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गोरखपुर

Smuggling news : गोरखपुर चिड़ियाघर बना तस्करी में पकड़े जा रहे इगुआना का अड्डा, जानें क्या होता है इगुआना

गोरखपुर के साथ ही जोन के कई जिलों की सीमाएं नेपाल से सटी हैं, इस कारण यह प्वाइंट तस्करों के लिए उपयुक्त है। पुलिस और बार्डर पर तैनात SSB चोरी छुपे लाए जा रहे जीवों को पकड़ कर चिड़ियाघर में भिजवा रही है।

गोरखपुरJul 05, 2024 / 06:37 pm

anoop shukla

विदेशी नस्ल का ग्रीन और रेड इगुआना तस्करों की पहली पसंद बन गया है। प्रदेश भर में पकड़े जा रहे ग्रीन इगुआना का ठिकाना भी शहीद अशफाक उल्ला खां प्राणि उद्यान (चिड़ियाघर) बनता जा रहा है।अब तक सात इगुआना तस्करों के चंगुल से छुड़ाकर चिड़ियाघर लाए जा चुके हैं। इनमें छह बुलंदशहर और एक लखीमपुर खीरी से हाल ही में लाया गया है।

नेपाल से तस्करी कर लाए जा रहे हैं यह जीव

बताया जा रहा है सभी इगुआना नेपाल के रास्ते भारत लाए गए थे। इन्हें तस्कर अलग-अलग स्थानों में बेचने की फिराक में थे, लेकिन इससे पहले वन विभाग की टीम ने जानवरों को बरामद कर लिया। हालांकि, इस बीच तस्कर मौके से फरार हो गए। लेकिन, प्रारंभिक सूचना में यह जानकारी जरूर मिली है कि इन छिपकली प्रजाति की इगुआना को तस्कर नेपाल के रास्ते ही भारत लेकर आए थे। चीन में इस जानवर की तस्करी भी होती है। यह अमेरिका में पाया जाता है और भारत में पूरी तरह से प्रतिबंधित है। लेकिन, वन विभाग के जानकार बताते हैं कि इस छिपकली प्रजाति के ग्रीन, रेड इगुआना को अब लोग भारत में पालना शुरू कर दिए हैं। क्योंकि, यह शाकाहारी प्रजाति का होता है और खतरनाक बिल्कुल नहीं है। फ्रेंडली होने के कारण यह आसानी से पालने वाले के ऊपर आ जाता है और समझदार भी होता है। इसकी लंबी जीभ और रंग इसे और छिपकली प्रजाति से बिल्कुल अलग बनाती है। यह पौधे, पत्ते सहित सब्जियों को खाते हैं। इस जानवर को तस्कर महंगे दामों में बेचते हैं।

ब्लैक काइट और सवाना लिजर्ड भी मौजूद

बुलंदशहर से रेस्क्यू किए गए जानवरों में ऑस्ट्रेलिया का ब्लैक काइट (काला बाज) और सवाना लिजर्ड (मांसाहारी छिपकली की सबसे बड़ी प्रजाति) भी मिली है। इन जानवरों को चिड़ियाघर के बाड़े में दर्शकों के लिए छोड़ दिया गया है। ये छिपकली अफ्रीका और अमेरिकी देशों में पाई जाती है। इसकी मांग सबसे अधिक चीन में है। बताया जाता है कि इस छिपकली को चीन में सबसे अधिक पसंद किया जाता है।

बोले डायरेक्टर

गोरखपुर स्थित चिड़ियाघर के निदेशक विकास यादव ने कहा की बेजुबान पशु पक्षियों को बेचना पूरी तरह से गैरकानूनी है। तस्करों के चंगुल से बुलंदशहर और लखीमपुर खीरी से रेड और ग्रीन इगुआना छुड़ाए गए थे, जिन्हें गोरखपुर चिड़ियाघर के सुपुर्द किया गया है। दर्शकों के लिए इन्हें बाड़े में छोड़ दिया गया है। ये विदेशी नस्ल के प्रतिबंधित जीव भारत में नहीं पाए जाते हैं। तस्करी कर इन्हें अन्य देशों से तस्कर लाते हैं। इन्हें बेचना और पालना दोनों गैरकानूनी है।

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