देश के नामी दिग्गजों को संसद में भेजने वाला देवरिया, अपने रहनुमाओं की बेरूखी से विकास की जंग हार रहा

देश के नामी दिग्गजों को संसद में भेजने वाला देवरिया, अपने रहनुमाओं की बेरूखी से विकास की जंग हार रहा

Dheerendra Vikramadittya | Publish: May, 15 2019 12:31:11 PM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India


खेती-किसानी से जुड़े कई बड़े केंद्र बदहाल, गन्ना-गंडक, पलायन प्रमुख समस्या

धीरेंद्र विक्रमादित्य गोपाल
गन्ना, गुंडा और गंडक का दंश झेल चुके देवरहा बाबा की धरती देवरिया लोकसभा क्षेत्र में आज भी यह समस्याएं बरकरार है। आजादी के बाद से ही देश की वीवीआईपी सीटों में शुमार रहे देवरिया संसदीय सीट से कई नामी दिग्गज संसद में पहुंच चुके हैं लेकिन हालात में कोई खास परिवर्तन नहीं हुए। आज भी रोजी-रोजगार का संकट, बाढ़ का दंश सहित स्वास्थ्य-शिक्षा जैसी मूलभूत सुविधाओं का अकाल इस क्षेत्र में है। गन्ना किसानी का हाल बदहाल है।

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आजाद भारत के पहले ही देवरिया जिला अस्तित्व में आ गया

यूपी के सबसे घनी आबादी वाले जिलों में शुमार देवरिया को जिला बने सात दशक से अधिक समय हो गया। 16 मार्च 1946 को देवरिया जिला बना था। जबकि इसी जिले से अलग होकर कुशीनगर जिला का निर्माण 13 मई 1994 में किया गया था।

यूपी की सबसे अधिक चीनी मिलों वाले जिले में अब गन्ना किसान तबाह

देवरिया संयुक्त जिला यूपी की सबसे अधिक चीनी मिलों वाला जनपद हुआ करता था। गन्ना इस क्षेत्र की लाइफलाइन कभी हुआ करता था। चैदह चीनी मिलों वाले इस संयुक्त जनपद में आज की तारीख में अधिकतर चीनी मिल बंद हो चुके हैं। आंकड़ों के अनुसार देवरिया में गौरीबाजार, बैतालपुर, देवरिया, भटनी, प्रतापपुर, रामकोला, खड्डा, सेवरही, कप्तानगंज, छितौनी, लक्ष्मीगंज, पडरौना, कठकुईयां, रामकोला खेतान हुआ करती थी। कुशीनगर जिला बनने के बाद देवरिया के खाते में केवल गौरीबाजार, बैतालपुर, देवरिया, भटनी और प्रतापपुर चीनी मिलें रह गई। हालांकि, आज की तारीख में केवल प्रतापपुर चीनी मिल चल रही है, वह भी बार बार बंद होती रहती है। आलम यह कि इस लोकसभा क्षेत्र में किसान गन्ना किसानी से मुंह मोड़ रहे हैं।

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तमाम शोध संस्थान खुद बदहाल

देवरिया लोकसभा क्षेत्र में वैसे तो किसानों की मदद को दशकों पहले कई बड़े शोध संस्थान खोले गए लेकिन अब वह बर्बाद हो चुके हैं। बाबू गेंदा सिंह गन्ना शोध संस्थान बभनौली, साग-सब्जी अनुसंधान केंद्र सरगटिया, लक्ष्मीपुर गन्ना प्रजनन केंद्र, आलू फार्म जंगल बरवा जैसे देश-विश्व स्तर के अनुसंधान केंद्र इस लोकसभा क्षेत्र में दशकों पूर्व अस्तित्व में आए। लेकिन जनप्रतिनिधियों की उदासीनता से आज की तारीख में यह सभी केंद्र बेहाल हैं। हालांकि, शुरूआती दिनों में यहां ख्ूाब शोध हुए लेकिन अब अपने अस्तित्व की लड़ाई लड़ने में बेदम साबित हो रहे।

देवरिया लोकसभा क्षेत्र का एक लोकसभा कटान से परेशान

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देवरिया लोकसभा क्षेत्र के तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में बाढ़ एक प्रमुख समस्या है। यहां हर साल आने वाले बाढ़ से लाखों जिंदगियां बर्बाद हो रही है। गांव के गांव हर साल नदी की धारा में विलीन हो रहे लेकिन कोई पुरसाहाल नहीं। हर साल बाढ़ आने पर अधिकारी से लेकर मंत्री-सांसद तक दौरे पर आते हैं लेकिन समय से बाढ़ बचाव के उपाय की फाइलें उनकी टेबुल पर ही धूल फांकती रह जाती है।

जहरीली शराब और तस्करी भी यहां जोरों पर

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देवरिया लोकसभा क्षेत्र का सेवरही क्षेत्र कई बार जहरीली शराब की वजह से सुर्खियों में रह चुका है। दो बार जहरीली शराब की वजह से बड़ा कांड हो चुका है जिसमें कई जानें जा चुकी है। खाकी के संरक्षण में यहां जमकर शराब की तस्करी होती है। कुछ माह पहले ही आधा दर्जन से अधिक जानें यहां जहरीली शराब की वजह से चली गई। स्ािानीय विधायक अजय कुमार लल्लू शराब तस्करी और नशा के बढ़ते कारोबार के बाबत कई बार विधानसभा तक में आवाज उठा चुके हैं।

