बीआरडी मेडिकल कॉलेज हादसा: आरोपी डॉ. सतीश कुमार ने किया सरेंडर

डॉ. सतीश ने अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद न्यायालय ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया।

By: Akhilesh Tripathi

Updated: 11 Sep 2017, 07:42 PM IST

गोरखपुर. बीआरडी मेडिकल कॉलेज हादसे के एक और आरोपी डॉ. सतीश कुमार ने सरेंडर कर दिया। डॉ. सतीश ने सोमवार को एडीजे 8 विशेष न्यायाधीश, एंटी करप्शन की अदालत में आत्मसमर्पण कर दिया, जिसके बाद न्यायालय ने उन्हें 14 दिनों की न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेज दिया। डॉ.सतीश ऑक्सीजन की उपलब्धता सम्बंधित व स्टॉक आदि के प्रभारी थे और ऑक्सीजन की सप्लाई की सुनिश्चितता डॉ.सतीश कुमार पर ही थी । इससे पहले चार आरोपी गिरफ्तार हो चुके है, जबकि पुलिस बाकी आरोपियों के ठिकानों पर लगातार छापेमारी कर रही है ।

 

 

 

 

 

रपट के अनुसार एनेस्थीसिया के हेड डॉ.सतीश ऑक्सीजन की उपलब्धता के लिए जिम्मेवार थे, लेकिन इन्होंने कभी भी स्टॉक रजिस्टर या लॉग बुक चेक करने की जहमत तक नहीं उठाई। कर्मचारियों के भरोसे सब रहा। हद तो यह कि जब ऑक्सीजन के लिए अफरातफरी मची थी, पूरे देश की निगाहें मेडिकल कॉलेज में थी तो वह बिना किसी आधिकारिक सूचना के मुंबई 11 अगस्त को चले गए। 100 बेड वाले एईएस वार्ड में एसी ख़राब होने की लिखित शिकायत के बाद भी इन्होंने कोई सक्रियता नहीं दिखाई।

हादसे में फरार बाकी आरोपियों की तलाश में पुलिस, एसटीएफ और क्राइम ब्रांच की टीमें लखनऊ, कानपुर, इलाहाबाद, नोएडा और गाजियाबाद भेजी गईं हैं। पुलिस का दावा है कि सभी आरोपी जल्दी ही गिरफ्तार कर लिए जाएंगे। हाईकोर्ट द्वारा गिरफ़्तारी पर रोक की याचिका ख़ारिज करने के बाद आरोपियों के बचने का रास्ता तो बंद हो चुका है मगर कई आरोपी खुद को पुलिस की नजरों से बचाने में सफल हो गए हैं। पुलिस का मानना है कि ठिकाना बदलने की वजह से वे पुलिस के हत्थे नहीं चढ़ रहे हैं। आशंका यह भी है कि फरार सभी आरोपी या तो विदेश भाग चुके हैं या किसी अन्य राज्य में शरण लिए हैं।

आरोपियों पर इन धाराओं में केस है दर्ज
आरोपियों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 409, 308, 120 बी, 420, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 8, इंडियन मेडिकल काउंसिल एक्ट 1956 के सेक्शन 15, आईटी एक्ट 2000 के सेक्शन 66 के तहत केस दर्ज है।

इन लोगों की है पुलिस को तलाश

लिक्विड ऑक्सीजन आपूर्तिकर्ता पुष्पा सेल्स का मनीष भंडारी
पुष्पा सेल्स में ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी। ऑक्सीजन जीवनरक्षक है। इसकी आपूर्ती बंद करना गुनाह है। इसके लिए आपूर्तीकर्ता मनीष भंडारी के खिलाफ केस दर्ज कराया गया था। फ़िलहाल फरार है। इसको गिरफ्तार करना पुलिस के लिए सबसे अहम चुनौती है।

 

लेखा विभाग के दो कर्मचारी
लेखाविभाग भी मौत के मंजर की पटकथा लिखने में अहम सहयोग का गुनाहगार है। जिस कमीशन की बात हो रही उसकी नींव यहीं है। हालांकि, भेजी गई रपट के अनुसार इन पर आरोप है कि जब शासन से बजट आया तो प्राचार्य को बताने में लेटलतीफी की गई। उनके पास पत्रावली देर से पेश की गई। इन आरोपों में कार्यालय सहायक उदय प्रताप शर्मा, लिपिक संजय कुमार त्रिपाठी व सहायक लेखाकार सुधीर कुमार पांडेय की लिप्तता पाई गई। इस लिए इनके खिलाफ भी प्राथमिकी दर्ज कराई गई। सुधीर कुमार पांडेय को 9 सितंबर को गिरफ्तार किया गया, जबकि दो कर्मचारी फरार हैं ।

 

मेडिकल कॉलेज में तैनात चीफ फार्मासिस्ट गजानन जायसवाल
डॉ.सतीश कुमार के साथ आक्सीजन की उपलब्धता, लॉग बुक और स्टाक बुक का जिम्मा गजानन जायसवाल पर ही था। लॉग बुक व स्टॉक बुक में अनियमित इंट्री है। कई जगह आंकड़ों में बाजीगरी दिखाने के लिए ओवरराइटिंग भी हुई है। ये भी फरार हैं।

 

इनकी हो चुकी है गिरफ्तारी
निलंबित प्राचार्य डॉ. राजीव मिश्रा
डॉ.पूर्णिमा शुक्ला- प्राचार्य की पत्नी
डॉ.कफील खान- इंसेफेलाइटिस विभाग के हेड
सुधीर कुमार पांडेय- सहायक लेखाकार

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