यूपी के इस जिले में यहां नहीं मनाई जाती श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी, सीएम अखिलेश रहे हों या सीएम हो योगी कोई फर्क नहीं पड़ता

यूपी के इस जिले में यहां नहीं मनाई जाती श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी, सीएम अखिलेश रहे हों या सीएम हो योगी कोई फर्क नहीं पड़ता

Dheerendra Vikramadittya | Publish: Sep, 02 2018 02:40:46 PM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India


जिला अस्तित्व में आते ही जन्मोत्सव पर लगा ग्रहण

कान्हा यानी भगवान श्रीकृष्ण। पूरी दुनिया में जिनका जन्मदिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाता है। यूपी में तो पुलिस महकमा इसकी कई दिनों पहले मनाने की तैयारियां शुरू कर देता है। बंदीगृह में जन्म लेने की वजह से पुलिस महकमा अपने कान्हा के जन्मदिन को थानों में उत्सव के रूप में मनाता। लेकिन यूपी का एक ऐसा जिला भी है जहां जन्माष्ठमी नहीं मनाया जाता। ऐसा नहीं है कि इस जिले में कभी यह उत्सव मनाया ही नहीं गया हो। यहां कान्हा का जन्मदिवस काफी धूमधाम से मनाया जाता रहा है लेकिन एक हृदयविदारक घटना ने यहां के पुलिसवालों को ऐसे विचलित किया कि अब यहां जन्माष्ठमी आते ही पुलिसवाले सिहर जाते हैं।
बात करीब ढ़ाई दशक पहले की है। 29 अगस्त 1994 का वह मनहूस दिन कुशीनगर का पुलिसवाला कभी याद नहीं करना चाहता। देवरिया जनपद से अलग होकर कुशीनगर नया-नया जिला बना था। श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी की तैयारियां कुशीनगर जिले के थानों में चल रही थी। तैयारियों के बीच एक सूचना मिली। यह वह दौर था जब यूपी-बिहार में जंगल पार्टी का आतंक हुआ करता था। दस्युराज चारो ओर कायम था। कोतवाली पडरौना में तैयारियों के बीच मिली इस सूचना पर तत्कालीन पुलिसवाले हरकत में आ गए। सूचना यह थी कि पडरौना के पास कुबेरस्थान थानाक्षेत्र के पचरूखिया जोकि बिहार से लगा हुआ था, वहां दस्युओं के ठहरने और बड़े अंजाम की बात थी। कई थानों की फोर्स सक्रिय हो गई। उस समय के चर्चित थानाध्यक्ष अनिल पांडेय को भी इस आॅपरेशन में लगाया गया। बताया जा रहा कि अभी एक दिन पहले ही एक और थानाध्यक्ष राजेंद्र यादव का तबादला दूसरे प्रकोष्ठ में होने के बाद लगा दिया गया। भारी मात्रा में फोर्स लगा दिया गया।
चारों ओर पुलिस छावनी बन चुकी थी। नदी उसपार डकैत मौजूद थे। पुलिसवाले नाव से नदी पार कर रहे थे। नदी उसपार पहुंचे लेकिन डकैत नहीं मिले। अब नाव से बारीबारी सब नदी पार कर रहे थे। करीब 11 पुलिसवालों को नाव लेकर जैसे ही बीच नदी में पहुंची अचानक से फाॅयरिंग शुरू हो गई। बताया जा रहा कि नाव सवार पुलिसवाले जवाबी फायरिंग तो किए लेकिन तबतक नाविक और कई पुलिसवालों को गोली लग चुकी थी। नाव डूबने लगी। देखते ही देखते सभी 11 लोग नदी में डूबने लगे। कईयों को गोली लगी। नदी उस पार खड़े पुलिसवाले भी जवाबी फाॅयरिंग किया लेकिन अधिकतर निशाना चूकता गया। बताया तो यह भी जाता है कि कई सारे पुलिसवाले जब डकैतों का हमला हुआ तो भाग खड़े भी हुए।
उधर, नाव से नदी पार कर रहे पुलिसवाले फंस चुके थे। तीन पुलिसकर्मी तो किसी तरह नदी तैरकर बच निकले लेकिन सात पुलिसवाले इस मुठभेड़ में मारे गए। इसमें चर्चित थानाध्यक्ष अनिल पांडेय, सबइंस्पेक्टर राजेंद्र यादव, कांस्टेबल नागेंद्र पांडेय, आरक्षी खेदन सिंह, विश्वनाथ यादव, परशुराम गुप्ता और नाविक भूखल को जान गंवानी पड़ी।
इस पूरे प्रकरण में तत्कालीन एसपी बुद्धचंद्र मौर्य पर भी काफी आरोप लगे थे।
इसके बाद कुशीनगर जनपद में पुलिसवालों के लिए थाने में श्रीकृष्ण जन्माष्ठमी नहीं मनाया जाता।

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