सीट बंटवारे को लेकर बीजेपी में मचेगा घमासान, योगी V/S स्वामी

बीजेपी के लिये बड़ी परेशानी बनेगी स्वमी की डिमांड और योगी का मान। कई सीटें बन सकती हैं परेशानी की वजह।

गोरखपुर. मिशन यूपी को फतह करने के लिए दूसरे दलों के नेताओं को शामिल कराना पार्टी विथ डिफरेन्स के लिए मुसीबत का सबब न बन जाये। बसपा के बागी स्वामी प्रसाद मौर्या को भगवा चोला ओढ़ाने के बाद पूर्वांचल में समीकरण तो ऐसे बनते दिखने लगे हैं।




पूर्वांचल में बीजेपी का प्रमुख चेहरा गोरक्ष पीठाधीश्वर योगी आदित्यनाथ रहे हैं। गोरखपुर समेत आसपास की तमाम सीटों पर उनका अच्छा खासा प्रभाव है। पूर्वान्चल में उनकी बढ़ती लोकप्रियता की ही देन है कि बीजेपी में सीएम पद की दौड़ में उनका नाम प्रमुखता से शामिल है। लेकिन पिछले कुछ दिनों में पार्टी नेतृत्व द्वारा लिया जा रहा फैसला पार्टी के भीतर ही असंतोष को बढ़ा रहा।




वजह यह कि कई ऐसी सीटों पर जहां योगी आदित्यनाथ के करीबी चुनाव लड़ने के लिए दावा कर रहे थे वहां दूसरे दलों के नेताओं को शामिल करा कर राह थोड़ी मुश्किल की गई। बीजेपी शीर्ष नेतृत्व द्वारा स्वामी प्रसाद मौर्या को पार्टी में लाया जाना भी पूर्वान्चल में टिकट बंटवारे को होने वाले घमासान की ओर ही इशारा कर रहा। वजह यह कि बीते दिनों बस्ती में हुए सम्मेलन में राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने योगी को गोरखपुर क्षेत्र की विधानसभा सीटों की जिम्मेदारी दी थी। मंच से उन्होंने साफ तौर पर कहा था कि 65 सीटों में कम से कम 62-63 सीट्स जिताएं।




इसकी के होसाब से तैयारी भी चल रही थी। अब अचानक बसपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष स्वामी प्रसाद मौर्या को पार्टी में शामिल करा लिया गया। इनकी जॉइनिंग में स्वयं अमित शाह का शामिल होना बीजेपी कार्यकर्ताओं में यह सन्देश देने के लिए काफी है कि स्वामी की पार्टी में क्या अहमियत होगी। स्वामी को लेकर जो रणनीति पार्टी बना रही उसके तहत टिकट के बंटवारे में भी उनका सीधे तौर पर हस्तक्षेप होगा। चूंकि स्वामी का राजनैतिक कार्यक्षेत्र भी कुशीनगर- गोरखपुर और आसपास के ही जिले हैं। ऐसे में लाजिमी है तमाम सीटों पर स्वामी भी अपनी पसंद-नापसंद जाहिर करेंगे।




ऐसे में दो क्षत्रपों के बीच शह और मात का भी दौर चले इससे इनकार नहीं किया जा सकता। हालांकि, योगी खेमा अभी इस मामले में कुछ भी बोल नहीं रहा जबकि स्वामी खेमा अपने नेता की धमाकेदार एंट्री से अपनी स्थिति को लेकर आश्वस्त है। बहरहाल, बीजेपी ने एक ही म्यान में दो तलवार रख तो ली है लेकिन उसको संभालने में अगर थोड़ी सी भी चूक हुई तो दुश्मन को ढेर करने की बजाय अपना ही नुकसान हो इसकी आशंका भी कम नहीं। अब देखना गई पार्टी के रणनीतिकार इस संवेदनशील प्रकरण को कैसे संभालते हैं।
Show More
वाराणसी उत्तर प्रदेश
और पढ़े
हमारी वेबसाइट पर कंटेंट का प्रयोग जारी रखकर आप हमारी गोपनीयता नीति और कूकीज नीति से सहमत होते हैं।
OK
Ad Block is Banned