रोजगार के लिए आज भी पलायन

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दो जिलों में फेले इस लोकसभा क्षेत्र में उद्योग धंधों का सर्वाधिक अभाव है। यहां के युवाओं को आज भी रोजी-रोजगार के लिए पलायन करना मजबूरी है। हजारों की संख्या में इस क्षेत्र के युवा व प्रौढ़ बड़े औद्योगिक शहरों में मेहनत मजबूरी के लिए जाने को मजबूर हैं।

पांच विधानसभाओं वाला देवरिया लोकसभा क्षेत्र

देवरिया लोकसभा क्षेत्र कुशीनगर व देवरिया जिले में फैला हुआ है। इस क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र आते हैं। देवरिया जिले की देवरिया सदर, पथरदेवा व रामपुर कारखाना जबकि कुशीनगर जिले में तमकुहीराज व फाजिलनगर विधानसभाा क्षेत्र। पांच में चार विधायक यहां भाजपा के हैं। तमकुहीराज विधानसभा क्षेत्र में कांग्रेस के विधायक अजय कुमार लल्लू दुबारा जीते हैं तो फाजिलनगर से भाजपा के गंगा सिंह कुशवाहा दूसरी बार विधायक चुने गए हैं। पथरदेवा से भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष व सूबे की सरकार में मंत्री सूर्य प्रताप शाही विधायक हैं। रामपुर कारखाना से कमलेश शुक्ला तो देवरिया से जन्मेजय सिंह विधायक हैं।

देवरिया ने सभी दलों को दिया मौका

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आजादी के बाद हुए पहले आमचुनाव में देवरिया संसदीय क्षेत्र के नाम पर तीन सीटें थी। देवरिया दक्षिणी, देवरिया पूरब, देवरिया पश्चिमी। देवरिया दक्षिणी से कांग्रेस के सरजू, देवरिया पूरब से सोशलिस्ट रामजी वर्मा तो देवरिया पश्मिची से कांग्रेस के विश्वनाथ राय चुने गए। 1957 के चुनाव में प्रजा सोशलिस्ट पार्टी के रामजी वर्मा देवरिया के सांसद बने।
लेकिन 1962 में कांग्रेस के विश्वनाथ ने इस सीट पर प्रख्यात सोशलिस्ट अशोक रंजीतराम मेहता को हरा दिया। 1967 व 1971 के चुनाव में कांग्रेस के विश्वनाथ राय फिर चुनाव जीते। लेकिन 1977 में इस सीट पर फिर समाजवादियों का कब्जा हो गया। इस बार भारतीय लोकदल के उग्रसेन ने कई बार के सांसद विश्वनाथ राय को भारी अंतर से हरा दिया। 1980 में रामायण राय ने कांग्रेस आई से चुनाव लड़कर यहां जीत हासिल की तो 1984 में पूर्व केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री राजमंगल पांडेय यहां से सांसद बने। 1989 में राजमंगल पांडेय जनता दल के उम्मीदवार के रूप में देवरिया के सांसद बने। 1991 में हुए चुनाव में जनता दल के उम्मीदवार के रूप में समाजवादी नेता मोहन सिंह सांसद चुने गए। लेकिन 1996 में पहली बार यहां भाजपा ने परचम लहराया। भाजपा के प्रत्याशी पूर्व उपथलसेनाध्यक्ष ले.जन.श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी यहां से चुने गए। 1998 में सपा प्रत्याशी के रूप में समाजवादी नेता मोहन सिंह ने ले.जन.श्रीप्रकाश मणि त्रिपाठी को हराया तो 1999 में भाजपा के पूर्व सांसद श्रीप्रकाश मणि फिर यहां से जीत का परचम लहराने में कामयाब रहे। एक साल बाद ही हुए चुनाव में समाजवादी नेता मोहन सिंह को हार का सामना करना पड़ा। 2004 में मोहन सिंह फिर सपा के टिकट पर सांसद बने और भाजपा के श्रीप्रकाश मणि चुनाव हार गए। परंतु 2009 में चुनाव की बयार बदल चुकी थी। बसपा प्रत्याशी गोरख प्रसाद जायसवाल से देश के जाने माने समाजवादी मोहन सिंह व भाजपा प्रत्याशी ले.जन.श्रीप्रकाश मणि दोनों को हार का सामना करना पड़ा। 2014 में भाजपा ने अपने दिग्गज नेता कलराज मिश्र को चुनाव मैदान में उतारा और वह भारी अंतर से चुनाव जीते।

कलराज की जगह दूसरे भाजपाई दिग्गज मैदान में

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देवरिया लोकसभा क्षेत्र से इस बार कलराज मिश्र चुनाव मैदान में नहीं है। भाजपा के ढेर सारे नेता इस सीट पर अपनी दावेदारी कर रहे थे। आलम यह कि सभी एक दूसरे के विरोध में सड़क तक आ चुके थे। भाजपा ने सभी गुटों के काट के रूप में जोड़तोड़ में माहिर माने जाने वाले पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रमापति राम त्रिपाठी को यहां भेजा है। संगठन में काफी अच्छी पकड़ रखने वाले रमापति त्रिपाठी के समक्ष यहां महागठबंधन से विनोद जायसवाल हैं। विनोद जायसवाल यहां के बसपा के पूर्व सांसद गोरख प्रसाद जायसवाल के खास रिश्तेदार हैं। बड़े व्यवसायी विनोद जायसवाल काफी दिनों से क्षेत्र में लगे हुए हैं। उधर, कांग्रेस ने बसपा से आए नियाज अहमद को अपना प्रत्याशी बनाया है। नियाज पिछले चुनाव में बसपा के टिकट पर चुनाव लड़कर दूसरे नंबर पर रहे थे। भाजपा प्रत्याशी को इन दोनों दिग्गज प्रत्याशियों के साथ साथ संगठन को भी साधना बड़ी चुनौती है।

 

 

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