अनोखा प्रेम: बंदर के बच्चे को छीनकर ले गया वन विभाग, फूट-फूटकर रोये महिला और बच्चे, वीडियो वायरल

पीपुल्स फॉर एनीमल्स की सूचना पर वन विभाग ने परिवार से छीनकर बंदर के बच्चे को जंगल में छोड़ा।

By: lokesh verma

Published: 07 Sep 2021, 09:30 AM IST

ग्रेटर नोएडा. सोशल मीडिया में एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा, जिसमें कुछ पुलिसकर्मी और वन विभाग के लोग एक महिला और बच्चे से एक बंदर के बच्चे को छीनकर ले जा रहे हैं। इसके बाद महिला और उसका बच्चा बिलख-बिलख कर रो रहे हैं और बंदर के बच्चे को वापस मांग रहे हैं। लेकिन, पुलिसकर्मी बंदर के बच्चे को ले गए। पुलिस विभाग के मीडिया सेल का कहना है कि उनको पीपुल्स फॉर एनीमल्स की तरफ सूचना मिली की ये लोग बंदर के बच्चे को बेचने वाले थे। इसलिए कार्रवाई करते हुए बंदर के बच्चे को जंगल में छोड़ दिया गया है, लेकिन मामले की पड़ताल की तो सच्चाई कुछ और ही निकल कर आई।

वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रोते हुए बच्चे से छोटे बंदर को छीन कर पुलिस और वन विभाग के लोग ले जा रहे हैं। पूरा परिवार हाथ जोड़कर उन उन लोगों से गुहार लगाते हुए बिलख-बिलख कर रो रहा है। लेकिन, वन विभाग की टीम पर कोई असर नही पड़ा और वो बंदर को अपने साथ ले गए। महिला बंदर के बच्चे के लिए रो रही है और गुहार लगा रही है कि उनके बिछड़े हुए बंदर के बच्चे को वापस उसके परिवार से मिला देना चाहिए। इन लोगों ने बताया कि करीब 3 महीने पहले इस बच्चे को लेकर आए थे, तभी से वह उनके परिवार के सदस्य की तरह रह रहा था। महिला बंदर के बच्चे को अपने बेटे की तरह ही पाल रही थी। बेटी अभिलाषा के साथ ही वह खाना खाता था, सोता था और साथ ही घूमता था। यह सभी लोग ग्रेटर नोएडा के अल्फा-2 की झुग्गियों में रहते हैं और कूड़ा बीनकर अपना पालन-पोषण करते हैं।

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शायद किसी से हमारी खुशी देखी नहीं गई

अभिलाशा का कहना है उन्होंने उसका नाम भवानी रखा था, लेकिन शायद किसी को उनका जानवर से प्रेम पसंद नहीं आया और उन्होंने वन विभाग और पुलिस से इसकी शिकायत कर दी। इसके बाद देर शाम झुग्गियों में पुलिस और वन विभाग की टीम पहुंची और इन लोगों से जबरन भवानी को छीनकर कर ले गई। पूरा परिवार हाथ जोड़कर उन उन लोगो से गुहार लगाता रहा। वे बिलखते रहे और रोकर बेहोश भी हो गए, लेकिन वन विभाग की टीम पर कोई असर नही पड़ा और वो बंदर को अपने साथ ले गए।

वन विभाग के अधिकारी बेचने की बात को गलत बताया

मौके मौजूद पड़ोसियों ने बताया कि ये लोग पूरा दिन उस बंदर के बच्चे के साथ ही रहा करते थे। उसके लिए अलग से दूध भी लिया करते थे। परिवार वालों ने बताया कि रात से किसी ने भी खाना नहीं खाया है। उन्होंने कहा कि वह बंदर नहीं, उनके परिवार का सदस्य था। उन्होंने बताया की हम उसको बेचना नहीं चाहते थे, हम तो उसको हमेशा साथ ही रखते थे। किसी ने झूठी सूचना दी और उसके बाद पुलिस हमसे वह बच्चा छीन कर ले गई। पुलिस का कहना है कि ये कार्रवाई एनजीओ पीपुल्स फोर एनीमल्स के तरफ से की गई। वन विभाग के अधिकारी प्रमोद श्रीवास्तव का कहना है कि बंदर के बच्चे को बेचने की बात सही नहीं है, लेकिन बंदर पालतू जानवर नहीं, वह वन्य प्राणी है। इसलिए उसे जंगल में छोड़ दिया गया।

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