योगी के काबीना मंत्री के इस खास की गई कुर्सी, पूरी ताकत लगा दिए थे मंत्री लेकिन...

प्रदेश सरकार के सबसे कद्दावर मंत्री को इस चुनाव में लगा झटका

योगी सरकार के कद्दावर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खास ब्लॉक प्रमुख की कुर्सी आखिरकार चली ही गई। काबीना मंत्री और उनकी पूरी टीम दमखम के साथ लगी ही रह गई और उनके खास की कुर्सी अविश्वास प्रस्ताव में चली गई। भाजपा प्रमुख के खिलाफ 66 मत पड़े जबकि उनके पक्ष में महज एक मत पड़ा। कुल 123 बीडीसी इस क्षेत्र पंचायत में हैं।

कुशीनगर के पडरौना विधानसभा क्षेत्र के सबसे बड़े ब्लॉक विशुनपुरा में प्रमुख की कुर्सी को लेकर आज अविश्वास पर बहस हुई। प्रमुख के खिलाफ एकतरफा 66 मत पड़े। एक साल पहले इस सीट को प्रदेश के कद्दावर मंत्री स्वामी प्रसाद मौर्य के खास गोल्डी जायसवाल की पत्नी कंचन जायसवाल ने जीती थी। इसके पूर्व इस सीट पर समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता विक्रमा यादव का दबदबा रहा। 20 साल तक लगातार वह या उनके परिवार का कोई सदस्य यहां से ब्लॉक प्रमुख रहा। विक्रमा यादव के इस सीट पर पकड़ का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि 2011 में हुए प्रमुख चुनाव में विक्रमा यादव को हरवाने के लिए तत्कालीन केंद्रीय राज्य मंत्री आरपीएन सिंह, बीजेपी के कई कद्दावर नेता, समाजवादी पार्टी के कई बड़े चेहरे संयुक्त प्रत्याशी के रूप में एक प्रत्याशी को लेकर आये थे लेकिन काफी रशाकशी के बाद भी संयुक्त विपक्ष का प्रत्याशी चुनाव नहीं जीत सका था। इसके पहले हुए चुनाव में अनुसूचित जाति के लिए यह सीट आरक्षित हुई तो वह अपने ड्राइवर को चुनाव जितवाने में सफल हुए थे।
हालांकि, इस बार हुए चुनाव में विशुनपुरा के ताकतवर प्रमुख विक्रमा यादव को बैकफुट पर आना पड़ा। प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री व पडरौना के विधायक स्वामी प्रसाद मौर्य के खास गोल्डी जायसवाल अपनी पत्नी कंचन जायसवाल को एकतरफा चुनाव जितवाने में सफल हुए थे। आलम यह कि विक्रम यादव या उनके परिवार का कोई सदस्य पर्चा तक दाखिल नहीं कर सका था। पर एक साल बीतते ही कद्दावर मंत्री के खास इस प्रमुख की कुर्सी खतरे में पड़ती दिख रही है। पूर्व प्रमुख विक्रमा यादव ने बीते दिनों 77 से अधिक बीडीसी का कलेक्ट्रेट पर मार्च करा अविश्वास ला दिया। अब चर्चा यह है कि बीजेपी की सरकार में ही कद्दावर मंत्री के खास की कुर्सी खतरे में पड़ गई है। हालांकि, राजनैतिक सूत्र यह भी कह रहे कि कद्दावर मंत्री के अलावा बगल के जिले के भी एल वरिष्ठ मंत्री प्रमुखी बचाने के लिए मैनेज करने में लगे हुए थे।
बता दें कि पडरौना विधानसभा क्षेत्र में दो ब्लाॅक हैं। विशुनपुरा व पडरौना। वोट के नजरिए से विशुनपुरा सबसे बड़ा ब्लाॅक है। ऐसे में कद्दावर मंत्री के खास का हारना उनकी लोकप्रियता पर भी असर कर सकता है।

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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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