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UP ASSEMBLY ELECTION RESULTS : गोरखपुर की नौ सीटों पर इस तरह भाजपा ने दर्ज की ऐतिहासिक जीत

UP ASSEMBLY ELECTION RESULTS : उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भाजपा ने प्रचंड बहुमत से जीत दर्ज की है। इसके साथ ही बीजेपी ने सीएम योगी आदित्यनाथ के गृह जनपद गोरखपुर में विधानसभा की सभी नौ सीटों पर ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। ऐसा पहली बार हुआ है जब सभी की सभी नौ सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की है। पिछली बार विधानसभा चुनाव में भाजपा को आठ व बसपा को एक सीट मिली थी।

गोरखपुर

Published: March 11, 2022 02:16:54 pm

गोरखपुर की सभी नौ सीटें बीजेपी के खाते में आई हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ ने शहर विधानसभा क्षेत्र से 103390 मतों के अंतर से चुनाव जीता है। सपा की सुभावती शुक्ला दूसरे नंबर पर रही हैं। यह सीट 1989 से भाजपा के पास है। अन्य आठ सीटों पर भी बीजेपी ही है।
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गोरखपुर शहर विधानसभा: हर राउंड की मतगणना में बढ़ा योगी की जीत का आंकड़ा
गोरखपुर में मुख्यमंत्री व शहर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी योगी आदित्यनाथ ने पहले चरण की मतगणना से बढ़त बना ली थी। जब नतीजा आया तो योगी आदित्यनाथ को बड़ी जीत मिली। चुनाव आयोग ने जो आंकड़ा जारी किया है, उसके मुताबिक शहर विधानसभा क्षेत्र में 2,45,377 मतों की गणना हुई है। इनमें से योगी को 66.41 फीसदी मत प्राप्त हुए हैं।
बृहस्पतिवार की सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हुई तो सभी राजनीतिक दलों के एजेंट आकर बैठ गए। पोस्टल बैलेट की मतगणना से ही योगी आदित्यनाथ ने बढ़त बना ली। यह सिलसिला हर राउंड की मतगणना तक चलता रहा। 32वें राउंड की मतगणना पूरी हुई तो मुख्यमंत्री 1,03,390 मतों के अंतर से चुनाव जीत गए। इससे पहले ही सपा, बसपा और कांग्रेस के मतगणना एजेंट चले गए। प्रतिद्वंद्वी सपा की सुभावती को 24.48 फीसदी ही मत मिले। बसपा के ख्वाजा शमसुद्दीन को 3.38 फीसदी वोट मिले हैं। आजाद समाज पाटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद को 3.04 फीसदी वोट मिले हैं। कांग्रेस प्रत्याशी चेतना पांडेय का मतदान फीसदी 1.12 रहा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गढ़ गोरखपुर में लगातार दूसरे विधानसभा चुनाव में भी समाजवादी पार्टी (सपा) का सूपड़ा साफ हो गया। ग्रामीण विधानसभा सीट को छोड़ दें, तो बाकी सभी आठ सीटों शहर, पिपराइच, कैंपियरगंज, चौरीचौरा, सहजनवां, खजनी, बांसगांव, चिल्लूपार के मतों की गिनती में पार्टी के प्रत्याशी पहले राउंड से ही पीछे रहे।
