सीएम योगी ने इनकी कराई समीक्षा तो 6400 करोड़ के कर्ज की बात आई सामने, वसूली को तैयार किया बड़ा प्लान, देखें वीडियो

सीएम योगी ने इनकी कराई समीक्षा तो 6400 करोड़ के कर्ज की बात आई सामने, वसूली को तैयार किया बड़ा प्लान, देखें वीडियो

Rahul Chauhan | Updated: 23 Aug 2019, 02:15:41 PM (IST) Greater Noida, Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh, India

खबर की मुख्य बातें-

-प्राधिकरण द्वारा सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन फाइल करने का भी निर्णय लिया गया

-डिफाल्टर बिल्डर्स और डेवलपर्स के भाग लेने पर रोक लगाने का भी फैसला किया गया है

-आईटी परियोजनाओं के परिवर्तन के लिए 5000 रुपये प्रक्रिया शुल्क के तौर पर देना होगा

ग्रेटर नोएडा। प्राधिकरण की गुरुवार को हुई 115वीं बोर्ड बैठक में आईटी और आईटीईएस परियोजनाओं के लिए आवंटित भूखंडों का उपयोग औद्योगिक गतिविधियों के लिए करने की कुछ शर्तों के साथ मंजूरी दे दी गई। बैठक में आम्रपाली ग्रुप के बाबत सुप्रीम कोर्ट के 23 जुलाई के आदेश के अनुपालन के साथ ही इस बात का फैसला किया गया कि आम्रपाली ग्रुप से अपने 3700 करोड़ रुपये की वसूली के लिए प्राधिकरण सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन फाइल करने का भी निर्णय लिया गया। इसके अलावा वाणिज्यिक भूखंडों की योजना में डिफाल्टर बिल्डर्स और डेवलपर्स के भाग लेने पर रोक लगाने का भी फैसला किया गया है।

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उत्तर प्रदेश के मुख्य सचिव अनूप चंद पांडेय की अध्यक्षता में हुई बोर्ड बैठक में आईटी, आईटीईएस के लिए औद्योगिक सेक्टरों में आवंटित भूखंडों का उपयोग अब औद्योगिक गतिविधियों के लिए हो सकेगा। इसके लिए आवंटियों को कन्वर्जन चार्जेज के रूप में वर्तमान प्रचलित दर की 1 फीसदी धनराशि जमा करनी होगी। औद्योगिक विभाग की नीति में इस आईटी परियोजनाओं के परिवर्तन के लिए 5000 रुपये प्रक्रिया शुल्क के तौर पर देना होगा।

 

जिन मामले में पट्टा प्रलेख का निष्पादन हो चुका है और नक्शा पास नहीं हुआ है, ऐसे आवंटियों के लिए तय एफएआर के अनुसार भवन का मानचित्र मंजूर करने के लिए आवेदन करना होगा। इसके अलावा जिस मामले में लीज होने के बाद भवन का नक्शा पास है लेकिन निर्माण कार्य शुरू नहीं हुआ है, उस मामले में एफएआर में संशोधन के साथ ही भवन के मानचित्र पास कराने के लिए आवेदन करना होगा। उसके बाद ही निर्माण कार्य शुरू किया जा सकेगा।

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बोर्ड बैठक में आम्रपाली ग्रुप के बाबत बायर्स के पक्ष में 23 जुलाई-2019 को दिए गए सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर अमल करने का फैसला किया गया। लेकिन, इस बात का भी निर्णय लिया गया कि प्राधिकरण आम्रपाली गु्रप से अपने 3700 करोड़ रुपये की वसूली के लिए सुप्रीम कोर्ट में रिव्यू पेटिशन फाइल करेगा। बैठक में कोर्ट के आदेश के अनुपालन में होम बायर्स के हितों की रक्षा के लिए त्रिपक्षीय सब लीज डीड निष्पादन,जलापूर्ति और बिजली के कनेक्शन के लिए आवश्यक कार्रवाई करने का फैसला किया गया।

ग्रेटर नोएडा की 113वीं बोर्ड बैठक में तय किया गया था कि अनिर्मित और अक्रियाशील औद्योगिक भूखंडों के सशर्त ट्रांसफर की मंजूरी दी गई थी। वह अवधि 17 जुलाई-2019 तक थी। गुरुवार को हुई बोर्ड बैठक में उद्यमियों की मांग पर इस सुविधा को एक वर्ष के लिए बढ़ाने का फैसला किया गया। बोर्ड बैठक में प्राधिकरण के कार्यों की समीक्षा की गई। इसमें प्राधिकरण पर 6400 करोड़ रुपये के कर्ज पर चिंता जताई गई। ग्रेटर नोएडा को अंतर्राष्ट्रीय सुविधाओं के साथ विकसित किया जा रहा है। इसके लिए प्राधिकरण को धन की जरूरत है। इसके लिए प्राधिकरण की आय के स्रोतों को बढ़ाने के विकल्पों पर विचार किया गया।

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बोर्ड बैठक में आय बढ़ाने के लिए नई आवंटन योजनाएं लाने की मंजूरी दी गई। इसके लिए कामर्शियल भूखंडों की योजना में कंसोर्टियम बनाने को मंजूरी दी गई। यह भी निर्देश दिए गए कि भविष्य में लाई जाने वाली योजनाओं में बिल्डर्स और डेवलपर्स को अवंटन की प्रक्रिया में भाग लेने की अनुमति न दी जाए। खासतौर से उसे जिस पर प्राधिकरण का बकाया है और वह डिफाल्टर की श्रेणी में आ रहा है। इस योजना के तहत पहली बार बिल्टअप शॉप्स, क्योस्क और कामर्शियल भूखंडों का आवंटन ई-ऑक्शन के माध्यम से किया जाएगा। व्यावसायिक भूखंडों की योजना ऑनलाइन माहवार आधार पर लाई जाएगी। इस योजना में दो प्रकार के कामर्शियल भूखडों को शामिल किया जाएगा। जिसमें 2 एफएआर और 04 एफएआर के भूखंडों की योजना शामिल होगी।

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