1800 किलोमीटर सायकिल चलाकर कर्नाटक से गोरखपुर पहुंचा ट्रक ड्राइवर

9 दिनों तक रोज़ाना लगातार चलाता रहा सायकिल।

ट्रक में ही गुज़ारने पड़े थे 35 दिन।

गोरखपुर. परिवार का पेट पालने की मजबूरी परदेस ले गई। वहां ट्रक चलाने लगे। फिर अचानक एक दिन लॉक डाउन का ऐलान हुआ और वह ट्रक में ही फंस गया। 35 दिन ट्रक में ही गुजारे, लेकिन खाना और पैसे खत्म हो गए और मालिक ने भी मदद से हाथ खड़े कर दिए तो मजबूरन 1800 किलोमीटर दूर अपने घर के लिए साइकिल से ही निकल पड़े। यह लॉक डाउन में गोरखपुर के बड़हलगंज निवासी विमलेश के संघर्ष की कहानी है। उम्मीद से भरे विमलेश ने हिम्मत और हौसला नहीं छोड़ा और पूरे 9 दिन तक साइकिल चलाकर वह कर्नाटक की गुलबर्गा से बड़हलगंज पहुंच गए। जहां उन्हें प्रशासन ने एक स्कूल में क्वारंटीन कर दिया है।

 

कर्नाटक प्रांत के गुलबर्गा मेरा कर ट्रक चलाने वाले बड़हलगंज के सहड़ौली गांव निवासी विमलेश ओझा 19 मार्च को गुलबर्गा से सीमेंट लोडेड ट्रक लेकर निकले, लेकिन इसी दौरान लॉक डाउनलोड जाने से वाह ट्रक लेकर तेलंगाना प्रांत के हैदराबाद के पास फस गए। ट्रक में ही किसी तरह 35 दिन गुजार दिए लेकिन इस बीच खाना पीना और पैसे खत्म हुए तो उनकी परेशानी बढ़ गई।

 

मालिक को फोन करने पर उसने भी मदद से हाथ खड़े कर दिए। मजबूर विमलेश ट्रक को हाईवे पर छोड़ 2 दिन पैदल चलकर गुलबर्गा पहुंचा। वहां अपने कमरे पर रखें ₹6000 में से मोहल्ले के एक युवक की साइकिल 55 सो रुपए में खरीद ली। 26 अप्रैल को विमलेश ने साइकिल से ही गुलबर्गा से गोरखपुर की यात्रा शुरू की। मंजिल बहुत दूर और सफर बेहद कठिन था। किसी तरह हैदराबाद होते हुए नागपुर हाईवे के रास्ते विमलेश जबलपुर पहुंचे और खेल वहां से कटनी होते हुए यूपी में दाखिल हो हो गया। वह पूरे 9 दिनों तक साइकिल चलाता रहा।

 

इस कठिन सफर में विमलेश के पास न खाना था और ना ही पैसे बचे थे। वह पूरी तरह रास्ते में मदद करने वालों पर निर्भरता। कभी खाना मिला तो खा लिया वरना पानी पीकर ही रह गए। 22 दिन भूखे रहकर भी विमलेश ने हिम्मत नहीं हारी। हर दिन करीब 200 किलोमीटर साइकिल चलाता रात होने पर सुरक्षित स्थान देख कर रुक जाता। अगर पुलिस रोकती तो खेतों पगडंडियों का सहारा लेना पड़ता। इसके अलावा दूसरे जिलों में प्रवेश करने के लिए भी सड़क के बजाएं पगडंडियों और गांव के रास्तों का सहारा लेना पड़ता जिससे दूरी और बढ़ जाती।

 

जबलपुर में साइकिल पर साइकिल पंचर होने पर 50 किलोमीटर पैदल चलना पड़ा तब जाकर हाईवे पर किसी तरह से पंचर बना। 26 अप्रैल को गुलबर्गा से चला विमलेश 9 दिनों तक लगातार साइकिल चलाकर 5 मई की रात बड़हलगंज पहुंचा। पटना चौराहे पर पुलिस बैरियर लगाकर चेकिंग कर रही थी। यहां क्या आधार कार्ड की जांच की गई और इसके बाद प्रशासन ने उसे एक स्कूल में क्वारंटीन कर दिया है।

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रफतउद्दीन फरीद Desk/Reporting
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