जैसे-जैसे गिनती आगे बढ़ी, पिछड़ने का अंतर बढ़ता गया। ग्रामीण विधानसभा सीट पर ही पार्टी थोड़ी टक्कर दे सकी। वह भी प्रत्याशी विजय बहादुर यादव की रणनीति और मेहनत की बदौलत। विजय बहादुर 15 राउंड तक की गिनती में भाजपा के विपिन सिंह से बढ़त बनाए रखे। एक बार पिछड़े तो पिछड़ते ही चले गए। उन्होंने 2017 के चुनाव में भी विपिन सिंह को अच्छी टक्कर दी थी। तब उन्हें 4,410 वोटों से शिकस्त खानी पड़ी थी।
जानकार कहते हैं कि दरअसल, साल 2017 के विधानसभा चुनाव में हार का सामना करने के बाद से ही पार्टी ने न तो कभी गहराई में जाकर हार की वजहें तलाशी और न ईमानदारी से उन्हें दूर करने की कोशिश की। सड़क से लेकर सदन तक जिस संघर्ष के लिए सपा जानी जाती थी, पूरे पांच साल में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं में वह तेवर नहीं दिखा।
सहजनवां विधानसभा क्षेत्र में जातीय समीकरण पर मोदी-योगी भारी पड़े। प्रधानमंत्री आवास, राशन से लेकर सुशासन तक के पक्ष में बयार बही। भारतीय जनता पार्टी के प्रदीप शुक्ला ने त्रिकोणीय मुकाबले में समाजवादी पार्टी के उम्मीदवार यशपाल रावत को 43 हजार से भी ज्यादा वोटों से हराया। प्रदीप शुक्ला को 1,05,320 वोट, सपा के यशपाल रावत को 62,177 वोट और बहुजन समाज पार्टी के सुुधीर सिंह को 43,798 वोट मिले। वहीं, समाजवादी पार्टी को छोड़ कर कांग्रेस पार्टी से टिकट हासिल करने वाले मनोज यादव को मात्र 3,315 वोट ही मिले।
सहजनवां विधानसभा सीट पर इस बार त्रिकोणीय लड़ाई रही। भाजपा के प्रदीप शुक्ला ने पहले चरण से जो बढ़त बनानी शुरू की, वह अंतिम चरण की गिनती तक कायम रही। दरअसल, इस विधानसभा में कुल वोटर 3,55,901 हैं। यहां ब्राह्मण, यादव व सैंथवार, क्षत्रिय वोटरों की संख्या निर्णायक भूमिका में है। यहां सैंथवार क्षत्रिय वोटरों की संख्या लगभग 40 हजार से अधिक है। यह वर्ग किसी भी दल के भाग्य को बदलने में निर्णायक भूमिका अदा करता है। इसी वजह से इस सीट पर कभी भी एक पार्टी का दबदबा नहीं रहा है।
भारतीय जनता पार्टी ने इस चुनाव में पुराने चेहरों पर भरोसा न जताते हुए, संगठन के क्षेत्रीय मंत्री प्रदीप शुक्ला को टिकट देकर मैदान में उतारा था। जबकि, प्रदीप को चुनाव लड़ने का कोई अनुभव नहीं था, लेकिन संगठन में उन्होंने विभिन्न जिम्मेदारियों का निर्वहन बखूबी किया है। यशपाल रावत यहां की यादव बिरादरी में गहरी पैठ रखते हैं। इनके पिता स्व. शारदा रावत भी यहां से विधायक रह चुके हैं, जो क्षेत्र में काफी लोकप्रिय रहे।
भाजपा ने लगातार दूसरी बार हासिल की जीत
भारतीय जनता पार्टी ने लगातार दूसरी बार जीत हासिल की है। सहजनवां विधानसभा का परिणाम हर चुनाव में बड़ा ही रोचक रहा है। यहां से कोई दल यह दावा नहीं कर सकता है कि उसका इस सीट पर लंबे समय से कब्जा रहा है। सहजनवां विधानसभा पर 2017 में भाजपा के शीतल पांडेय ने सपा के यशपाल रावत को 15,377 मतों से पराजित किया था। इस चुनाव में शीतल पांडेय 72,213 मत और यशपाल रावत को 56,836 मत मिले थे, जबकि बसपा उम्मीदवार देवनारायण उर्फ जीएम सिंह 54 हजार वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे थे। इस विधानसभा सीट पर 2012 में बसपा के राजेंद्र उर्फ बृजेश सिंह का कब्जा रहा, जबकि 2007 में बसपा के जीएम सिंह विधायक चुने गए थे।
