जानिए कौन हैं प्रवीण निषाद जिसने योगी की सीट पर पहली बार में ही हांसिल की जीत, राजनीति के हैं चाणक्य

जानिए कौन हैं प्रवीण निषाद जिसने योगी की सीट पर पहली बार में ही हांसिल की जीत, राजनीति के हैं चाणक्य

Jyoti Mini | Publish: Mar, 14 2018 05:21:54 PM (IST) Gorakhpur, Uttar Pradesh, India

बीजेपी की निरंकुश शासन से जनता त्रस्त थी, जिस वजह से जनता ने सपा को जीत दिलाई।

गोरखपुर. सीएम योगी के सीट पर जीत हांसिल करने वाल डॉ, संजय निषाद के बेटे प्रवीण निषाद ने सभी अध्यक्षों सहित सपा, बसपा, निषाद दल व पीस पार्टी समेत अन्य सहयोगी को धन्यवाद दिया है। साथ ही कहा कि, बीजेपी की निरंकुश शासन से जनता त्रस्त थी। जिस वजह से जनता ने सपा को जीत दिलाई। बता दें कि, लगभग 30 साल बाद गोरखपुर में बीजेपी का किला ढहा है। प्रवीण निषा ने पहली बार में ही रिकॉर्ड कायम किया है।

27 राउंड

 

उपेंद्र 384753
प्रवीण 405870
सुरहिता 16665

 

 

उपचुनाव के लिए समाजवादी पार्टी ने इंजीनियर प्रवीण को गोरखपुर सीट पर उम्मीदवार बनाया। जिसके बाद यूपी राजनीति बड़े ही दिलचस्प मोड़ पर दिख रही थी। जी हां, सपा ने गोरखपुर सीट पर उपचुनाव के लिए निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष संजय निषाद के बेटे को सपा का उम्मीदवार बनाकर हर किसी को चौंका दिया था। संजय निषाद खुद इस इलाके के बड़े नेता माने जाते हैं। ऐसे में अब सपा ने निषाद पार्टी व पीस पार्टी के साथ गठबंधन के बाद प्रवीण को मैदान में उतारकर ये संदेश दिया कि, किसी भी हाल में सपा आने वाले लोकसभा चुनाव में बीजेपी को आसानी से जीत का स्वाद नहीं चखने देगी। और हुआ भी यही, सपा ने गोरखपुर में इतिहास कायम कर दिया।

 

पिता की पार्टी के चाणक्य माने जाते हैं प्रवीण

 

इंजीनीयरिंग की पढ़ाई किए प्रवीण को सपा ने उम्मीदवार इसलिए भी बनाया है कि, इंजीनियर प्रवीण निषाद पार्टी के लिए रणनीति बनाने में माहिर हैं। कहा जाता है कि, प्रवीण की ही देन रही है कि उन्होंने कम समय में ही पिता की राजनीति कद को ऊंचा उठाने में काफी काम किया है। ऐसे में इस नेता का अखिलेश साथ जुड़ना इस दौर में काफी महत्वपूर्ण माना जा रहा था। ऐसे में सपा अगर इस सीट के सहारे निषाद वोटरों में सेंधमारी की नतीजन बीजेपी को हार का सामना करना पड़ा। हालांकि गोरखपुर सीट पर भाजपा की परंपरागत सीट मानी जाती रही है।। यहां बीजेपी को हरा पाना किसी भी दल के लिए आसान नहीं कहा जा सकता था, लेकिन अखिलेश यादव की चाल ने हर राजनीतिक दलों को संकट डाल ही दिया और जीत हांसलि की।

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