अब यूपी के इस जिले के विकास के सपने में आईआईएम इंदौर भरेगा रंग

अब यूपी के इस जिले के विकास के सपने में आईआईएम इंदौर भरेगा रंग
अब यूपी के इस जिले के विकास के सपने को आईआईएम इंदौर भरेगा रंग

Dheerendra Vikramadittya | Updated: 06 Oct 2019, 10:30:30 AM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

  • आईआईएम इंदौर के निदेशक ने गृह जिला देवरिया में की पहल
  • आईआईएम इंदौर के चार विशेषज्ञों की टीम तैयार कर रही कार्ययोजना

यूपी के देवरिया(Deoria) जिले के गांवों को स्वावलंबी बनाने के लिए भारतीय प्रबंध संस्थान इंदौर (IIM Indore)ने पहल की है। आईआईएम(IIM) के प्रोफेशनल्स जिला प्रशासन से मिलकर गांवों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर करने के साथ स्वरोजगार का एक बड़ा प्लेटफार्म भी तैयार करेंगे। आईआईएम टीम देवरिया जिले के गांवों को एक जनपद-एक उत्पाद (One district one product)बेचने के लिए बाजार भी उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी।
देवरिया जिला गन्ना बहुल क्षेत्र होने के साथ साथ हस्तशिल्प में भी काफी अग्रणी है। लेकिन यहां के उत्पाद को उचित दाम प्रबंधन और उचित प्लेटफार्म की वजह से नहीं मिल पाता। इस जिले के रहने वाले प्रोफेसर हिमांशु राय आईआईएम इंदौर के निदेशक हैं। देश की जानी मानी संस्था के निदेशक ने अपनी टीम के प्रबंधन कौशल से गृह जनपद को संवारने की पहल की है। आईआईएम के प्रबंधकों की टीम अब यहां विलेज डेवलपमेंट प्लान तैयार कर रही है। जिला प्रशासन की मदद से यह टीम गांवों को आत्मनिर्भर बनाने के साथ साथ रोजगार पलायन को रोकने की कार्ययोजना बनाएगी। सबसे सुखद यह कि यह पायलट प्रोजेक्ट उस समय प्रारंभ हुआ है जब पूरी दुनिया महात्मा गांधी की 150वीं जयंती मना रही।

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अब यूपी के इस जिले के विकास के सपने को आईआईएम इंदौर भरेगा रंग

आईआईएम इंदौर के निदेशक प्रो.हिमांशु राय (IIM Indore Director Prof. Himanshu Rai)बताते हैं कि एक जनपद-एक उत्पाद में जिले के हस्तशिल्प कारोबार और स्थानीय संसाधनों जैसे गन्ने से तैयार उत्पादों को नये कलेवर और तरीकों से पेश किया जायेगा इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन होगा।
जिले के उत्पादों को मार्केटिंग और विक्रय मे सहायता के लिए आनलाईन प्लेटफार्म का सहारा भी लिया जायेगा जिससे देवरिया जिले का सामान पूरी दुनिया में बिक सकेगा।
प्रो.राय का मानना है कि आज दुनिया मे बढ़ते तनाव को देखकर गांधी के अहिंसा, दुनिया में जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभाव को देखकर गांधी के ग्राम स्वराज और सादगी की प्रासंगिकता बढ़ जाती है। गांधी जहां गांवों को आत्मनिर्भर बनाने पर जोर देते थे और इसके लिए वे स्थानीय संसाधनों के आधार पर ग्रामीण या कुटीर उद्योगों की बात करते थे।
वह कहते हैं कि भारत के संस्कृति और अर्थव्यवस्था का केन्द्र गांव थे इसलिए आर्थिक मंदी का असर भारत मे कम देखने को मिला क्योंकि गाव स्वावलंबी थे, उनके उपर बाहरी मंदी का असर कम या नहीं होता था। इसलिए गांधी ने ब्रिटिश पार्लियामेंट मे भाषण के दौरान भारत को ब्यूटीफुल ट्री कहा जिसकी जड़ें बहुत ही गहरी है।

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