खजनी विधानसभा: लगातार तीसरी बार खिला कमल
खजनी सुरक्षित विधानसभा क्षेत्र में तीसरी बार कमल खिला है। भाजपा के श्रीराम चौहान ने सपा की रुपावती बेलदार को 37,101 वोट से मात दी है। बेलदार को 53,109 वोट मिला है। वहीं, बसपा के विद्यासागर को 46,627 वोट मिले हैं।
पहले चक्र के साथ ही भाजपा प्रत्याशी ने बढ़त बना ली थी, जो अंतिम चरण तक बनी रही। खजनी आरक्षित सीट है। इस विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं की संख्या 3,64,304 है, जिनमें अनुसूचित जाति के वोटर अधिक हैं। योगी आदित्यनाथ के असर की वजह से बसपा का कैडर वोट भी बीजेपी के पक्ष में मतदान करता है। खजनी विधानसभा का अस्तित्व 2012 में आया, जहां से पहली बार भाजपा के संत प्रसाद विधायक चुने गए थे।
2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने संत प्रसाद पर भरोसा जताते हुए मैदान में उतारा था और उन्होंने जीत हासिल की। इस बार पार्टी ने प्रत्याशी बदला और श्रीराम चौहान को प्रत्याशी बनाया। भाजपा ने जीत की हैट्रिक लगा दी। वर्ष 1996 में श्रीराम चौहान को बस्ती लोकसभा सीट से सांसद चुना गया था।
वर्ष 1998 और 1999 में भी बस्ती से सांसद चुने गए थे। वर्ष 1999 में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में श्रीराम चौहान को खाद्य एवं उपभोक्ता मामलों का राज्य मंत्री बनाया गया था। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (आरएसएस) के कार्यकर्ता रहे श्रीराम चौहान खलीलाबाद के निवासी हैं। वह धनघटा विधानसभा से तीन बार विधायक रह चुके हैं।
चौरीचौरा विधानसभा: पहले चक्र की गणना से ही श्रवण का बढ़ता गया ग्राफ
चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र में भाजपा की सहयोगी दल निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल (निषाद पार्टी) ने पहले राउंड से ही सपा से बढ़त बना ली। जैसे-जैसे मतों की गिनती होती गई, वोटों का अंतर भी बढ़ता गया।
निषाद पार्टी के मुखिया ने चौरीचौरा विधानसभा क्षेत्र से अपने बेटे श्रवण निषाद को प्रत्याशी बनाया था। श्रवण, भाजपा के सिंबल पर चुनाव लड़े थे। यहां भाजपा से बगावत करके निर्दल चुनाव लड़े अजय सिंह टप्पू पर सबकी निगाहें थीं। अनुमान था कि टप्पू अगर ज्यादा वोट पाते हैं तो निषाद पार्टी के श्रवण निषाद को नुकसान हो सकता है।
टप्पू को 29,728 मत मिले, लेकिन इससे श्रवण निषाद को नुकसान नहीं हुआ। श्रवण 41,431 मत से चुनाव जीतने में कामयाब रहे। पहले राउंड में श्रवण को 5,366 मत मिले, जबकि सपा के बृजेश चंद्र लाल को 2,029 मत हासिल हुए। बसपा का प्रदर्शन पहले राउंड से ही खराब रहा।
