्रतिशत की दर पर ऋण उपलब्ध कराया गया है और कौशल प्रशिक्षण के तहत 2000 का मानदेय भी दिया जाता है।

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विशिष्ठ अतिथि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे.पी. नड्डा ने कहा कि अच्छी नीयत से कार्य करने से चैमुखी विकास होता है। 84 करोड़ की लागत से बनने वाले इस इस रिसर्च सेन्टर में आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होगी जो बीमारियों की जानकारी देने में सहयोगी सिद्ध होगी। उन्होंने निपाह वायरस के बारे में चर्चा करते हुए कहा कि समय से निपाह वायरस के बारे में जानकारी मिल जाने से सही इलाज में लोगों को सहायता मिली यह वायरोजी सेन्टर की देन है। यह ताकत अब गोरखपुर को मिलने जा रही है। गोरखपुर में जेई/एइएस से बचाव के लिए मुख्यमंत्री ने लगातार कार्य किया है जिसके कारण केन्द्रीय स्वास्थ मंत्री को 5 बार गोरखपुर आना पड़ा।

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इस अवसर पर चिकित्सा स्वास्थ्य एवं प्राविधिक शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन, जिले के सभी विधायक, महापौर व जन प्रतिनिधि गण के साथ अपर मुख्य सचिव सूचना अवनीश अवस्थी, प्रमुख सचिव चिकित्सा स्वास्थ्य रजनीश दुबे, हेल्थ रिसर्च के सचिव डाॅ. बलराम भार्गव, मण्डलायुक्त अमित गुप्ता, जिलाधिकारी के.विजयेन्द्र पाण्डियन आदि मौजूद रहे।

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