scriptsat december ko do ghante shahar me rahenge pradhanmantri ,gorakhpur | खाद कारखाने के लोकार्पण के बाद दो घंटेे शहर में रहेंगे प्रधानमंत्री, कई योजनाओं पर करेंगे चर्चा | Patrika News

खाद कारखाने के लोकार्पण के बाद दो घंटेे शहर में रहेंगे प्रधानमंत्री, कई योजनाओं पर करेंगे चर्चा

गोरखपुर खाद कारखाना जल्द की खाद उत्पादन का कार्य शुरु कर देगा। इंतजार है तो बस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिनके हाथों फर्टिलाइजर का उद्धाटन सात दिसंबर को होना है। सात दिसंबर को प्रधानमंत्री विश्व के सभी खाद कारखानों में सबसे ऊंचे प्रिलिंग टॉवर वाले गोरखपुर खाद कारखाने का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री एम्स और बीआरडी में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर का भी लोकार्पण भी करेंग।

गोरखपुर

Updated: December 02, 2021 09:00:07 pm

प्रधानमंत्री के जनपद आगमन की तैयारियां जोरों पर हैं। आठ हजार करोड़ की लागत से बना गोरखपुर खाद कारखाना जल्द की खाद उत्पादन का कार्य शुरु कर देगा। अब इंतजार है तो बस प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का जिनके हाथों फर्टिलाइजर का उद्धाटन सात दिसंबर को होना है। सात दिसंबर को प्रधानमंत्री विश्व के सभी खाद कारखानों में सबसे ऊंचे प्रिलिंग टॉवर वाले गोरखपुर खाद कारखाने का हवाई सर्वेक्षण भी करेंगे। इसके साथ ही प्रधानमंत्री एम्स और बीआरडी में रीजनल मेडिकल रिसर्च सेंटर का भी लोकार्पण भी करेंग। प्रधानमंत्री पूरेे दो घंटे शहर में रहेंगे।
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एचयूआरएल के प्रबंध निदेशक एके गुप्ता ने बताया कि प्रधानमंत्री के आगमन की तैयारियों में एचयूआरएल प्रबंधन जुट गया है। कारखाना उत्पादन के लिए तैयार है और पीएम के आगमन के पहले गुरुवार को प्लांट चलाकर एक बार इसका ट्रायल भी किया गया। खाद कारखाना के निर्माण में आठ हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश हुआ है। उन्होंने बताया कि एचयूआरएल देश में तीन बड़े खाद कारखानों का निर्माण करा रहा है। तकरीबन 25 हजार करोड़ रुपये से तैयार हो रहे इन तीनों कारखानों में से गोरखपुर खाद कारखाना सबसे पहले शुरू होने जा रहा है।

प्रबंध निदेशक ने बताया कि प्लांट में बना प्रिलिंग टॉवर विश्व भर के खाद कारखानों की तुलना में सबसे ज्यादा ऊंचा है। इसकी ऊंचाई 149.5 मीटर और व्यास 28 से 29 मीटर है। पाइप लाइन से आने वाली प्राकृतिक गैस और नाइट्रोजन के रिएक्शन से अमोनिया का लिक्विड तैयार किया जाएगा। अमोनिया के इस लिक्विड को प्रिलिंग टॉवर की 117 मीटर ऊंचाई से गिराया जाएगा।
इसके लिए ऑटोमेटिक सिस्टम तैयार किया गया है। अमोनिया लिक्विड और हवा में मौजूद नाइट्रोजन के रिएक्शन से यूरिया छोटे-छोटे दानों के रूम में प्रिलिंग टॉवर के बेसमेंट से बाहर आएगा। इसके बाद यूरिया के दानों पर नीम का लेप चढ़ाने के बाद उसे पैक किया जाएगा।

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