ऐतिहासिक स्थलों वाले महराजगंज संसदीय सीट जातियों में उलझने से विकास यहां रस्ता भूल गया

ऐतिहासिक स्थलों वाले महराजगंज संसदीय सीट जातियों में उलझने से विकास यहां रस्ता भूल गया

Dheerendra Vikramadittya | Publish: May, 15 2019 06:35:19 PM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India


-बुद्ध का यहां है ननिहाल
-पांच बार भाजपा ने यहां दर्ज की है जीत

धीरेंद्र विक्रमादित्य गोपाल
संविधान सभा के सदस्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रो.शिब्बन लाल सक्सेना की कर्मभूमि महराजगंज लोकसभा सीट जातियों की लड़ाई में इस कदर उलझ चुकी है कि विकास यहां का रस्ता भूल चुका है। नेपाल देश से सटा यह जनपद बिहार राज्य के पश्चिमी चंपारण सहित यूपी के गोरखपुर, सिद्धार्थनगर व कुशीनगर जनपदों की सीमा से सटे है। पर्यटन की दृष्टि से कई ऐतिहासिक स्थलों को समेटे इस जनपद में आज भी लोग बेकारी, शिक्षा-स्वास्थ्य जैसे की मूलभूत जरूरतों के लिए जूझते हैं। कभी तीन चीनी मिलों वाले इस जनपद में एक-एककर दो चीनी मिलें बंद हो गई। एक चीनी मिल पर पूरे जनपद के गन्ना किसानों का भार है। जहां देश के विभिन्न हिस्सों में मेट्रो ट्रेन चलाने की कवायद हो रही है, उसी देश का हिस्सा महराजगंज जनपद का मुख्यालय आज एक अदद रेललाइन के लिए तरस रहा है।

पांच विधानसभा वाले लोकसभा में चार विधायक भाजपा के

महराजगंज लोकसभा क्षेत्र में पांच विधानसभा क्षेत्र हैं। महराजगंज सदर, पनियरा, नौतनवा, सिसवा व फरेंदा विधानसभा। केवल नौतनवा विधानसभा क्षेत्र को छोड़कर चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के प्रत्याशी चुनाव जीते हैं। नौतवना विधानसभा क्षेत्र से निर्दलीय प्रत्याशी अमनमणि त्रिपाठी चुनाव जीते हैं। अमन मणि बाहुबली पूर्व मंत्री अमरमणि त्रिपाठी के पुत्र हैं।

यह ऐतिहासिकता समेटे हुए है महराजगंज

महराजगंज में महात्मा बुद्ध का ननिहाल है। वरिष्ठ पत्रकार विनोद कुमार श्रीवास्तव बताते हैं कि महराजगंज जिला में भगवान बुद्ध से जुड़ी ढेर सारी स्मृतियां हैं जिससे लोग अनजान हैं। यहां का रामग्राम, देवदह आदि क्षेत्र बुद्ध से जुड़ा है जिसे इतिहासकारों ने समय समय पर पुष्ट भी किया। वह बताते हैं देवदह गांव जहां भगवान बुद्ध का ननिहाल माना गया है वह नौतनवा तहसील में है। उन्होंने बताया कि वर्षाें पहले महराजगंज में आईपीएस अधिकारी विजय कुमार पोस्टेड थे। विजय कुमार ने बुद्ध से जुड़े स्थलों पर काफी काम कराया लेकिन उनके जाने के बाद सब ठप पड़ गया।
जानकार बताते हैं कि यह क्षेत्र करपथ के नाम से भी जाना जाता रहा है जो कोशल राजवंश का अंग हुआ करता था। सम्राट इक्ष्वाकु का यहां राज था जिनकी राजधानी अयोध्या थी।

1989 में गोरखपुर से अलग होकर बना जिला

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कर्मक्षेत्र गोरखपुर से अलग होकर महराजगंज जिला अस्तित्व में आया था। 2 अक्तूबर 1989 में महराजगंज जिला बना। हालांकि, आजादी के बाद से ही महराजगंज लोकसभा क्षेत्र रहा है।

तीन चीनी मिलों में एक ही चालू हालत में

महराजगंज क्षेत्र में एक जमाना था जब तीन चीनी मिलें घुघली चीनी मिल, सिसवा चीनी मिल व गडौरा चीनी मिल हुआ करता था। लेकिन पूर्वांचल की त्रासदी का शिकार महराजगंज भी हुआ और यहां की दो चीनी मिलें बंद हो गई घुघली चीनी मिल के बंद होने से महराजगंज के गन्ना किसानों को सबसे अधिक पेरशानी उठानी पड़ी। इस साल बकाया में हांफ कर चल रही गडौरा चीनी मिल भी बंद हो चुकी है लेकिन किसी भी जनप्रतिनिधि ने इस ओर ध्यान देना मुनासिब नहीं समझा।

