इस मस्जिद में 400 सालों से नहीं पढ़ी गई नमाज, एक तवायफ है वजह

Jyoti Mini

Publish: Dec, 07 2017 06:03:38 (IST) | Updated: Dec, 07 2017 06:16:02 (IST)

Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

धीरेंद्र विक्रमादित्य गोपाल

गोरखपुर. मंदिर-मस्जिद के नाम पर तमाम जगहों पर इंसान-इंसान से लड़ रहा, लेकिन कई धर्मस्थल ऐसे भी हैं जो रखरखाव के अभाव में खंडहर में तब्दील होते जा रहे। गोरखपुर में सैकड़ों वर्ष पहले बनी एक मस्जिद खंडहर बन चुकी हैं। इस बुलंद इमारत में नमाज इसलिए अदा नहीं की जाती क्योंकि इसे एक तवायफ ने बनवाया था। हालांकि, जानकार यह कहते हैं कि, बिना समाज की रजामंदी के मस्जिद बनी नहीं होगी, बाद के दिनों में शायद लोगों ने बहिष्कार किया हो।


शहर के नसीराबाद में एक आंख के अस्पताल के पीछे खंडहर में तब्दील हो चुकी इमारत के बारे में मोहल्ले के लोगों से पूछने पर आसानी से पता चल जाएगा कि कोई कई सौ साल पुरानी कोई मस्जिद है। पर आखिरी बार नमाज कब पढ़ी गई यह शायद आसपास के इलाके में रहने वाला सबसे बुजुर्ग भी याद कर थक जाए लेकिन याद नहीं आएगा।


जानकार बताते हैं कि, नसीराबाद में वीरान पड़ी इस मस्जिद को किसी तवायफ ने बनवाई थी। उसने मस्जिद बनवाने के लिए अपनी जमीन दी या खरीदी की इसका कोई रिकॉर्ड नहीं हैं। यह दस्तावेज जरूर हैं कि 1914 में जमीन मस्जिद के नाम हैं। जो इस बात की गवाही देते हैं कि यह मस्जिद कई सौ साल पुरानी हो सकती है।


पुरातत्व के जानकार बताते हैं कि, इस मस्जिद की डिजाईन काफी हद तक उर्दू बाजार के जामा मस्जिद व बसंतपुर सराय से हूबहू है। ऐसे में इसके काफी पुराना होने के सबूत हैं। फिलहाल, मस्जिद में नमाज तो अदा नहीं की जाती लेकिन इसकी जमीन पर कई दुकानें बना ली गई हैं। इन दुकानों की देखरेख रिटायर्ड सरकारी अधिकारी मोबिनुल हक करते हैं।

 

अब उठ रही इसके अधिग्रहण की मांग

मुहल्लें के बुजुर्ग कहते हैं कि, इस मस्जिद को एक तवायफ ने तामीर करवाया था, इस वजह से इसमें कभी नमाज नहीं पढ़ी गई। लोग यह कहते हैं कि, मुल्क की बहुत सी तारीखी मस्जिदें भारतीय पुरातत्व विभाग के कब्जे में है। उनमें नमाज की इजाजत नहीं है। लेकिन, गैरशरई कामों को करने की छूट मिली हुई है। यह मस्जिद तो लोगों ने खंडहर बनाया है। अगर शरीयत इस मस्जिद में नमाज अदा करने की इजाजत नहीं देती हो इस जगह को लाइब्रेरी या इस्लामिक इंफार्मेशन सेंटर बना देना चाहिए। हालांकि, कई लोग इस मस्जिद में नमाज पढ़वाने के हिमायती भी हैं। मदरसा दारूल उलूम हुसैनिया दीवान बाजार के मुफ्ती अख्तर हुसैन ने का मानना है कि, मस्जिद में नमाज जायज है। ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है कि तवायफ ने ही मस्जिद बनवायी। हो सकता है उसने ये तामीर आवाम के चंदे से की हो। अगर वह मस्जिद है नमाज होनी चाहिए।

 

Rajasthan Patrika Live TV

1
Ad Block is Banned