विकलांग बच्चा पैदा हुआ तो 4 डाॅक्टरों पर मुकदमा, चारों ने जांच कराकर कहा था स्वस्थ होगा बच्चा

  • निजी चिकित्सकों ने कराई थी जांच, सरकारी अस्प्ताल में हुआ प्रसव तो खुली पोल
  • डाॅक्टरों के कहने पर दम्पत्ति ने समय-समय पर कई जांचें करवायीं
  • सीएमओ की मेडिकल रिपोर्ट में भी सामने आयी चिकित्सकों की अनियमितताएं
  • दम्पत्ति की शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर दर्ज हुआ मुकदमा

पत्रिका न्यूज नेटवर्क

गोरखपुर. चार-चार निजी चिकित्सकों ने खूब जांच कराई और रिपोर्ट पाॅजिटिव दिखाकर कहा था तंदुरुस्त बच्चा पैदा होगा, लेकिन जब डिलिवरी हुई तो बच्चा जन्मजात विकलांग पैदा हआ। उसके कुछ अंग विकसित ही नहीं हुए थे। इस मामले में पुलिस ने चार डॉक्टरों के खिलाफ धोखाधड़ी का मुकदमा दर्ज किया है। हैरान कर देने वाला मामला गोरखपुर का है। पीड़ित की शिकायत के बाद सीएमओ ने भी मामले की जांच कराई तो आरोप सही पाए गए। आख्या के आधार पर पुलिस ने मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। मुकदमा गीडा (गोरखपुर इंडस्ट्रियल डेवेलपमेंट अथाॅरिटी) के देईपार निवासी अभिषेक पाण्डेय तहरीर पर डाॅ. अरुण छापड़िया, डाॅ. अंजू मिश्रा व डाॅ. नेहल छापडि़या और सहजनवां की डॉ. काजल के खिलाफ दर्ज किया गया है।

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पुलिस को दी गई तहरीर के मुताबिक अभिषेक पाण्डेय की पत्नी अनुराधा जब गर्भवती हुई तो बच्चा स्वस्थ्य पैदा हो इसके लिये डाॅक्टरों से सलाह ली और उनका कहा माना। समय-समय पर डाॅक्टरों से सलाह मश्विरा किया और उनके द्वारा कही गई सारी जांचें भी कराईं। 20 जनवरी 2020 बेतियाहाता की डॉ. अरुणा छापड़िया, 30 मार्च 2020 को डॉ. अंजू मिश्रा, 9 मई 20 को डॉ. नेहल छापड़िया और 5 अगस्त 20 को सहजनवा के बखिरा रोड की डॉ. काजल से नियमित तौर पर जांच कराई गई। इन डाॅक्टरों की सलाह पर 19वें, 25वें, 32वें व 35वें हफ्ते में लेवल टू कलर डाप्लर (गर्भस्थ शिशु की संपूर्ण शारीरिक बनावट व स्थित के बारे में) जांच भी कराई गई। रिपोर्ट में डाॅक्टरों ने बच्चे को पूरी तरह से स्वस्थ बताया था।

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15 अगस्त 2020 को अनुराधा की जब सरकारी अस्पताल (गोरखपुर जिला अस्प्ताल) में डिलिवरी हुई तो बच्चा जन्मजात विकलांग पैदा हुआ। उसका एक हाथ भी विकसित नहीं हुआ और नाक व ललाट भी अविकसित थे। जन्मजात विकलांग बच्चा पैछा होने पर पति-पत्नी हैरान रह गए, क्योंकि उन्हें एक नहीं चार-चार डाॅक्टरों ने बच्चे के स्वस्थ होने की बात कही थी।

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इसके बाद पति-पत्नी ने जिलाधिकारी के साथ ही एसएसपी और आईजीआरएस पोर्टल भी भी शिकायत की। उनकी शिकायत के बाद सीएमओ ने इस मामले पर मेडिकल बोर्ड का गठन कर जांच बैठा दी। जांच में भी डाॅक्टरों की अनियमितता सामने आई। पीड़ित ने जांच आख्या रिपोर्ट के आधार पर तहरीर देकर चारों डाॅक्टरों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया।

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उधर इस मामले में सीओ कैंड सुमित शुक्ला ने मीडिया को बताया है कि तहरीर और मेडिकल बोर्ड की जांच आख्या के आधार पर चारों महिला डाॅक्टरों के खिलाफ छल व धाेखा देने के आरोप में केस दर्ज हो गया है और मामले की विवेचना शुरू कर दी गई है। जल्द ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

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रफतउद्दीन फरीद
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