मथुरा जेल से रिहा होने के बाद बोले डॉ. कफील खान बोले, शुक्र है मुबंई से लाते समय पुलिस ने मेरा एनकाउंटर नहीं किया

आधी रात को मथुरा जेल से रिहा किये गए डाॅ. कफील खान। अलीगढ़ प्रशासन से रिहाई का आदेश आने में देरी के चलते देर से हुई उनकी रिहाई। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने डाॅ. कफील खान के खिलाफ एनएसए हटाकर उनकी तुरंत रिहाई का आदेश दिय था।

गोरखपुर. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले के बाद डाॅ. कफील खान को देर रात मथुरा जेल से रिहा कर दिया गया। उन्हें सीएए विरोधी आंदोलन के दौरान अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में विरोध प्रदर्शन के दौरान भड़काऊ भाषण देने के आरोप में एनएसए लगाकर जेल भेज दिया गया था, जिसे हाईकोर्ट ने सेामवार को हटाकर उनकी तुरंत रिहाई का आदेश दिया था। देर रात मथुरा जेल से रिहाई के बाद जहां डाॅ. डाॅ. कफील खान खान ने ज्यूडशियिरी का शुक्रिया अदा किया वहीं योगी सरकार पर जमकर हमला बोला। उन्होंने यूपी सरकार पर उन्हें प्रताड़ित करने का आरोप लगाया।

 

डाॅ. कफील खान ने मीडिया को दिये अपने बयान में जहां 138 करोड देशवासयिों का शुक्रिया अदा किया वहीं उत्तर प्रदेश सरकार पर प्रताडना का आरोप लगाया। उन्होंने अपने संघर्ष में साथ देने वालों का शुक्रिया अदा किया। इस दौरान उन्होंने मीडिया से बात करते हुए कोर्ट के ऑर्डर को लेकर न्यायिक व्यवस्था का धन्यवाद दिया। यूपी सरकार पर हमला करते हुए उन्होंने दावा किया कि उनपर झूठा केस बनाकर आठ महीने तक उन्हें बेकसूर जेल में रखा गया। पांच दिन बिना खाना-पानी दिये उन्हें लगातार प्रताडित किया गया। इस दौरान उन्होंने तंज करते हुए यूपी एसटीएफ को इस बात के लिये धन्यवाद भी दिया कि मुंबई से गरिफ्तार कर मथुरा लाते समय उनका एनकाउंटर नहीं किया गया।

 

 

रिहाई में भी चला ड्रामा

हालांकि हाईकोर्ट के तुरंत रिहाई के आदेश के बावजूद डाॅ. कफील खान को जेल से निकलने में देर रात हो गई। उनकी रिहाई को लेकर भी ड्रामा चला। देर शाम तक अलीगढ़ प्रशासन की ओर से ड डाॅ. कफील खान की रिहाई से संबंधित आदेश मथुरा जेल नहीं भेजे जाने से उनकी रिहाई में देर हुईँ आधी रात को रिहाई आदेश मथुरा जेल पहुंचा तब जाकर उनकी रिहाई हो सकी।

 

गोरखपुर ऑक्सीजन कांड से चर्चा में आए डाॅ. कफील खान

डाॅ. कफील खान अगस्त 2016 में बीआरडी मेडिकल काॅलेज में अप्वाइंट किये गए थे और अगस्त 2017 को वहां ऑक्सीजन की कमी से बच्चों की मौत का मामला सामने आने के बाद उनपर आरोप लगाकर उन्हें जेल भेज दिया गया। इसके लिये वह नौ महीने जेल में भी रहे और अब भी उनके खिलाफ मामला चल रहा है। हालांकि बीच में डाॅ. कफील खान ने दावा किया था कि जांच रिपोर्ट में उन्हें क्लीन चिट मिल गई है, लेकिन सरकार ने इससे इनकार किया। उसके बाद कफील खान नागरिकता संशोधन कानून के देशव्यापी विरोध प्रदशर्नों में सक्रिय हो गए और इस दौरान विरोध प्रदशर्नों में मंच भी साझा किया, जिसके बाद अलीगढ़ मुस्लिम युनिवर्सिटी में ऐसे ही एक आयोजन में भड़काऊ भाषण देने के आरोप में उन्हें जेल में डालकर उनपर एनएसए लगा दिया गया। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने मंगलवार को उनकी मां की बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए उनपर लगा एनएसए हटाते हुए उन्हें तुरंत रिहा करने का आदेश दिया।

रफतउद्दीन फरीद
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