खुशखबरी...CNG से जल्द फर्राटा भर सकेंगी गाड़ियांं, घर-घर पाइपलाइन से पहुंचेगा गैस

खुशखबरी...CNG से जल्द फर्राटा भर सकेंगी गाड़ियांं, घर-घर पाइपलाइन से पहुंचेगा गैस

Dheerendra Vikramadittya | Publish: Sep, 02 2018 03:03:03 AM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

बनारस से गोरखपुर तक करीब 166 किलोमीटर की पाइपलाइन गेल द्वारा बिछाया जा रहा

गोरखपुरियों को जल्द ही घर-घर पाइपलाइन से रसोई बनाने के लिए गैस की सुविधा उपलब्ध होगी। बनारस से गोरखपुर तक बिछने वाली पीएनजी-सीएनीजी पाइपलाइन का काम इस दिसंबर में पूरा हो जाएगा। इसके बाद शहर में गैस वितरण के लिए पाइपलाइन का काम शुरू हो जाएगा।
माना जा रहा है कि इस वित्तीय साल के खत्म होने के पहले गोरखपुर में पाइपलाइन से गैस सप्लाई की सुविधा उपलब्ध हो सकेगी।

बनारस से संतकबीरनगर होते हुए गोरखपुर पहुंच रही पाइपलाइन

प्रधानमंत्री उर्जा गंगा परियोजना के तहत बनारस से गोरखपुर तक नेचुरल गैस पाइपलाइन बिछाई जा रही है। यह पाइपलाइन बनारस से गोरखपुर तक करीब 166.35 किलोमीटर तक बिछायी जा रही है। गोरखपुर और खलीलाबाद के करीब 87 गांवों से होकर पाइपलाइन बिछाने का काम हो रहा है। गोरखपुर में 56 किलोमीटर और खलीलाबाद में साढ़े चार किलोमीटर पाइपलाइन बिछायी जा रही है।

 

CNG PNG

गोरखपुर और संतकबीरनगर के प्रभावित किसानों को मुआवजा

देश की प्राकृतिक गैस की सबसे बड़ी कंपनी गेल इंडिया लिमिटेड द्वारा पाइपलाइन बिछाने का काम कराया जा रहा है। इसी के द्वारा पाइपलाइन से शहरों में गैस सप्लाई भी की जाएगी। जिन रास्तों से गैस पाइपलाइन बिछायी जा रही है, वहां जिन-जिन किसानों के खेत पड़ रहे हैं उनको गेल द्वारा मुआवजा उपलब्ध कराया जा रहा है। जितने वक्त काम चल रहा है, उतने सीजन के फसलों का मुआवजा भी कंपनी दे रही है। काम खत्म होने के बाद खेतों को पुनः पुराने जैसा करके कंपनी किसानों को हस्तांतरित कर देगी।

गोरखपुर-संतकबीरनगर में 87 गांव

गोरखपुर में गैस पाइपलाइन करीब 80 गांवों से होकर गुजर रही है। इसमें खजनी के 60 गांव, सहजनवां के आठ गांव और सदर तहसील के 12 गांव शामिल हैं।


किसानों को मुआवजा देने का काम चल रहा

गेल द्वारा पाइपलाइन बिछाए जाने वाले रास्तों में पड़ने वाले खेतों के किसानों को मुआवजा देने का काम चल रहा है। पाइपलाइन बिछाते समय पहले सीजन में फसल की लागत का शत प्रतिशत मुआवजा दे दिया जा रहा। जबकि उसके बाद वाले सीजन में फसल की लागत और उपज का अस्सी प्रतिशत मुआवजा बांटा जा रहा है। दूसरे फसल सीजन में अस्सी फीसदी लागत और उपज का मुआवजा देने के पीछे अधिकारियों की तर्क यह है कि पहले सीजन में किसानों के खेतों में खड़ी फसल का नुकसान हो रहा जबकि उसके बाद कोई फसल किसान लगा नहीं रहा इसलिए अस्सी प्रतिशत दिया जा रहा है। मुआवजा की रकम किसानों को उसकी जमीन समतल और पुराने रूप में करने तक दिया जाना है।

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