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गोरखपुर

सर संघ संचालक मोहन भागवत का बुधवार को आगमन, चार दिन का है प्रवास

बुधवार को RSS के सर संघचालक मोहन भागवत गोरखपुर आ रहे हैं। इनका आगमन उस परिस्थिति में और महत्वपूर्ण हो जाता है जब लोकसभा चुनाव बीते हुए कुछ दिन हुए हैं।

गोरखपुरJun 12, 2024 / 09:46 am

anoop shukla

RSS चीफ मोहन भागवत आज 4 दिनों के दौरे पर गोरखपुर आएंगे। वे यहां संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के कार्यक्रम में शामिल होंगे। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से यहां सरस्वती शिशु मंदिर स्कूल में दो कार्यकर्ता विकास वर्ग चल रहा है।
3 जून से शुरू पहला शिविर जहां 18 जून को खत्म होगा तो दूसरे शिविर का समापन 21 जून को होगा। RSS चीफ मोहन भागवत यहां 4 दिनों तक प्रशिक्षार्थियों से मिलेंगे। जिज्ञासा समाधान सत्र में प्रशिक्षणार्थी स्वयंसेवकों के सवालों और जिज्ञासाओं पर जवाब भी देंगे।21 जून तक चले रही दो प्रशिक्षण शिविर
RSS से मिली जानकारी के मुताबिक, समापन सत्र में बतौर मुख्य वक्ता RSS के सह सरकार्यवाह आलोक कुमार होंगे। 21 जून की सुबह दीक्षा समारोह के बाद सभी स्वयंसेवक घर लौटेंगे। स्वयंसेवकों के कार्य में गुणात्मक विकास करने के लिए प्रतिवर्ष लगने वाले इन प्रशिक्षण वर्ग में उन स्वयंसेवक ने भाग लिया, जिन पर दो वर्ष से संघ का कोई दायित्व है।
संघ शिक्षा वर्ग के प्रशिक्षण में उत्तर प्रदेश गोरखपुर प्रांत के लगभग 350 स्वयंसेवक भाग ले रहे हैं। वहीं, कार्यकर्ता विकास वर्ग-एक में गोरखपुर प्रांत से 150 के लगभग स्वयंसेवक शामिल होंगे।

सीएम योगी भी RSS चीफ से कर सकते हैं मुलाकात
वहीं, इस बीच शुक्रवार या शनिवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के भी गोरखपुर आने की संभावना है। ऐसे में माना जा रहा है कि अपने गोरखपुर दौरे के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ RSS चीफ मोहन भागवत से मुलाकात कर सकते हैं। हालांकि, अभी तक RSS की ओर से इसकी कोई पुष्टि नहीं की गई है।
RSS चीफ भागवत बोले- काम करें, अहंकार न पालें
इससे पहले सोमवार 10 जून को नागपुर में संघ के कार्यकर्ता विकास वर्ग के समापन में शामिल हुए थे। यहां भागवत ने चुनाव, राजनीति और राजनीतिक दलों के रवैये पर बात की।
भागवत ने कहा- जो मर्यादा का पालन करते हुए कार्य करता है, गर्व करता है, किन्तु लिप्त नहीं होता, अहंकार नहीं करता, वही सही अर्थों मे सेवक कहलाने का अधिकारी है।

उन्होंने कहा कि जब चुनाव होता है तो मुकाबला जरूरी होता है। इस दौरान दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी एक सीमा होती है। यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए।
भागवत ने मणिपुर की स्थिति पर कहा- मणिपुर एक साल से शांति की राह देख रहा है। बीते 10 साल से राज्य में शांति थी, लेकिन अचानक से वहां गन कल्चर बढ़ गया। जरूरी है कि इस समस्या को प्राथमिकता से सुलझाया जाए।
संघ चुनाव नतीजों के एनालिसिस में नहीं उलझता
लोकसभा चुनाव खत्म होते ही पहली बार भागवत ने कहा- लोकसभा चुनाव खत्म होने के बाद बाहर का माहौल अलग है। नई सरकार भी बन गई है। ऐसा क्यों हुआ, संघ को इससे मतलब नहीं है। संघ हर चुनाव में जनमत को परिष्कृत करने का काम करता है, इस बार भी किया, लेकिन नतीजों के विश्लेषण में नहीं उलझता।
लोगों ने जनादेश दिया है, सब कुछ उसी के अनुसार होगा। क्यों? कैसे? संघ इसमें नहीं पड़ता। दुनियाभर में समाज में बदलाव आया है, जिससे व्यवस्थागत बदलाव हुए हैं। यही लोकतंत्र का सार है।
उन्होंने नागपुर में कहा-जब चुनाव होता है, तो मुकाबला जरूरी होता है, इस दौरान दूसरों को पीछे धकेलना भी होता है, लेकिन इसकी भी एक सीमा होती है – यह मुकाबला झूठ पर आधारित नहीं होना चाहिए। लोग क्यों चुने जाते हैं – संसद में जाने के लिए, विभिन्न मुद्दों पर आम सहमति बनाने के लिए। हमारी परंपरा आम सहमति बनाने की है।
RSS चीफ ने कहा- संसद में दो पक्ष क्यों होते हैं? ताकि, किसी भी मुद्दे के दोनों पक्षों को संबोधित किया जा सके। किसी भी सिक्के के दो पहलू होते हैं, वैसे ही हर मुद्दे के दो पहलू होते हैं। संसद में दो पक्ष जरूरी हैं। देश चलाने के लिए सहमति जरूरी है। संसद में सहमति से निर्णय लेने के लिए बहुमत का प्रयास किया जाता है, लेकिन हर स्थिति में दोनों पक्ष को मर्यादा का ध्यान रखना होता है। संसद में किसी प्रश्न के दोनों पहलू सामने आएं, इसलिए ऐसी व्यवस्था है। विपक्ष को विरोधी पक्ष की जगह प्रतिपक्ष कहना चाहिए।

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