कई बार नष्ट हुआ लेकिन हर बार भव्यता की ओर बढ़ता गया नाथ संप्रदाय का यह मंदिर


धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में नाथ संप्रदाय का प्रमुख स्थान

By: धीरेन्द्र विक्रमादित्य

Published: 05 Sep 2019, 10:00 AM IST

Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

धर्म, दर्शन, अध्यात्म और साधना के विभिन्न संप्रदायों और मत-मतांतरों में नाथ संप्रदाय (Nath Panth) का प्रमुख स्थान है। संपूर्ण देश में फैले नाथ संप्रदाय के विभिन्न मंदिरों तथा मठों की देख रेख यहीं से होती है। नाथ संप्रदाय(Nath Sampraday) की मान्यता के अनुसार सच्चिदानंद शिव के साक्षात स्वरूप श्री गोरक्षनाथ जी (Guru Gorakhnath)सतयुग में पेशावर (पंजाब) में, त्रेतायुग में यूपी के गोरखपुर, द्वापर युग में द्वारिका के पास हरमुज तो कलियुग में सौराष्ट्र के गोरखमधी में आविर्भूत हुए थे।
नाथ परंपरा गुरु मच्छेंद्र नाथ द्वारा स्थापित की गई थी। (Nath Panth was founded by Guru Machhendra nath) यह गोरखनाथ मंदिर(Gorakhnath Temple) उसी स्थान पर स्थित है जहां वह तपस्या करते थे। मंदिर का नाम गुरु गोरखनाथ के नाम पर रखा गया जिन्होंने अपनी तपस्या का ज्ञान मत्स्येंद्रनाथ से लिया था। (Gorakhnath temple is named after Guru Gorakhnath)

कई बार नष्ट हुआ लेकिन हर बार भव्यता की ओर बढ़ता गया नाथ संप्रदाय का यह मंदिर
Dheerendra Gopal IMAGE CREDIT:

शिष्य गोरखनाथ के साथ मिलकर गुरु मच्छेंद्र नाथ ने योग परंपरा को व्यापक किया। योग को जनजन तक पहुंचाने का काम किया। दरअसल, योग ने ही इस बिखरे संप्रदाय को जोड़ने का भी काम किया। मान्यता है कि बाबा गोरखनाथ ने इस संप्रदाय के बिखराव और इस सम्प्रदाय की योग विद्याओं का एकत्रीकरण किया। गुरु और शिष्य को तिब्बती बौद्ध धर्म में महासिद्धों के रूप में जाना जाता है। (Guru Machhendra Nath and Gorakhnath spread the teaching of Yoga)

कई बार नष्ट हुआ लेकिन हर बार भव्यता की ओर बढ़ता गया नाथ संप्रदाय का यह मंदिर
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नाथ संप्रदाय की इस प्रमुख पीठ को मुगल काल में कई बार नष्ट करने की कोशिश की गई। खिलजी ने 14वीं सदी में गोरखनाथ मंदिर को नष्ट कर दिया। 18 वीं सदी में भारत के इस्लामी शासक औरंगजेब ने नष्ट किया था। यही वजह है कि 52 एकड़ के क्षेत्र में फैले इस मंदिर का रुप व आकार परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहा। वर्तमान में गोरखनाथ मंदिर पूर्वांचल में आस्था का प्रमुख केंद्र्र है। मंदिर का दिव्य स्वरूप भारतीय वास्तुकला का भी एक अनोखा नमूना है।
मंदिर परिसर में स्थित भीम सरोवर महाभारत काल से इस मंदिर के जुड़ाव की कहानी बयां करता है। इस मंदिर का नेपाल राज की स्थापना में भी प्रमुख योगदान रहा है।

कई बार नष्ट हुआ लेकिन हर बार भव्यता की ओर बढ़ता गया नाथ संप्रदाय का यह मंदिर
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हर साल यहां लगने वाले खिचड़ी मेले में लाखों के श्रद्धालु बाबा के खप्पर में खिचड़ी चढ़ाने आते हैं लेकिन पीठाधीश्वर के बाद सबसे पहली खिचड़ी नेपाल राज की चढ़ती है। करीब सवा महीना तक यहां खिचड़ी मेला लगता है और दूर दराज से दुकानदार यहां मेले में दुकान लगाने भी आते हैं।
समाज में बदले सांप्रदायिक ताने बाने के दौर में यह मंदिर सर्व धर्म में लोकप्रिय है। यहां हिंदू समाज के अलावा मुस्लिम समाज व अन्य संप्रदाय के लोग खासी संख्या में बाबा गोरखनाथ का दर्शन करने आते हैं। यहां आने वाले श्रद्धालुओं को आवागमन में कोई परेशानी नहीं होती। मंदिर से करीब तीन किलोमीटर दूर ही गोरखपुर रेलवे स्अेशन, बस अड्डा है और पूरे दिन 24 घंटे यहां पहुंचने के साधन मिलते रहते हैं।
वर्तमान में मंदिर के पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ हैं जो यूपी के मुख्यमंत्री भी हैं। (Gorakhnath Temple Peethadheeshwar Mahant Yogi Adityanath is also Chief Minister of Uttar Pradesh)

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