यूपी के इस जिले में पुलिसवाले नहीं मनाते श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, उस खौफनाक वारदात को याद कर सिहर जाते हैं पुलिसवाले

यूपी के इस जिले में पुलिसवाले नहीं मनाते श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, उस खौफनाक वारदात को याद कर सिहर जाते हैं पुलिसवाले
यूपी के इस जिले में पुलिसवाले नहीं मनाते श्रीकृष्ण जन्माष्टमी, उस खौफनाक वारदात को याद कर सिहर जाते हैं पुलिसवाले

Dheerendra Vikramadittya | Updated: 23 Aug 2019, 06:37:35 PM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

  • ShriKrishna Janmashtami
  • आखिर इस जिले में क्यों ये लोग नहीं मनाते हैं श्रीकृष्ण जन्माष्टमी

भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी एक ऐसा त्योहार है जिसे पुलिसवाले भी बड़ी धूमधाम से मनाते हैं। थानों में भगवान श्रीकृष्ण की प्रतिमा रखी जाती है। जन्मोत्सव मनाने की पहले से ही तैयारियां की जाती है। लेकिन उत्तर प्रदेश का एक ऐसा जिला है जहां कई दशक से श्रीकृष्ण जन्माष्टमी नहीं मनाई जाती।
दरअसल, इस कहानी की शुरूआत करीब ढाई दशक पहले हुई थी। देवरिया जिला से अलग होकर पडरौना नया नया जिला बना था। अभी इसका नामकरण भी कुशीनगर के रूप में नहीं हुआ था। साल 1994 की बात है। पूरे जिले में श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार धूमधाम से मनाया जा रहा था। पुलिस महकमा पडरौना कोतवाली में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव मनाने की तैयारियां कर रहा था। यहां कोतवाली में जिले के आला पुलिस अफसर जुटे हुए थे।
यह वह समय था जब बिहार और बिहार से सटे यूपी में जंगल पार्टी का आतंक हुआ करता था। तैयारियों के बीच कुबेरस्थान थानाक्षेत्र के पास पचरुखिया में जंगल दस्युओं के एक गिरोह के होने की सूचना मिली। तरयासुजान के तत्कालीन एसओ अनिल पांडेय, कुबेरस्थान के तत्कालीन एसओ राजेंद्र यादव के अलावा करीब आधा दर्जन पुलिसवाले पहुंच गए दस्युओं को पकड़ने। उधर, पुलिस के आने की सूचना दस्यु गिरोह को भी लग गई। वे भी जाल बिछा दिए। पुलिस को नदी पार करके जाना था। नाव के सहारे ये लोग पहुंचे लेकिन दस्यु नहीं मिले। इधर कई थानों की फोर्स भी बुला ली गई थी जो नदी के इस पर घाट पर ही थे। जब अनिल पांडेय, राजेंद्र यादव आदि पुलिसवाले वापस लौट रहे थे, इनकी नाव जैसे ही नदी में कुछ दूर पहुंची। जाल बिछाए दस्युओं ने ताबड़तोड़ फायरिंग शुरू कर दी। दस्युओं ने नाविक को पहले गोली मार दी। इसके बाद नाव पर सवार पुलिसवालों को गोलियां से भून डाला। बताया जा रहा है कि गोली की आवाज सुनते ही नदी उस पार खड़े तमाम पुलिसवाले मोर्चा तक नहीं ले सके। हद तो यह कि कई तो भाग खड़े हुए। नाव पर सवार तीन पुलिसवाले किसी तरह तैर कर बाहर आ गए। जबकि नाविक सहित सात पुलिसवाले दस्युओं की गोली के शिकार हो गए। वारदात जन्माष्टमी की रात को ही हुई। पडरौना कोतवाली में त्योहार की तैयारियां धरी की धरी रह गई। बताया जाता है कि इस पूरे वारदात में पुलिस के ही कुछ लोगों ने मुखबीरी भी की थी।
इसके बाद से कुशीनगर में पुलिसवाले इस मनहूस वारदात को याद कर जन्माष्टमी नहीं मनाते।
बता दें कि पडरौना कोतवाली का मुख्य गेट पचरूखिया कांड में मारे गए पुलिसवालों व उस नाविक की याद में बनवाया गया।

ये पुलिसवाले पचरूखिया कांड में दस्युआें के हाथों मारे गए थे

एसआर्इ अनिल पांडेय
एसआई राजेंद्र यादव
कांस्टेबल विश्वनाथ यादव
कांस्टेबल नागेंद्र पांडेय
कांस्टेबल खेदन सिंह
परशुराम गुप्ता

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