बड़े पर्यटन क्षेत्र के रूप में किया जा सकता है क्षेत्र का विकास
गोरखपुर-बस्ती मंडल के कई जिले विश्व शांति के प्रतीक महात्मा बुद्ध की ढेर सारी स्मृतियों से जुड़े है। नेपाल से लेकर कुशीनगर, सिद्धार्थनगर और महराजगंज में महात्मा बुद्ध की स्मृतियां हैं। इतिहासकार उनके बारे में तमाम खोज किए हैं लेकिन देश-विदेशी पर्यटकों को लुभाने में महराजगंज नाकाम साबित हुआ है। तमाम सैलानी नेपाल इसी रास्ते जाते हैं। बिहार सीमा में स्थित बाल्मिकी टाईगर प्रोजेक्ट भी इसी से नजदीक है। इसी जिले में सोहगीबरवा पंछी विहार भी है। लेकिन एक वृहद कार्ययोजना के अभाव में यहां विकास का पहिया अभी भी काफी धीमा है।

अभी तक यह जिला रेल लाइन से नहीं जुड़ सका

ऐतिहासिकता को समेटे महराजगंज लोकसभा क्षेत्र आज भी रेलवे लाइन के इंतजार में है। गोरखपुर से अलग होकर अस्तित्व में आए इस जनपद मुख्यालय को रेलवे लाइन से जोड़ने की मांग काफी सालों से होती रही है लेकिन हर चुनाव में एक आस बंधती है और चुनाव बीतते ही वह टूटने लगती है।

कब कौन रहा जनप्रतिनिधि

महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से पहले सांसद प्रो.शिब्बन लाल सक्सेना हुए। दुबारा भी लोगों ने प्रो.सक्सेना पर भरोसा जताया और वह चुनाव जीत गए। लेकिन 1962 में लोगों ने कांग्रेस के महादेव प्रसाद को अपना सांसद बनाया। 1967 में भी महादेव प्रसाद कांग्रेस के टिकट पर संसद पहुंचे। लेकिन 1971 में निर्दलीय ही चुनाव मैदान में आए प्रो.शिब्बन लाल सक्सेना को जनता ने चुनाव जीताकर तीसरी बार संसद में भेजा। 1977 में प्रो.सक्सेना भारतीय लोकदल के टिकट पर भारी अंतर से चुनाव जीते। 1980 में कांग्रेस के असफाक हुसैन यहां से सांसद चुने गए तो 1984 में कांग्रेस के जितेंद्र सिंह सांसद बने। 1989 में जनता लहर में जनता दल के हर्षवर्धन सांसद चुने गए। 1991 में भाजपा ने यहां खाता खोला और पंकज चैधरी यहां से सांसद चुने गए। 1996 में भी पंकज चैधरी ही भाजपा के टिकट पर सांसद बने। 1998 में भाजपा के पंकज चैधरी ने जीत की हैट्रिक बनाई। लेकिन साल भर बाद हुए लोकसभा चुनाव में पंकज चैधरी को हार का सामना करना पड़ा। यहां से सपा उम्मीदवार कुंवर अखिलेश सिंह सांसद चुने गए। लेकिन 2004 में भाजपा के पंकज चैधरी चैथी बार सांसद चुने गए। परंतु 2009 में कांग्रेस के सिंबल पर चुनाव लड़े वयोवृद्ध नेता पूर्व सांसद हर्षवर्धन पर जनता ने भरोसा जताया और वह दुबारा सांसद चुने गए। 2014 में मोदी लहर में सांसद पंकज चैधरी पांचवी बार लोकसभा में पहुंचे।

महागठबंधन ने अखिलेश तो कांग्रेस ने सुप्रिया को उतारा, जीत की डबल हैट्रिक को पंकज मैदान में

महराजगंज लोकसभा क्षेत्र से भाजपा ने सांसद पंकज चैधरी को मैदान में उतारा है। पंकज डबल हैट्रिक बनाने के लिए चुनाव मैदान में हैं। कांग्रेस ने यहां से दो बार सांसद रहे स्वर्गीय हर्षवर्धन की पुत्री सुप्रिया श्रीनेत को चुनाव लड़ाया है। जबकि महागठबंधन ने पूर्व सांसद अखिलेश सिंह को फिर उतारा है। महराजगंज लोकसभा क्षेत्र में कुर्मी, क्षत्रिय, ब्राह्मण, यादव, मुसलमान, दलित और निषाद जातियों की बहुलता है। पंकज चैधरी कुर्मी हैं तो सुप्रिया श्रीनेत क्षत्रिय।

 

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