फेसबुक ने किया कमाल, दो साल से लापता किशोरी को खोज निकाला


बैंकाक में बैठे एक यूजर ने सर्फिंग के दौरान डिटेल निकाल गोरखपुर के एक छोटे गांव तक पहुंचायी जानकारी

गोरखपुर। घर से भटकी किशोरी दो साल बाद घर वापस आ सकी। यह संभव हो सका सोशल मीडिया फेसबुक से। विदेश में रह रहे एक व्यक्ति ने किशोरी के बारे में फेसबुक पर डिटेल देखकर किशोरी के गांव के एक परिचित को बताया और फिर इन जागरूक लोगों के प्र्रयास से बिहार के वैशाली से बच्ची को लाया जा सका। किशोरी गोरखपुर से वैशाली कैसे पहुंची यह बता नहीं पा रही है। परिजन अपने बेटी को पाकर खुशी से फूले नहीं समा रहे।
गोरखपुर के बेलीपार क्षेत्र स्थित गांव जंगल दीर्घन सिंह के रहने वाले टिकोरी निषाद की बेटी सरिता करीब दो साल पहले जुलाई 2016 में घर से भटक कर कहीं चली गई थी। परिवारीजन ने सरिता की काफी खोजबीन की लेकिन उसका कोई अता पता नहीं चल सका। थकहार कर परिवारीजन बेटी की गुमशुदगी की जानकारी पुलिस को दी। पुलिस ने भी प्रार्थना पत्र लेने का कोरम पूरा कर परिवार को उसके हाल पर छोड़ दिया। परिवार के लोग घर की बेटी की खोज में लगे रहे। दिन बीता, महीना बीता फिर साल भी खत्म होने को आया। कुछ आस तो थी लेकिन बीतते समय के साथ यह आस भी निराशा में तब्दील होती जा रही थी।
सरिता का कोई पता नहीं चल सका था, दो साल के करीब इस घटना को हो चुका था।
इसी बीच बैंकाक में रह रहे एक सज्जन को एक फोटो फेसबुक पर दिखी। बैंकाक में रह रहे सोनू शाही को वैशाली के रहने वाले कृष्ण कुमार की फेसबुक प्रोफाइल पर एक लड़की की तस्वीर शेयर की गई दिखी। लड़की गोरखपुर के जंगल दीर्घन सिंह गांव की बतायी जा रही थी। सोनू शाही का मित्र अमरेंद्र शाही इसी गांव के थे। फिर क्या था सोनू शाही ने थोड़ी सक्रियता और जागरूकता दिखाते हुए इस लड़की की मदद खातिर फेसबुक का सारा डिटेल जंगल दीर्घन सिंह गांव के अपने मित्र अमरेंद्र को भेज दी। फेसबुक पर मिली तस्वीर व्हाट्सअप के माध्यम से अमरेंद्र के पास पहुंचा। संयोग से अमरेंद्र के बड़े भाई विवेक शाही इसी गांव के प्रधान हैं। उन्होंने छोटे भाई के दोस्त द्वारा भेजी गई तस्वीर को गांववालों से साझा किया। फोटो कुछ लोगों के देखने के बाद एक व्यक्ति ने लड़की को पहचान लिया। उसने पूरा पता बता दिया। बात लड़की के माता-पिता तक पहुंची। परिवारीजन के जान में जान आई। इनके खुशी का कोई ठिकाना नहीं रहा। पिता टिकोरी और उसकी पत्नी सीता निषाद ने बेटी को पहचान तो लिया लेकिन बिहार के वैशाली में अपनी बेटी का पता लगाना भी इनके लिए कठिन था। कुछ ही पल में इनकी खुशियां काफूर होती दिखी। हालांकि, प्र्रधान विवेक शाही ने इनकी मदद को आगे आए। उन्होंने बिहार भागलपुर में रहने वाले अपने रिश्तेदार से बातचीत की। फिर प्रधान विवेक शाही सरिता के परिवारीजन को लेकर वैशाली पहुंचे। सरिता एक चाय की दुकान पर मिली। स्थानीय लोगों की मदद से सरिता को वापस लाया गया।
बहरहाल, दो साल से लापता एक लड़की सोशल मीडिया की मदद से अपने घर पहुंच चुकी है।

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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