कैराना ले जा रहे थे इस प्रतिबंधित सामान को लेकर, एसटीएफ ने एंबुलेंस की जांच की तो मच गया हड़कंप

कैराना ले जा रहे थे इस प्रतिबंधित सामान को लेकर, एसटीएफ ने एंबुलेंस की जांच की तो मच गया हड़कंप

Dheerendra Vikramadittya | Publish: May, 18 2018 12:41:47 AM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India


नेपाल से गोरखपुर-सुल्तानपुर के रास्ते जा रहा था कैराना

गोरखपुर। ड्रग स्मगलर तस्करी के नित नए तरीके अपना रहे हैं। मरीजों को लाने ले जाने के लिए इस्तेमाल एंबुलेंस का प्रयोग तस्करी के लिए किया जा रहा है। एसटीएफ और नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने एंबुलेंस से तस्करी करने वाले इंटरनेशनल गिरोह का पर्दाफाश किया है। गिरोह द्वारा इस्तेमाल एंबुलेंस में करीब ढाई करोड़ रुपये की चरस बरामद की गई है। एंबुलेंस में करीब साढ़े चैबीस किलो चरस मिला है। तस्करी के माल के साथ दो लोग भी गिरफ्तार किए गए हैं। नेपाल से यह चरस कैराना ले जाया जा रहा था।
एसटीएफ ने यह बरामदगी गोरखपुर के खोराबार क्षेत्र में की है। एसटीएफ के मुताबिक नेपाल से यह चरस एंबुलेंस में रखकर ले जाया जा रहा था। चरस को कैराना ले जाया जा रहा था। कैराना के माजिद और डाॅ.अरशद को यह डिलेवरी देनी थी। गिरफ्त में आए सुल्तानपुर के ओदरा के मुहम्मद सोहराब और कोतवाली के कादिर अहमद से जरूरी सूचना एसटीएफ ने एकत्र कर लिया है। दोनों को जेल भेजने के साथ कैराना में शिकंजा कसा जा रहा है।
बता दें कि एसटीएफ के एसएसपी अभिषेक सिंह को इस तस्करी की सूचना मिली थी। चरस लाने की सूचना पर एसटीएफ अलर्ट हो गया था। टीम को अपर पुलिस अधीक्षक एस. आनंद और इंस्पेक्टर सत्यप्रकाश लीड कर रहे थे। टीम ने घेराबंदी कर खोराबार क्षेत्र में एंबुलेंस को रोककर तलाशी ली तो काफी मात्रा में चरस मिला। चरस को एंबुलेंस की स्ट्रेचर सीट के नीचे छिपाकर रखा गया था। इस मामले में नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो ने केस दर्ज कर लिया है।

इस तरह पहुंचाते थे चरस की खेप तय जगह पर

चरस तस्कर बहुत ही शातिराना ढंग से चरस को ले जाते थे। एंबुलेंस से सोहराब और कादिर चरस की खेप पहुंचवाते थे। एंबुलेंस साइरन बजाते हुए निकलता था। अगर कहीं चेेकिंग होता था तो पुलिस को दूर से देखते ही कादिर ले जाता था। आक्सीजन सिलेंडर की कैप उसके मुंह में लगा दिया जाता था। ग्लूकोज की बोतल भी टंगी रहती थी। मरीज को एंबुलेंस में देख पुलिस जांच-पड़ताल नहीं करती थी। इस वजह से ये लोग बड़े आराम से हूटर बजाते निकल जाते थे। इनको टोल पर टैक्स भी नहीं देना पड़ता था।

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