पार्टी प्रत्याशी वीरेंद्र पांडेय को पहले चरण में 510 मत ही मिले। आंकड़ों के मुताबिक सिर्फ 17वें व 18वें राउंड की गणना में ही सपा प्रत्याशी बृजेश चंद्र लाल, भाजपा व निषाद पार्टी गठबंधन के उम्मीदवार श्रवण निषाद से ज्यादा मत पा सके। बाकी राउंड में श्रवण ने अपनी बढ़त बनाए रखा। मतगणना के अंतिम चरण में लड़ाई एकतरफा हो गई। सपा के समर्थकों ने भी 20 राउंड के बाद हार मान ली।
बांसगांव विधानसभा: एमडी पर भारी पड़े डेंटल सर्जन
सियासत के मैदान में दो डॉक्टरों के बीच हुई जंग में एमडी डॉक्टर, डेंटल सर्जन पर भारी पड़े। यह कहानी बांसगांव विधानसभा चुनाव की है, जहां भाजपा प्रत्याशी डेंटल सर्जन डॉ. विमलेश पासवान ने एकतरफा मुकाबले में सपा प्रत्याशी एमडी डॉ. संजय को परास्त कर, विधानसभा पहुंचना सुनिश्चित कर लिया है।
बांसगांव विधानसभा क्षेत्र में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) प्रत्याशी विमलेश पासवान डॉक्टर हैं। विमलेश, विधायक बनने से पहले पूरी तरह से चिकित्सकीय पेशे से जुड़े थे। सियासत में जब कदम रखा तो वह पहले ब्लॉक प्रमुख, फिर विधायक बनकर विधानसभा पहुंच गए। सियासत के मैदान में आने के बाद भी वह चिकित्सा सेवा करते हैं। पिछला चुनाव इसी विधानसभा क्षेत्र से भाजपा के टिकट पर जीते थे। भाजपा ने डॉ. विमलेश पर दूसरी बार भरोसा जताया था।
वहीं, डॉ. संजय एमडी डॉक्टर हैं। आम लोगों की सेवा करने के साथ उन्होंने सियासत में हाथ आजमाने के लिए सोचा। 2104 में उन्होंने कांग्रेस के टिकट पर बांसगांव लोकसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ा था, लेकिन करारी शिकस्त मिली। कांग्रेस के खिसकते जनाधार को देखते हुए उन्होंने कांग्रेस का हाथ छोड़ दिया। उन्होंने विधानसभा चुनाव से पहले सपा का दामन थाम लिया। बासगांव विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ने के लिए सपा के दर्जन भर दावेदार थे, लेकिन सपा ने डॉ. संजय पर दांव लगाया।
बृहस्पतिवार को विश्वविद्यालय में मतगणना शुरू हुई तो सपा-बसपा व भाजपा के साथ छोटे दलों के मतगणना एजेंट मुस्तैदी से जमे रहे। पहले चक्र की मतगणना में भाजपा प्रत्याशी डॉ. विमलेश पासवान ने बढ़त बना ली। यह बढ़त परिणाम घोषित होने तक बनी रही। जैसे-जैसे भाजपा प्रत्याशी की बढ़त बढ़ती गई वैसे-वैसे छोटे दलों के प्रत्याशी मतगणना स्थल से निकलने लगे। बाद में अधिकतर प्रत्याशियों के एजेंट पंडाल छोड़ गए।19वें चक्र की मतगणना के बाद भाजपा प्रत्याशी लगभग 20 हजार मतों से आगे हो गए तो सपा-बसपा प्रत्याशी को भी लगने लगा अब वापसी नहीं होगी। इसके बाद वे लोग भी निकलने लगे। इसके बाद बाहर खड़े सपा के समर्थक भी चले गए।
चिल्लूपार विधानसभा: आजादी के बाद यहां पहली बार खिला है कमल
गोरखपुर जिले की हॉट सीट चिल्लूपार से भाजपा प्रत्याशी राजेश त्रिपाठी ने अपने चिर प्रतिद्वंद्वी सपा के विनय शंकर तिवारी को पराजित करके पुरानी हार का बदला ले लिया। आजादी के बाद पहली बार यहां कमल का फूल खिला है। भाजपा ने पहले चक्र की गणना से ही सपा से बढ़त बनाई और अंतिम चक्र तक यह सिलसिला बरकरार रहा।
