धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्माः योगी आदित्यनाथ

धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्माः योगी आदित्यनाथ
धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्माः योगी आदित्यनाथ,धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्माः योगी आदित्यनाथ

Dheerendra Vikramadittya | Updated: 12 Sep 2019, 03:28:28 AM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

  • अखंड ज्योति की शोभायात्रा के साथ गोरखनाथ मंदिर में श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारंभ
  • ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महाराज की 50वीं एवं ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज की पाचवीं पुण्यतिथि समारोह

श्री गोरखनाथ मन्दिर, गोरखपुर में युगपुरुष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महाराज की 50वीं एवं राष्ट्र सन्त ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज की पाचवीं पुण्यतिथि समारोह के अन्तर्गत ‘श्रीमद्भागवत महापुराण कथा ज्ञान-यज्ञ’ का शुभारम्भ अखण्ड ज्योति की शोभा-यात्रा के साथ स्मृति सभागार में हुआ। अखण्ड ज्योति के स्थापित होने एवं दोनो ब्रह्मलीन महाराज की चित्र पर पुष्पांजलि के साथ श्रीमद्भागवत कथा प्रारम्भ हुई।

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गोरक्षपीठाधीश्वर महन्त योगी आदित्यनाथ, श्रीविभूषित जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज सहित साधु-संतो, सपरिवार यजमानगणों एवं भक्त-श्रद्धालुजन ‘श्री श्रीमद्भागवत महापुराण’ की शोभा-यात्रा में सम्मिलित हुये।

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उद्घाटन अवसर पर योगी आदित्यनाथ ने कहा कि श्री गोरक्षपीठ की समृद्ध परम्परा को नई दिशा देने वाले युगपुरूष महन्त दिग्विजयनाथ महाराज एवं राष्ट्रसंत महन्त अवेद्यनाथ महाराज भारतीय संस्कृति एवं संतो-योगियों की परम्परा के दिव्याकाश में चमकते हुए नक्षत्र हैं। उनका व्यक्तित्व कृतित्व तत्कालीन देश काल और परिस्थितियों की चुनौतियों का समाधान करते हुए देश, समाज तथा धर्म को समर्पित था। उनकी पूर्ण स्मृति में प्रति वर्ष सप्ताह भर धार्मिक आध्यात्मिक आयोजनों के साथ सम सामयिक विषयों पर सम्मेलन आयोजित कर हम प्रेरणा प्राप्त करते हैं। धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्मा है। भारतीय धर्म और संस्कृति का दर्शन भारतीय धर्म-ग्रन्थों में होता है। ‘श्रीमद्भागवत कथा’ भारतीय धर्म-संस्कृति के ही मूल तत्व का उद्घाटन करती है। जब देश विपरीत परिस्थितियों में रहा है तथा संकर्मण काल से गुजरा है उस समय देश और समाज को एक करने का काम इन्ही कथाओं ने किया है। ‘श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ’ के आयोजन के पीछे हमारा यही उद्देश्य है कि भारतीय धर्म-संस्कृति की सुगन्ध घर-घर में पहुॅचे।

धर्म भारत का प्राण है और संस्कृति भारत की आत्माः योगी आदित्यनाथ

CM Yogi Adityanath ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा भी दुष्टों के पतन तथा धर्म की प्रतिष्ठा हेतु भगवान के अवतरण की कथा है। युगपुरूष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महराज एवं महन्त अवेद्यनाथ महाराज की पुण्यतिथि के अवसर पर प्रारम्भ यह श्रीमद्भागवत् कथा ज्ञान यज्ञ जीवन की सभी समस्याओं के निदान का मार्ग प्रशस्त करेगी। ‘धर्म की पुर्नप्रतिष्ठा और अधर्म का नाश’ भारतीय समाज का अभीष्ट रहा है और वह सदा बना रहेगा।

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श्रीमद्भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुभारम्भ करते हुये अयोध्या से पधारे प्रसिद्ध कथावाचक अनन्त श्रीविभूषित जगद्गुरू रामानुजाचार्य स्वामी राघवाचार्य महाराज ने युगपुरूष ब्रह्मलीन महन्त दिग्विजयनाथ महाराज एवं राष्ट्रसन्त ब्रह्मलीन महन्त अवेद्यनाथ महाराज को श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए कहा कि गुरू शिष्य की अनूठी परम्परा गोरक्षपीठ ने देखने को मिलती है। इस पीठ को पूरे देश के समाज के सजग प्रहरी, द्वारपाल एवं संरक्षणकर्ता के रूप में सम्पूर्ण सन्त समाज स्वीकार कर रहा है। भगवान् को प्राप्त करने के लिये मानव जन्म मिलता है। अतः जीवन जब तक है उसे मानवता की रक्षा में, भगवान् की सेवा में श्रीकृष्ण के कार्य में लगायें मोक्ष मिल जायेगा।

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कथा व्यास ने गुरू वन्दना एवं संकीर्तन से कथा प्रारम्भ करते हुए कहा कि ‘श्रीमद्भागवत कथा धर्म का सागर है’ उसमें से यथासम्भव पात्र अपनी पात्रता के अनुसार ही तत्व ग्रहण करते हैं। वस्तुतः श्रीमद्भागवत् भगवान् श्रीकृष्ण का ही दूसरा रूप है, देखने में यह पुराण लगता है किन्तु सुनने में यह नित्य नूतन है। श्रीमद्भागवत् कथा यशस्वी जीवन का मार्ग प्रशस्त करता है और पाप से मुक्ति के साथ मोक्ष तक पहुॅचाता है। यह कथा जीवन जीने की कला सिखाती है। अटूट निष्ठा और श्रद्धा से भक्त भगवान् तक इस कथा के माध्यम से पहुॅच सकता है। भगवान तो इतने दयालु है कि जो उन्हें ढूढ़ता रहता है एक दिन वह स्वंय उसे ढूढ़ने लगते है। भगवान का दर्शन सद्गुरू ही करा सकता है। कथा गुरू महिमा पर केन्द्रित होती है तथा भक्त गुरू महिमा का महात्म श्रवण करने लगते है।

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श्रीमद्भागवत कथा में भक्ति-ज्ञान-वैराग और नारद ऋषि के संवाद का प्रवेश होता है। देवर्षि नारद की सनकादिक ऋषियों से भेंट होती है और नैमिषारण्य में श्रीमद् भागवतकथा प्रारम्भ हो जाती है। आज की कथा में भगवान कृष्ण का अपने धाम जाने, परीक्षित का जन्म, महाराजा के रूप में परीक्षित का राज्यारोहण, महाराणा परीक्षित को श्रृंगी ऋषि का श्राप, श्राप से मुक्ति हेतु श्रीमद्भागवत कथा के श्रवण का प्रसंग के साथ गोकर्ण एवं धुंधकारी के जन्म के कथा का आनन्द भक्तों ने लिया।

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