वर्षों के सघर्ष के बाद मिली सफलता, वनटांगिया परिवारों को योगी सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

वर्षों के सघर्ष के बाद मिली सफलता, वनटांगिया परिवारों को योगी सरकार ने दिया बड़ा तोहफा

Varanasi Uttar Pradesh | Publish: Oct, 13 2017 05:03:09 PM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

वनटांगिया वनग्राम अब बनेगा राजस्व गांव, जारी हुई अधिसूचना

गोरखपुर. आखिरकार लंबे संघर्षों के बाद वनटांगिया गांव को सरकार ने राजस्व गांव घोषित कर दिया। प्रमुख सचिव राजस्व रजनीश दुबे ने इसके लिये अधिसूचना जारी कर दी है। पहले ये गांव वन ग्राम के रूप में अभिलेखों में दर्ज थे।गोरखपुर के तिकोनिया नम्बर-3, जंगल रामगढ़ उर्फ रजही खाले टोला, चिलबिलवा, आमबाग, रामगढ़ सरकार आजादनगर में वनटांगिया परिवार दशकों से रहते आ रहे थे।

 

मूलभूत सुविधाओं से वंचित ये परिवार वोटिंग के भी अधिकार से वंचित रहे हैं। लंबे संघर्ष के बाद कुछ साल पहले ही इन परिवारों को वोटिंग का अधिकार मिला। लेकिन जमीन के अधिकार सहित मूलभूत सुविधाओं से वनटांगिया संघर्ष कर रहे थे। तत्कालीन सांसद योगी आदित्यनाथ भी समय-समय पर इनकी आवाज उठाते रहे हैं। जब मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ की ताजपोशी हुई तो वनटांगिया परिवारों में एक उम्मीद जगी। पहली बैठक में ही मुख्यमंत्री ने भी वनटांगिया गांव को राजस्व गांव घोषित करने के लिए कवायद शुरू करने का निर्देश दिया। साथ ही गांव को मूलभूत सुविधाओं से संतृप्त करने का भी निर्देश दिया।

 

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अब इस दीवाली यह सरकार वनग्रामों को राजस्व गांव घोषित कर तोहफा देने जा रही। इसके लिए प्रमुख सचिव डाॅ. रजनीश दुबे ने अधिसूचना जारी की है। अधिसूचना जारी करते हुए गांवों की चैहद्दी भी चिन्हित कर दी गई है। प्रमुख सचिव ने बताया कि वन ग्रामों के राजस्व गांव के रूप में अधिसूचना जारी करने के साथ ही इन गांवों में विकास का रास्ता खुल जाएगा। जमीन का मालिक वनटांगिया हो सकेंगे। इसके साथ ही यहां निर्माण कार्य हो सकेगा।

 

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कौन हैं ये वनटांगिया

वनटांगिया किसान वह हैं जो जंगलों को सहेजने कई पीढ़ियों से काम कर रहे। टांगिया शब्द म्यांमार के टोंगिया शब्द का अपभ्रंश है। वहां की स्थानीय भाषा में इसे पहाड़ या खेत के लिए इस्तेमाल में लाया जाता है। पेड़ पौधे लगाकर पहाड़ियों का संरक्षण करने वाले टांगिया कहलाते हैं। भारत में अंग्रेजों ने वनों को संरक्षित करने और हरियाली के लिए बंधुआ मजदूरी कराते हुए वनों में ढ़ेर सारे मजदूर लगाए। इनका काम वन क्षेत्र में पौधे लगाना और उनका संरक्षण करना था। पौधों के बीच-बीच में नौ फीट खाली जमीन इसके एवज में दी जाती थी। इस जमीन पर यह किसान व मजदूर अन्न उगाता था जिससे उसका भरण-पोषण होता था। यही परिवार वनटांगिया के रूप में आज भी जाने जाते हैं।

by Dheerendra V Gopal

 

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