चिल्लूपार विधानसभा क्षेत्र से पूर्व मंत्री हरिशंकर तिवारी के बेटे विधायक विनय शंकर तिवारी के लिए विरासत को बचाए रखने की चुनौती थी। वहीं, पूर्व मंत्री राजेश त्रिपाठी यहां से अपनी साख बचाने के लिए चुनाव मैदान में थे। मतगणना के प्रारंभ में ही सबकी निगाहें चिल्लूपार विधानसभा पर टिक गईं। यहां सुरक्षा व्यवस्था भी चौकस थी। यहां भाजपा और सपा के बीच कड़ी टक्कर देखने को मिली।
कई बार ऐसे मौके आए, जब दोनों राजनीतिक दलों के समर्थकों की सांसें अटकीं रहीं। अंदर एजेंट बार-बार गुणा-गणित करते रहे। बाहर समर्थक सोशल मीडिया और टीवी चैनलों के माध्यम से रिजल्ट की जानकारी लेते रहे। हालांकि, धीरे-धीरे भाजपा ने अच्छी-खासी बढ़त बना ली। इसके बाद सपा के समर्थक शांत हो गए।
आंकड़ों के मुताबिक पहले राउंड की गणना में भाजपा को 3,006 मत, बसपा को 1,130 मत तथा सपा को 983 मत मिले। हालांकि, दूसरे चक्र की गणना में तस्वीर बदल गई। सपा को 2,083 मत, भाजपा को 1,763 मत और बसपा को 1,444 मत प्राप्त हुए। इसी तरह चौथे, छठवें, सातवें, 11वें, 28वें और 33वें राउंड की गणना में सपा उम्मीदवार को भाजपा से ज्यादा मत मिले। 23वें और 26वें राउंड में भाजपा और सपा के प्रत्याशियों को करीब बराबर मत मिले।
पिपराइच विधानसभा : पहले चरण में ही भाजपा निकली आगे, फिर बढ़ता गया जीत का अंतर
पिपराइच विधानसभा सीट पर मतगणना के शुरुआती रुझान में ही भाजपा प्रत्याशी महेंद्र पाल सिंह ने बढ़त बना ली थी। वक्त के साथ अंतर बढ़ता चला गया। तीसरे राउंड के बाद कई निर्दलीय प्रत्याशी मतगणना स्थल से जाने लगे थे। चुनाव भाजपा के महेंद्र पाल और सपा के अमरेंद्र के बीच टिक गया था। बसपा के दीपक अग्रवाल लड़ाई में कहीं नजर नहीं आ रहे थे। दसवें राउंड तक उनके समर्थक हार स्वीकार कर लौटने लगे थे। राउंड बढ़ने के साथ ही सपा समर्थकों में निराशा नजर आने लगी थी।
दसवें राउंड में भाजपा को 38 हजार 55 मत मिल चुके थे, तो सपा को 27 हजार 376 मत मिले। बसपा को महज 3 हजार 968 मत मिले थे। यह वह समय था जब भाजपा प्रत्याशी अपने निकटतम प्रत्याशी सपा के अमरेंद्र निषाद से 10 हजार 679 मत से आगे निकल चुके थे। इसके बाद सपा समर्थक यह बताते देखे गए कि अभी वह इलाका नहीं आया है, जहां पर वह मजबूत स्थिति में हैं।
कुछ राउंड आगे बढ़ते ही उनका क्षेत्र आएगा फिर अंतर को पीछे छोड़ सपा आगे निकल जाएगी। 20वें राउंड तक अंतर बढ़कर 33 हजार 236 तक पहुंच गया। इसके बाद सपा समर्थक यह कहते देखे गए कि अब जीत मुश्किल है। इसके कुछ देर बाद अमरेंद्र निषाद, कैंपियरगंज की सपा प्रत्याशी काजल निषाद के साथ बाहर निकलते देखे गए। अंतिम चरण 30वें राउंड की मतगणना के बाद 60 हजार 086 मतों से भाजपा के महेंद्र पाल सिंह ने जीत दर्ज कर ली। कैंपिरयगंज विधानसभा क्षेत्र : हर राउंड में बढ़ता गया कैंपियरगंज में जीत का ग्राफ
