Ayushman Bharat सूबे के अव्वल जिले में ही महज दस से बारह प्रतिशत गोल्डेन कार्ड बन पाए आैर पीठ थपथपा रहे साहबान

Ayushman Bharat सूबे के अव्वल जिले में ही महज दस से बारह प्रतिशत गोल्डेन कार्ड बन पाए आैर पीठ थपथपा रहे साहबान
Ayushman Bharat सूबे के अव्वल जिले में ही महज दस से बारह प्रतिशत गोल्डेन कार्ड बन पाए आैर पीठ थपथपा रहे साहबान

Dheerendra Vikramadittya | Publish: Sep, 23 2019 01:12:35 PM (IST) Gorakhpur, Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

  • एक साल पूरा कर चुके आयुष्मान भारत योजना का सच
  • बाबूओं की फाइलों में आंकड़ेबाजी का शिकार होती पीएम की महत्वाकांक्षी योजना
  • योजना के गाथागान के शोर में दबी इस सच्चाई को जानकर रह जाएंगे हैरान

आयुष्मान भारत योजना (Ayushman Bharat Yojna) को लागू हुए पूरे एक साल हो चुके हैं। सरकार के मंत्री-मुख्यमंत्री इस योजना की शान में कसीदे पढ़ रहें। जिलों पर लाखों खर्च कर सफलता के जश्न मनाए जा रहे हैं। लेकिन बाबूओं की फाइल के आंकड़ों से सफल हो रही इस योजना की हकीकत कुछ और है। आलम यह कि अभी भी जिलों में अधिकतर लोगों का गोल्डेन कार्ड(Golden Card) ही नहीं बन पाया है। सरकार के मुखिया का गोरखपुर जिला, जिसे गोल्डेन कार्ड बनाने में अव्वल बताया जा रहा है उस जिले की हालत ही पूरे प्रदेश की आंकड़ेबाजी की कहानी कहने में काफी है। सरकारी आंकड़ों पर ही अगर यकीं करें तो यहां अभी महज दस से बारह फीसदी गोल्डेन कार्ड ही बन सके हैं। गोल्डेन कार्ड बनाने में प्रदेश के अव्वल जिले के हाल से सूबे की स्थिति को आसानी से समझा जा सकता है।

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गोरखपुर में 2 लाख 99 हजार लाभार्थी परिवार

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (CM Yogi Adityanath) के जिले गोरखपुर में दो लाख 99 हजार आयुष्मान भारत योजना के लाभार्थी परिवार (Ayushman Bharat Scheme beneficiary Family) हैं। किसी परिवार में दो से तीन लोग तो किसी परिवार में सात से दस लोग हैं। अगर एक औसत निकाली जाए तो साफ है कि एक परिवार में औसतन पांच-छह लोग हैं। यानी कि अकेले गोरखपुर जिले में पंद्रह लाख के आसपास गोल्डेन कार्ड बनाए जााने हैं। अब अगर सरकार और अधिकारियों के द्वारा पीठ थपथपाने के लिए जारी हो रहे आंकड़ों पर ही विश्वास किया जाए तो यहां अभी तक एक लाख 67 हजार गोल्डेन कार्ड बनवाए जा चुके हैं। सरकारी दावों के अनुसार गोरखपुर गोल्डेन कार्ड बनाने में अव्वल है।
ऐसे में सरकार के दावे ही खुद-ब-खुद इस योजना के क्रियान्वयन की पोल खोल रहे हैं। जानकार बताते हैं कि पंद्रह लाख कार्ड ही अगर गोरखपुर में मान लिया जाए तो सरकारी बाबूओं के आंकड़ों के अनुसार डेढ़ लाख से कुछ अधिक कार्ड बने हैं। इसको प्रतिशत में देखा जाए तो महज दस से बारह प्रतिशत ही कार्ड बन सके हैं। जब सूबे के सबसे अव्वल जिले में महज दस से बारह प्रतिशत कार्ड बने हैं तो अन्य जिलों की क्या स्थ्तिि होगी इसका अंदाजा आसानी से लगाया जा सकता है। सूत्रों की मानें तो पूरे प्रदेश में दो से तीन प्रतिशत कार्ड ही लोगों का बन पाया है।
बहरहाल, पूरे प्रदेश में मुख्यमंत्री से लगायत मंत्री-विधायक और साहबान योजना के जन जन तक पहुंचने की गाथा बता रहे हैं। ऐसे में अदम गोंडवीं बरबस ही याद आ जाते हैं-‘तुम्हारे फाइलों में गांव का मौसम गुलाबी है, मगर ये आंकड़े झूठे हैं, ये दावा किताबी है। उधर जम्हूरियत का ढोल पीटे जा रहे हैं वो, इधर परदे के पीछे बर्बरीयत है, नवाबी है।’

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