पिता जीते प्रधानी का चुनाव तो बेटे ने गांव के विकास के लिये खोल दिया अपना खजाना, दिये एक करोड़ रुपये

देवरिया में कारोबारी बेटे ने पिता के गांव का प्रधान बनते ही गांव के विकास के लिये अपनी तरफ से एक करोड़ रुपये दिये। रिजल्ट आने के तुरंत बाद 405 शौचालयों का किया उद्घाटन।

 

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

गोरखपुर/देवरिया.

पिता ने ग्राम प्रधान का चुनाव जीता तो कारोबारी बेटे ने जीत की खुशी को दोगुना करते हुए गांव के विकास के लिये अपने पास से एक करोड़ रुपये देने का ऐलान कर दिया। बेटे का कहना है कि गांव की तरक्की के लिये सरकारी बजट से अलग उन्होंने निजी तौर पर अपनी तरफ से एक करोड़ रुपये दिये हैं। ये रुपये गांव के विकास के लिये इस्तेमाल किये जाएंगे। उन्होंने पिता के प्रधानी में जीत के तुरंत बाद 405 शौचालय का उद्घाटन भी किया। लोगों के कहने पर चुनाव लड़कर जीते पिता गांव की सूरत बदलना चाहते हैं तो उनके सपने को साकार करने के लिये बेटा पूरी मदद करने को तैयार है।


देवरिया के पथरदेवा ब्लाॅक के गांव मेदी पट्टी निवासी सेवानिवृत्त शिक्षक गिरिजा लाल श्रीवास्तव का राजनीति में आने का कोई इरादा नहीं था, पर गांव के लोगों के कहने पर वह भी चुनाव में कूदे। उनका मुकाबला भी निवर्तमान प्रधान जैसे मजबूत प्रत्याशियों से था, पर गिरिजा लाल श्रीवास्तव मजबूती से लड़े और कड़े मुकाबले में 42 वोटों से जीत हासिल कर ली।


पिता की जीत से गदगद उत्तराखंड में माइंस कारोबारी बेटे सुरेन्द्र लाल ने तुरंत गांव के विकास के लिये अपनी तरफ से एक करोड़ रुपये की मदद का ऐलान कर दिया। उन्होंने ग्राम सभा के चार टोलों में मेंदीपट्टी को 40 लाख, मेदी पट्टी को 28 लाख, आराजी पट्टी को 18 लाख और बेलवरिया को 14 लाख रुपये अपनी आेर से देने का वादा किया है। इतना ही नहीं उन्होंने गांव के विकास का खाका भी खींच रखा है।


सुरेन्द्र सिंह एक कारोबारी होने के साथ-साथ समाजसेवी भी हैं। वह गांव में गरीब छात्र-छात्राओं को निशुल्क शिक्षा देने के लिये स्कूल भी चलाते हैं और गरीब व अनाथ लड़कियों की सामूहिक शादी जैसे आयोजन भी करते रहते हैं। गांव में मदद के लिये वह हमेशा तैयार बताए जाते हैं। यह पहली बार नहीं जब उन्होंने गांव के विकास के लिये इतनी बड़ी रकम दी हो। इसके पहले वह साल 2019 में डेढ़ करोड़ रुपये की लागत से नर्मदेश्वर महादेव के मंदिर का निर्माण करा चुके हैं। इसका शुभारंभ मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के हाथों हुआ था।


निर्विरोध प्रधान बनाना चाहते थे गांव वाले

1996 में जुनियर हाईस्कूल तरकुलवा से शिक्षक से रिटायर हुए नवनिर्वाचित ग्राम प्रधान गिरिजा लाल श्रीवास्तव को मेदी पट्टी गांव के लोग पहले निर्विरोध प्रधान बनाना चाहते थे। हालांकि गिरिजा लाल इसके लिये तैयार नहीं थे। लोगों के कहने पर वह तैयार हुए तो उनके मुकाबले में निवर्तमान प्रधान समेत दो प्रत्याशी भी मैदान में कूद पड़े। पर गांव के लोगों ने उनका साथ दिया और उन्होंने 45 वोटों से जीत हासिल की। उन्होंने कहा कि विकास का जो काम गांव में अधूरा रह गया है उसे पूरा करेंगे। बेटे ने जो एक करोड़ का बजट दिया है उससे गांव का विकास करेंगे और जो सरकारी बजट आएगा वो भी विकास में लगेगा।


राजनीति काे सेवा समझते हैं सुरेन्द्र्र

कारोबारी सुरेन्द्र लाल कहते हैं कि उनकी नजर में राजनीति सेवा है। उन्होंने कहा कि गांव के मोहल्लों में नाली, सीसी सड़क और सोख्ता पक्का मकान आदि का निर्माण कराया जाएगा। कहा कि हर सक्षम व्यक्ति अपने आसपास की समस्याओं का निस्तारण करेग तभी सबका विकास संभव है।

रफतउद्दीन फरीद
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