योगी के गढ़ में क्यों मुखर हुए ये युवा, किया प्रदर्शन, उत्पीड़न बंद करने की मांग


अंबेडकराइट्स स्टूडेंट यूनियन फाॅर राइट्स

समाज अंतिम व्यक्ति को मुख्यधारा से जोड़ने के लिए काम करने वाले पांच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी का चहुंओर विरोध हो रहा। गुरुवार को गोरखपुर में भी अंबेडरवादी छात्र संगठन ‘असुर’ के सदस्यों ने जोरदार विरोध-प्रदर्शन किया। सदस्यों का कहना था कि संविधान और लोकतंत्र की वकालत करते हुए देश के शोषितों वंचितों किसानों-मजदूरों के हक अधिकारों के लिए संघर्ष करने वाले लेखक, सामाजिक कार्यकर्ता, अधिवक्ता व मानव अधिकार कार्यकर्ताओं का उत्पीड़न बंद नहीं किया गया तो वे लोग उग्र आंदोलन को बाध्य होंगे।
गुरुवार को अंबेडकराइट स्टूडेंट यूनियन फाॅर राइट्स ‘असुर’ के बैनर तले काफी संख्या में युवा सड़कों पर उतर आए। गोरखपुर विवि केपास प्रदर्शन कर रहे छात्रों का कहना था कि 28 अगस्त को देश भर में छापेमारी कर शोषितों वंचितों के हक अधिकारों की लड़ाई लड़ने वाले लेखक, अधिवक्ता, मानवाधिकार कार्यकर्ता को भीमा कोरेगांव हिंसा के जिम्मेदार ठहराकर उनकी गिरफ्तारी गलत तरीके से की गई है।
इस प्रदर्शन की अगुवाई कर रहे गोविवि के छात्रनेता भास्कर चैधरी ने आरोप लगाया कि यह गिरफ्तारियां देश की अर्थव्यवस्था को बर्बाद करने वाले नोटबंदी घोटाले, ईवीएम घोटाले, राफेल घोटाले, समस्याओ का कोढ़ बन चुकी बेरोजगारी के विमर्श से जनता का ध्यान हटाने के लिए केंद्र में बैठी मोदी सरकार के इशारे पर की गई है, हम इसे किसी हाल में बर्दाश्त नहीं करेंगे ।
असुर के विश्वविद्यालय प्रभारी अमित कुमार सिंघानिया ने कहा कि ईवीएम, धार्मिक दंगे और पूंजीपतियों के दम पर मोदी सरकार सत्ता में आई और साम-दाम-दंड-भेद का प्रयोग कर देश के लोकतंत्र को समाप्त करने पर तुली है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध की परंपरा लोकतंत्र को मजबूत करता है और ऐसे में सामाजिक कार्यकर्ताओं के द्वारा देश में बेरोजगारी, किसानों की आत्महत्या, छात्रों के शोषण, शिक्षा के बाजारीकरण, लाखों-करोड़ों के एनपीए, मॉब लिंचिंग आदि समस्याओं पर सवाल खड़ा करना लाजमी है। और इन सवालों का जवाब देने के बजाय केंद्र सरकार सवाल पूछने वालों के दमन पर उतारू है। इनका कहना था कि मुजफ्फरनगर दंगा फैलाने वालों को महिमामंडन किया जा रहा है और निर्दोष चंद्रशेखर आजाद रावण को बेवजह रासुका बढ़ा करके जेल में रखा गया है। उन्होंने कहा कि लोकतांत्रिक मूल्यों- अधिकारों को लगातार कुचला जा रहा है और हम इसे कतई बर्दाश्त नहीं करेंगे, 28 अगस्त को गिरफ्तार किए गए गौतम नौलखा, सुधा भारद्वाज, वरवर राव, अरुण फरेरा, वरनान गोंजालविल्स पर लगे मुकदमे वापस नहीं लिए गए तो इस अघोषित आपातकाल के खिलाफ सब्र का बांध टूटेगा जिसका खामियाजा केंद्र में बैठी बीजेपी सरकार को भुगतना पड़ेगा।
प्रदर्शन कर रहे युवाओं ने सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा, जस्टिस अजय खानविलकर और धनंजय धनंजय चंद्रचूड़ की बेंच द्वारा सामाजिक कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी पर रोक लगाने के लिए धन्यवाद भी दिया गया।
प्रदर्शन में पूर्वांचल सेना के अध्यक्ष धीरेन्द्र प्रताप, सनी निषाद, विद्या निषाद, वाल्मीकि, सिंधुरावण, मंजेश कुमार, सोनू सिद्धार्थ, विद्या निषाद, नितेश कुमार, प्रशांत कुमार, शिवम निषाद, सचिन साहनी, शनिदेव कनौजिया, राहुल चंद्रा, विशाल राजा, मो. इस्लाम, विक्की रावत, शिवम मौर्या, तेज कुमार, महेंद्र, सर्वेश कुमार,राजन रावत, अविनाश कुमार गौतम, संदीप कुमार, अजय कुमार आदि मौजूद रहे।

धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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