गोरखपुर जिले के विधानसभा क्षेत्र कैंपियरगंज में पहले चरण के परिणाम ने भाजपा कार्यकर्ताओं के चेहरे पर थोड़ी देर के लिए उदासी ला दी थी, लेकिन जैसे ही दूसरे चरण का परिणाम आया और भाजपा प्रत्याशी फतेह बहादुर सिंह ने 560 मतों की लीड ली। इसके बाद कार्यकर्ताओं के चेहरे पर खुशी दौड़ गई। इसके साथ ही हर चरण में कार्यकर्ताओं का उत्साह दोगुना होता चला गया। 10 चरण की मतगणना के बाद कार्यकर्ता जय श्रीराम और हर-हर योगी के नारे लगाने लगे।
कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र की मतगणना दीक्षा भवन में सुबह करीब साढ़े आठ बजे से शुरू हो गई थी। साढ़े नौ बजे के आसपास प्रथम चरण का नतीजा आया, तो समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी काजल निषाद ने 265 मतों से बढ़त बना ली थी। इस पर सपा कार्यकर्ता के खुशी से झूमे उठे और लाल टोपी की तरफ इशारा करने लगे। इन सबके बीच भाजपा कार्यकर्ता पूरी तरह से शांत रहे और अगले चरण में जीत की बात कहते हुए आश्वस्त दिखे। नतीजा भी उसी के अनुरूप रहा। दूसरे चरण की मतगणना जैसे ही पूरी हुई भाजपा प्रत्याशी ने 560 मतों की बढ़त बना ली। इसके बाद से हर चरण में फतेह बहादुर सिंह और काजल निषाद के बीच मतों का अंतर बढ़ता गया। तीसरे चरण में 1,616 और चौथे चरण में 2,861 मतों से बढ़त बना ली।
सातवें राउंड की मतगणना पूरी होते-होते 5,377, आठवें राउंड में 6,285 मतों की बढ़त बना ली। 11 राउंड के बाद मतों का आंकड़ा 11,558 पहुंच गया। इसी राउंड के बाद सपा कार्यकर्ताओं के चेहरे पर मायूसी छा गई। धीरे-धीरे एक-एक कार्यकर्ता वहां से निकलते दिखे। 17 राउंड की मतगणना पूरी होते ही भाजपा कार्यकर्ताओं का उत्साह चरम पर पहुंच गया और हर तरफ जय श्रीराम-जय श्रीराम, हर-हर योगी, जय बाबा बुलडोजर के नारे लगे।
इस बीच परिसर में खड़े पूर्व मुख्यमंत्री वीर बहादुर सिंह के पुत्र और पूर्व मंत्री फतेह बहादुर सिंह के समर्थक भी योगी-मोदी के नारे लगाने लगे। शाम साढ़े छह बजते-बजते 30 चरणों की मतगणना पूरी हो गई। भाजपा प्रत्याशी ने जैसे ही 30 हजार से अधिक मतों की बढ़त ली, तो सपा के अभिकर्ता मौके से निकल गए। केवल भाजपा अभिकर्ता मौजूद रहे और अंतिम राउंड की मतगणना की प्रतीक्षा करने लगे। अंतिम राउंड में 40 हजार से अधिक वोटों से जीत दर्ज करते हुए फतेह बहादुर सिंह ने जीत की हैट्रिक भी लगा ली।
कैंपिरयगंज : सपा को छोड़ सभी की जमानत जब्त
कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र से भाजपा प्रत्याशी फतेह बहादुर सिंह ने 42,656 मतों से जीत दर्ज की है। जबकि, सपा प्रत्याशी काजल निषाद को छोड़कर सभी की जमानत जब्त हो गई। सपा प्रत्याशी को 79,376 मत मिले हैं। वहीं, बसपा प्रत्याशी चंद्र प्रसाद निषाद को 13,153 मत मिले। कैंपियरगंज विधानसभा क्षेत्र में चारों प्रमुख दलों को छोड़कर कोई ऐसा प्रत्याशी नहीं रहा है जो दो हजार वोट भी पा सका। कांग्रेस कैंपियरगंज विधानसभा में मात्र 2,592 मत ही पा सकी है।

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