खुद इस गंभीर बीमारी से उबरे तो घर घर पहुंचा रहे जागरूकता की लौ

  • टीबी(TB) मरीजों के घर घर जाकर जागरूक कर रहा यह युवक
  • गोरखपुर शहर में पांच सौ से अधिक टीबी रोगी
  • इस साल जिले में तेरह हजार से अधिक चिंहित हुए टीबी मरीज

कृष्णानगर प्राइवेट कालोनी के रहने वाले सूरज कभी खुद जीवन-मौत के बीच जूझ रहे थे। उनको टीबी ने घेर लिया था। गंभीर बीमारी से उबर चुके सूरज अब दूसरों को जागरूक करने में लगे हैं। टीबी से निजात पाने के बाद वह इस बीमारी से बचाव, लक्षण की जानकारी दूसरों को देकर लोगों को इस बीमारी के प्रति सचेत कर रहे हैं।
सूरज अपनी ओर से लोगों को टीबी(TB) से बचाव के लिए लोगों को जागरूक तो करते ही हैं, स्वास्थ्य विभाग से टीबी मरीजों की सूची लेकर मरीजों के घर जाते हैं उनको एहतियात बरतने के लिए बताते हैं। वह परिवार के सदस्यों को समझाते हैं कि क्या करें क्या न करें।

क्यों लोगों को जागरूक कर रहे सूरज

टीबी चैम्पियन सूरज कभी खुद टीबी के मरीज थे। उन्होंने बताया कि दो साल पहले उन्हें यह बीमारी हो गयी थी। एक महीने तक खासी आई लेकिन उन्होंने सामान्य बुखार समझा। जब खांसी के साथ खून आने लगा तो वह जिला क्षय रोग विभाग गए। वहां जांच के बाद पता चला कि उन्हें टीबी है। वहीं उनकी मुलाकात एक संस्था के मेंटर शरद से हुई। शरद उनके लिए डाट्स प्रोवाइडर बने। छह महीने के इलाज के बाद सूरज ठीक हो गए। अब सूरज शहर में टीबी रोगियों के घर जाते हैं और उन्हें भरोसा दिलाते हैं कि टीबी का समय से इलाज करने पर यह बीमारी ठीक हो जाती है।

शहर में हैं 550 टीबी रोगी

जिला क्षय रोग अधिकारी (डीटीओ) डाॅ. रामेश्वर मिश्रा ने बताया कि शहर में इस समय 550 मरीजों के टीबी (Tuberculosis)का इलाज जिला क्षय रोग विभाग की देखरेख में चल रहा है। उन्होंने बताया कि इस साल जनवरी से लेकर मार्च तक सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी के 1520 मरीज चिन्हित किए गए जबकि निजी चिकित्सालयों में 847 मरीज चिन्हित हुए। एक अप्रैल 2018 से 10 जुलाई 2019 तक टीबी के कुल 13042 मरीज चिन्हित हुए हैं।

क्षय रोग को जानिए

  • प्रत्येक 10 में से 7 व्यक्ति इसके बैक्टेरिया से प्रभावित है। प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ने पर इन 7 में से कोई व्यक्ति इसकी चपेट में आ सकता है।
  • बच्चों में टीबी की रोकथाम के लिये उनके पैदा होने के बाद अतिशीघ्र बीसीजी का टीका लगवाना आवश्यक है।
  • टीबी का एक मरीज 10-15 लोगों को इसका बैक्टेरिया बांट सकता है।
  • यह बीमारी टीबी मरीज के साथ बैठने से नहीं होती बल्कि उसके खांसी, छींक, खून व बलगम के संक्रमण से होती है।
  • मुंह पर रूमाल रख कर, बलगम को राख या मिट्टी से डिस्पोज करके व सही समय पर टीबी की जांच व इलाज से हम इसे मात दे सकते हैं।
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धीरेन्द्र विक्रमादित्य
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