Union Budget 2020 निराशाजनक बजट, मंदी से उबरने के लिए अपेक्षित प्रयास नहीं


बजट पर क्या है आर्थिक विशेषज्ञों की राय व विश्लेषण

प्रो.अजेय कुमार गुप्ता
बजट एक तकनीकी चीज है जिससे सरकारें अपनी विकास संबंधी योजनाएं बनाती है। लेकिन धीरे धीरे आम जनता बजट के प्रति इतनी उत्साहित होती चली गई और अपनी अपेक्षा इससे जोड़ती चली गई जिससे बाद में सरकार उसका दुरुपयोग करती चली गई। यानी बजट के माध्यम से बड़े बड़े वादे करती गई। पिछली बजट में ही साबित हुआ कि आय का इतना अनुमान लगा लिया अपना ज्यादा खर्चा दिखाने के लिए जो बाद में पूरा ही नहीं हुआ और उसमें कटौती करनी पड़ी। यह अच्छा नहीं माना जाता है कि हम अपने खर्च को बढ़ा चढ़ाकर दिखाने के लिए आय को बढ़ा चढ़ाकर दिखाएं। आय को बढ़ाकर इसलिए दिखाना पड़ता है ताकि घाटा कम दिखाई दे। लेकिन जो चीजें वास्तविकता के धरातल पर नहीं होंगी वह पूरी कैसे होंगी। पिछली सरकार को आय कम होने के कारण बहुत से बजट के खर्चाें में कटौती करनी पड़ी थी। यह अभूतपूर्व था, ऐसा बहुत रेयर होता है। इस बार भी बजट में उंची, लंबी-चैड़ी बातें बहुत की गई लेकिन उसके लिए व्यवस्था क्या दिया गया है उससे सरकार बचने की कोशिश की है। परिणाम यह हुआ है कि जनता की बहुत सारी अपेक्षाएं और विशेषज्ञों की भी बहुत सारी अपेक्षाएं जो मंदी से उबरने के लिए अनुमानित थी उस पर सरकार ने ध्यान ही नहीं दिया। माना जा रहा था कि सरकार ऐसा कुछ प्रयास करेगी जिससे जनता की ओर से खर्चा किया जाए, मांग बढ़। चारों ओर से यही उभर कर सामने आ रहा है कि जनता के द्वारा मांग बढ़ जाए तो इस मंदी से उबरा जा सकता है। लेकिन ऐसे कोई प्रयास सरकार की ओर से इस बजट में नहीं दिख रहा है। टैक्स के दर में कमी का जो दिख रहा है वह भी बहुत अर्थपूर्ण नहीं है। जो 80 सी के तहत छूट दिया जाता था, उसे भी सरकार खत्म करने पर आमादा है यह पहली बार पता चला। छोटे छोटे सैलरी पाने वालों के लिए डेढ़ लाख की राहत का एक बहुत बड़ा संबल हुआ करता था।
इसके अलावा यह कहा जाता था कि वर्तमान में सरकार ने बड़ी कंपनियों को टैक्स रिबेट दिया लेकिन जबतक स्माल स्केल इंडस्ट्रिज को बढ़ावा नहीं देगी तबतक देश में मांग की भरमार हो ही नहीं पाएगी यानी मंदी से हम उभर ही नहीं पाएंगे। सरकार ने यह दिखाने के लिए कि स्माल स्केल इंडस्ट्री को दिखाने के लिए कुछ करेंगे लेकिन वास्तव में वह कुछ कर नहीं पाई। आॅडिट में छूट देना कोई बड़ा रिलीफ नहीं है। सरकार ने एक करोड़ से बढ़ाकर पांच करोड़ तक के टर्नओवर की आॅडिट में छूट देकर कुछ खास नहीं किया है। इन्वेस्टमेंट के पहले कंसल्टेंसी की सुविधा या उसके हिसाब से उनको लोन देने की सुविधा, वास्तविकता की धरातल पर कितना स्थापित हो पाएगा इसमें शंका है। बजट में सोलर उर्जा, किसानी आदि पर बातें तमाम लंबी लंबी की गई लेकिन उसमें वास्तव में देखा जाए तो आम जनता खासकर किसानों, स्माल स्केल इंडस्ट्रियलिस्ट, सामान्य उपभोक्ता या जनता के लिए ऐसी कोई भी राहत कहीं भी नहीं दिखती जिसकी बड़ी बड़ी अपेक्षाएं लोगों ने लगाई थी। खासकर इस वजह से कि मंदी के इस दौर में जनता के डिमांड को बूस्ट करने के लिए अनेक कदम यह सरकार उठाएगी लेकिन ऐसा कुछ भी नहीं हुआ। कुल मिलाकर यह निराशाजनक बजट है।
(प्रो.अजेय कुमार गुप्ता दीनदयाल उपाध्याय गोरखपुर विवि गोरखपुर में वरिष्ठ प्रोफेसर हैं। अर्थ व वित्त प्रबंधन में विशेषता है।)

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