तो क्या अब राजनीति की नर्सरी में भावी नेता सीखेंगे अपराध का ककहरा !

तो क्या अब राजनीति की नर्सरी में भावी नेता सीखेंगे अपराध का ककहरा !

Dheerendra Vikramadittya | Updated: 30 Aug 2018, 03:53:51 PM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India


गोविवि ने ऐसे छात्रों को चुनाव लड़ने की अनुमति दी जिनपर केस दर्ज हों लेकिन सजा न हुई हो

दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विश्वविद्यालय के छात्रसंघ चुनावों में ऐसे छात्रों को चुनाव लड़ने की अनुमति दे दी गई है जिनके उपर मुकदमें तो दर्ज हैं लेकिन वह सजायाफ्ता नहीं हैं। विवि के इस निर्णय से राजनीति की नर्सरी कहे जाने वाले छात्रसंघों के अपराधिकरण का अंदेशा भी जताया जा रहा है। मजे की यह कि विवि प्रशासन लिंगदोह कमेटी की सिफारिशों को अक्षरशः लागू करने का दावा कर रहा लेकिन अपराध के मामलों में कमेटी की सिफारिशों को दरकिनार कर रहा। मौजूं सवाल यह कि छात्रसंघ में क्या अपराधिक छवि के प्रत्याशियों की एंट्री से राजनीति के अपराधिकरण या बाहुबल को प्रश्रय नहीं मिलने जा रहा।

गोरखपुर विवि में छात्रसंघ चुनावों का ऐलान 31 अगस्त को कर दिया जाएगा। 15 सितंबर के पहले यहां छात्रसंघ चुनाव करा लिए जाएंगे। दो दिन पहले छात्रसंघ चुनाव को लेकर कुलपति प्रो.वीके सिंह की अध्यक्षता में एक बैैठक हुई। इस बैठक में कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए। चुनाव अधिकारी प्रो.ओपी पांडेय ने विवि के निर्णय की जानकारी देते हुए बताया कि छात्रसंघ चुनाव में वे भी छात्र चुनाव लड़ सकते हैं जिन पर केस तो दर्ज है लेकिन वह किसी कोर्ट के सजायाफ्ता न हो। उन्होंने बताया कि विवि ने यह माना है कि केवल केस दर्ज होना किसी को अपराधी साबित नहीं करता है।
उधर, विवि के इस निर्णय के बाद कई सवाल भी खड़े होने लगे। मौजूं सवाल यह कि जिस लिंगदोह की सिफारिशों के अक्षरशः पालन की बात विवि कर रहा है वह अपराधिक प्रवृत्ति के छात्रों को चुनाव से रोकने के लिए जो सिफारिश की है उसे क्यों नहीं माना जा रहा है। लिंगदोह कमेटी के अनुसार ऐसे किसी भी छात्र को छात्रसंघ चुनाव लड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती है जो सजायाफ्ता हो या उसके उपर कोई केस दर्ज हो और उसका ट्रायल चल रहा हो।

क्या कहते हैं चुनाव अधिकारी

छात्रसंघ चुनाव में विवि के निर्णय पर चुनाव अधिकारी प्रो.ओपी पांडेय बताते हैं कि लिंगदोह की सिफारिशों की एक एक लाइन पर विधि परामर्शदाताओं से व्याख्या कराया गया। विवि के विधिवेत्ताओं के अनुसार लिंगदोह में यह है कि छात्र पर कोई केस होने के बाद निर्णय न आया हो या उसे सजा न मिली हो। प्रो.पांडेय के अनुसार विधि के जानकारों से रायशुमारी के बाद तय हुआ कि जिन पर केस है और कोई निर्णय न हुआ हो वे चुनाव लड़ सकते हैं। उन्होंने बताया कि बैठक में लोगों की राय थी कि एमपी-एमएलए आदि बड़े चुनावों में ऐसे लोगों को चुनाव लड़ने की इजाजत है जिन पर केस चल रहे हों तो यहां क्यों नहीं।


यह है लिंगदोह की संस्तुतियांः

- छात्रसंघ चुनावों से राजनीतिक दल पूरी तरह दूर रहेंगे
- चुनाव में किसी प्रकार के प्रिंटेड मैटर का प्रयोग नहीं होगा। प्रिंटेड पंपलेट, पोस्टर, बैनर आदि का प्रयोग नहीं होगा।
- छात्रसंघ चुनाव में हाथ से लिखे पोस्टर, पंपलेट का ही प्रयोग हो सकेेगा
- पांच हजार से अधिक रुपये कोई प्रत्याशी खर्च नहीं करेगा
- आयु सीमा भी चुनाव लड़ने के लिए निर्धारित होगी। स्नातक करने वालों की उम्र 17 से कम और 22 वर्ष से अधिक न हो। वहीं परास्नातक करने वालों की उम्र 25 वर्ष से अधिक न हो
- रिसर्च करने वाले छात्र या छात्रा की उम्र अधिकतम 28 वर्ष हो
- चुनाव प्रचार दस दिन से अधिक न हो
- चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशी का कोई क्रिमिनल रिकार्ड न हो। उस पर कोई केस न चल रहा हो या वह सजायाफ्ता न हो। प्रत्याशी के खिलाफ कभी विवि या काॅलेज ने अनुशासनात्मक कार्रवाई न किया हो।
- चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों की उपस्थिति क्लास में 75 प्रतिशत से कम न हो
- एक बार चुनाव लड़ने के बाद चाहे उसे जीत मिले या हार दुबारा नहीं लड़ेगा
- चुनाव प्रचार में किसी प्रकार के वाहन, जानवर एवं लाउडस्पीकर का प्रयोग वर्जित होगा
- सत्र प्रारंभ होने के 6 से 8 हफ्तों के भीतर चुनाव कराया जाएगा
- चुनाव प्रचार कैंपस के बाहर नहीं होगा
- प्रचार के लिए पठन-पाठन में बाधा नहीं पहुंचाई जाए

खबरें और लेख पढ़ने का आपका अनुभव बेहतर हो और आप तक आपकी पसंद का कंटेंट पहुंचे , यह सुनिश्चित करने के लिए हम अपनी वेबसाइट में कूकीज (Cookies) का इस्तेमाल करते हैं। हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति (Privacy Policy ) और कूकीज नीति (Cookies Policy ) से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned