योगी आदित्यनाथ शहर में कर रहे थे कार्यक्रम आैर यह दल सरकार के खिलाफ नारेबाजी करते हुए यहां करने लगा धरना-प्रदर्शन

Protest against Police action

निर्बल इंडियन शोषित हमारा आम दल निषाद पार्टी की जनाक्रोश यात्रा गुरुवार को गोरखपुर पहुंची। अनुसूचित जाति के आरक्षण और गाजीपुर की घटना में निषाद समाज के लोगों के उत्पीड़न के खिलाफ संगठन के लोगों ने गोरखपुर कमिश्नर कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन किया।

प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ.संजय निषाद ने कहा कि योगी सरकार में निषाद समाज के निर्दाेष लोगों का उत्पीड़न हो रहा है। महिलाओं-बच्चों को मारा पीटा जा रहा है। जबकि पूरा समाज गाजीपुर में कांस्टेबल की मौत पर दुःखी है और निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा। उन्होंने कहा कि बिना विवेचना के ही किसी को दोषी बना देना कहां का न्याय है। उन्होंने आरोप लगाया कि यह सरकार न्याय में भी बंटवारा कर रही है। बड़े लोगों के मामले में विवेचना की बात करती और जब समाज के वंचितों की बात होती है तो बिना किसी विवेचना के ही उन पर अत्याचार किया जा रहा।
डाॅ.संजय निषाद ने कहा कि योगी और मोदी दोनों ने निषादों का वोट पाने के लिए छल किया। 2014 व 2017 में मछुआ समाज ने बीजेपी को वोट दिया क्योंकि इन दोनों ने निषाद समाज को अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी कराने का वादा किया था। लेकिन अब जब सत्ता में आ गए तो भूल गए। आरोप लगाते हुए कहा कि योगी जी जब सांसद थे तो सदन में आवाज उठाई थी जो यूट्यूब पर मौजूद है। उस समय कहा था कि निषाद समाज की सभी उप जातियां संविधान की सूची में मझवार, तुरैहा, कोली, गौड़ आदि सूचीबद्ध है, इन्हें वाजिब हक मिलना चाहिए। संवैधानिक रूप से अनुसूचित जाति की सुविधा के हकदार हैं। डाॅ.संजय ने याद दिलाया कि योगी जी ने 7 जून 2015 रेल रोको आंदोलन के समय धरना प्रदर्शन में कहा था कि अनुसूचित जाति का प्रमाण पत्र जारी किया जाए।

मछुआ एससी आरक्षण हुंकार जनाक्रोश यात्रा 20 दिसंबर को प्रयागराज से निकली थी। वह गुरुवार को गोरखपुर पहुंची। गोरखपुर में प्रवेश कर कमिश्नर कार्यालय तक पहुंची। यहां लोगों ने धरना प्रदर्शन करने के बाद मछुआ समाज को एससी आरक्षण दिए जाने व गाजीपुर घटना में बेवजह ही निषाद समाज के लोगों को फंसाने के खिलाफ जांच की मांग को लेकर ज्ञापन भी सौंपा।

धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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