जब यशपाल ने हंसाते-गुदगुदाते हुए गोरखपुर में समझाया था विज्ञान के गूढ़ रहस्य

जब यशपाल ने हंसाते-गुदगुदाते हुए गोरखपुर में समझाया था विज्ञान के गूढ़ रहस्य
Scientist Yashpal

2013 में गोरखपुर आये थे प्रो.यशपाल, डीवीएन पीजी कॉलेज में एक कार्यक्रम में किया था शिरकत

गोरखपुर. आधुनिक युग के वैज्ञानिकों में अगर बच्चों के प्रिय वैज्ञानिकों की बात करें तो पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम के अलावा एक नाम और आएगा, वह है प्रो.यशपाल का। प्रो.यशपाल एक ऐसा नाम रहा है जो उनसे मिला उनका मुरीद हो गया। बच्चों को खेल-खेल में हंसाते-खेलाते हुए उनके सवालों का जवाब ढूंढने को प्रेरित करने वाले प्रो.यशपाल आज इस दुनिया से विदा हो गए लेकिन उनके काम हमेशा याद किये जाएंगे। गोरखपुर भी खुशनसीब है जो इन दोनों महान वैज्ञानिकों का इस्तकबाल कर चुका है।



बात करीब 4 साल पहले की है। मार्च 2013 की पहली तारीख थी। शहर के डीवीएन पीजी कॉलेज में एक कार्यक्रम में शिरकत करने प्रो.यशपाल आये थे। शहर के करीब आधा दर्जन से अधिक स्कूलों के बच्चे अपनी जिज्ञासा शांत करने पहुंचे थे। जब संवाद शुरू हुआ तो देखने व सुनने वाले अचरज में पड़ गए कि देश का एक महान वैज्ञानिक इतनी सरलता से बच्चों की जिज्ञासा तो शान्त कर ही रहा उनके अंदर सवाल पूछने और खुद ही जवाब खोजने की प्रवृति को विकसित करने की प्रेरणा भी दे रहा।


उस आयोजन को याद करने वाले बताते हैं कि हमारे आसपास की चीजों और घटनाओं को किस तरह विज्ञान के नजरिये से देखने और समझने के लिए प्रो.यशपाल बच्चों को सीखा रहे थे। उनके सवालों का जवाब दे रहे थे तो साथ ही साथ कई प्रश्न दाग उसका जवाब भी बच्चों को देने ले लिए मंच पर बुला रहे थे। इंद्रधनुष कैसे बनता है, साँप अपना शिकार कैसे करता है, आसमान नीला क्यों है, समुद्र का रंग क्या है जैसे सवालों को बेहद रोचक ढंग से समझाया तो उनसे कई सवाल भी किये।

प्रो. यशपाल ने समझाया कि मुश्किल सवालों के जवाबों को कैसे ढूंढ़ी जाए। बताया कि मुश्किल सवाल की तलाश भी मुश्किल हो यह जरूरी नहीं। उन्होंने कहा कि खूब सोचो, अधिक से अधिक सवाल करो, संभव हो तो टीम बनाकर खूब डिस्कस करो, जवाब खोजो। कोई भी सवाल मुश्किल नहीं होता।


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इस सत्र के एक दिन पहले प्रो.यशपाल अपनी पत्नी निर्मल पाल के संग कुशीनगर भी गए थे। बुद्धस्थली के दर्शन के बाद वह वहां एक कार्यक्रम में भी भाग लिए थे। चार साल बीत गए। अब प्रो.यशपाल इस दुनिया में नहीं रहे लेकिन उनकी यादें आज भी गोरखपुर की फ़िज़ाओं में मिल जाएंगी।

विज्ञान को आसान भाषा में समझाते थे
मशहूर वैज्ञानिक एवं शिक्षाविद् प्रो.यशपाल को 2013 में देश के दूसरे सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण के सम्मानित किया गया था। यशपाल 90 साल के थे। यशपाल को कॉस्मिक किरणों पर अपने गहरे अध्ययन के लिए भी जाना जाता है। प्रोफेसर यशपाल का जन्म 26 नवंबर 1926 को हरियाणा में हुआ था। 1976 में पद्म भूषण से नवाजे गए प्रोफेसर यशपाल ने करियर की शुरुआत टाटा इंस्टिट्यूट ऑफ फंडामेंटल रिसर्च से की थी। 1973 में सरकार ने उन्हें स्पेस ऐप्लीकेशन सेंटर का पहला डायरेक्टर नियुक्त किया गया। 1983-84 में वह प्लानिंग कमिशन के चीफ कंसल्टेंट भी रहे। 1986 से 1991 के बीच यशपाल को यूजीसी का चेयरमैन नियुक्त किया गया। प्रोफेसर यशपाल साल 2007 से 2012 तक दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (छ्वहृ) के वाइस चांसलर भी रहे। साल 2009 में विज्ञान को बढ़ावा देने और उसे लोकप्रिय बनाने में अहम भूमिका निभाने की वजह से उन्हें हृश्वस्ष्टह्र ने कलिंग सम्मान से नवाजा था।
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