scriptPM Modi inaugurates Gorakhpur AIIMS and Fertilizer Plant | PM मोदी ने CM योगी के शहर को दी एम्स व फर्टिलाइजर प्लांट की सौगात | Patrika News

PM मोदी ने CM योगी के शहर को दी एम्स व फर्टिलाइजर प्लांट की सौगात

-2014 में PM मोदी ने गोरखपुर के बंद फर्टिलाइजर प्लांट को दोबारा चालू करने का किया था वादा
-2016 में पीएम मोदी ने एम्स के लिए रखी थी आधारशिला

गोरखपुर

Published: December 07, 2021 01:34:40 pm

गोरखपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को गोरखपुर के फर्टिलाइजर प्लांट और एम्स जनता को समर्पित किया। बता दें कि गोरखपुर का ये फर्टिलाइजर प्लांट 32 साल से बंद चल रहा था। इस बंद पड़े इस फर्टिलाइजर प्लांट को दोबारा चालू करने में 8,600 करोड़ की लागत आई है। वहीं प्रधानमंत्री मोदी ने 22 जुलाई 2016 को गोरखपुर में जिस एम्स की आधारशिला रखी थी उसे भी मंगलवार को पीएम जनता को समर्पित किया।
गोरखपुर में पीएम मोदी
गोरखपुर में पीएम मोदी
इस मौके पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अतिथियों का स्वागत किया। बताया कि प्रधानमंत्री आज 9600 करोड़ की सौगात दे रहे हैं।

इस मौके पर राज्यपाल आनंदी बेन पटेल केशव प्रसाद मौर्या, दिनेश शर्मा, स्वतंत्र देव सिंह, अनुप्रिया पटेल, पंकज चौधरी, स्वामी प्रसाद मौर्य, दारा सिंह चौहान, सांसद संजय निषात, रवि किशन, जगदंबिका पाल, विजय दुबे,जय प्रकाश निषाद आदि मौजूद रहे।
गोरखपुर में पीएम मोदीयूपी ही नहीं वरन नेपाल तक के मरीजों के लिए होगा वरदान

पूर्वांचल का इस एम्स के निर्माण पर एक हजारकरोड़ रुपए से ज्यादा की लागत आई है। ये एम्स न केवल पूर्वी उत्तर प्रदेश बल्कि बल्कि पड़ोसी प्रांत बिहार और यहां तक कि नेपाल तक के मरीजों के लिए वरदान साबित होगा। वैसे नए एम्स की स्थापना की सोच पूर्व प्रधानमत्री अटल बिहारी वाजपेयी की है जिन्होंने 2003 के स्वतंत्रता दिवस के भाषण में इसका उल्लेख लालकिला के प्राचीर से किया था। पूर्व पीएम स्व. वाजपेयी ने तब एम्स, नई दिल्ली में उपलब्ध आधुनिक सुविधाओं के साथ छह नए अस्पतालों की स्थापना के लिए प्रधान मंत्री स्वास्थ्य सुरक्षा योजना (पीएमएसएसवाई) की घोषणा की थी। उसके तहत भोपाल, भुवनेश्वर, जोधपुर, पटना, रायपुर और ऋषिकेश में एम्स की स्थापना की गई।
गोरखपुर का एम्सयूपीए सरकार की पहल को सपा सरकार ने आगे बढ़ाया पर भाजपा ने मूर्त रूप दिया

इसके बाद यूपीए सरकार के कार्यकाल में कई और नए एम्स की स्थापना का मार्ग प्रशस्त हुआ। गोरखपुर में एम्स के लिए समाजवादी पार्टी की सरकार ने जमीन से लेकर अन्य सारी शर्तों को पूरा किया। लेकिन वो जब तक इसे मूर्त रूप देते सरकार ही चली गई। ऐसे में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार ने एम्स निर्माण की राह को और तेज करते हुए इसको अमली जामा पहनाया।
सात साल में 15 एम्स के निर्माण जारी है

वैसे पिछले सात सालों में देश के विभिन्न हिस्सों में 15 एम्स की स्थापना को निर्माण कार्य शुरू हुआ। इसके तहत यूपी के गोरखपुर, महाराष्ट्र के नागपुर, पश्चिम बंगाल के कल्याणी, आंध्र प्रदेश के मंगलगिरी, तेलंगाना के बीबी नगर, पंजाब के बठिंडा, झारखंड के देवघर, असम के गुवाहाटी, हिमांचल प्रदेश के बिलासपुर, जम्मू के विजयपुर, कश्मीर के अवंतीपोरा, गुजरात के राजकोट, तमिलनाडु के मदुरै, बिहार के दरभंगा और हरियाणा के मनेठी में एम्स का निर्माण कार्य जारी है।
2014 में किया वादा 2021 में हुआ पूरा

जहां तक बात गोरखपुर के फर्टिलाइजर प्लांट की है तो फर्टिलाइजर कॉरपोरेशन लिमिटेड (एफसीआईएल) की गोरखपुर इकाई की स्थापना 1969 में नेफ्था के साथ फीडस्टॉक के रूप में यूरिया उत्पादन के लिए की गई थी। लेकिन 10 जून 1990 में तत्कालीन केंद्र सरकार ने इसे बंद करने का फैसला ले लिया। उसके बाद करीब दो दशक से फर्टिलाइजर प्लांट को चालू कराने के लिए क्षेत्रीय लोगों ने आंदोलन चला रखा था। फिर 2014 के आम चुनावों में नरेंद्र मोदी ने गोरखपुर की मानबेला की रैली में सरकार बनने पर इस बंद पड़े फर्टिलाइजर प्लांट को फिर से चालू कराने की घोषणा की थी और प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्होंने 2016 में फर्टिलाइजर की जमीन पर नई अत्याधुनिक फैक्ट्री की आधारशिला रखी।
PM मोदी ने CM योगी के शहर को दी एम्स व फर्टिलाइजर प्लांट की सौगातगोरखपुर फर्टिलाइजर प्लांट चालू होने से यूपी के साथ पड़ोसी राज्यों को भी मिलेगा लाभ

इस प्लांट के शुरू होने के बाद पूर्वी उत्तर प्रदेश के साथ ही पड़ोसी राज्यों के किसानों को भी यूरिया की आपूर्ति की जा सकेगी। इससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष दोनों तरह के ही रोजगार पैदा होंगे। यही नहीं, कुशल और अकुशल मजदूरों को भी काम मिलेगा। यह संयंत्र लघु और मध्यम उद्योगों के विकास को सुविधाजनक बनाने में भी मददगार होगा। इसके चालू होने के बाद घरेलू खाद बाजार में दाम स्थिर होने की संभावना बलवती होगी। वैसे बता दें कि वर्तमान में यूरिया की सालाना मांग 350 लाख टन है, जबकि उत्पादन महज 250 लाख टन ही है। वर्तमान में करीब 100 लाख टन यूरिया आयात करना पड़ता है। इसके लिए बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा में खर्च करनी पड़ती है। इस प्लांट के शुरू होने से हमें यूरिया के आयात की जरूरत नहीं होगी।
वैसे वर्तमान सरकार ने यूपी के गोरखपुर, बिहार के बरौनी, झारखंड के सिंदरी, तेलंगाना में रामागुंडम और ओडिशा में तालचेर नामक पांच फर्टिलाइजर प्लांट्स को दोबारा चालू किया है। इन सभी प्लांट्स से देश के कुल यूरिया उत्पादन में प्रति वर्ष 60 लाख टन से अधिक की वृद्धि की संभावना है।

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