दादरी के बिसहा़ड़ा कांड की सच्चाई बताएगी यह डॉक्यूमेंट्री फिल्म

हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बनी डॉक्यूमेंटरी फिल्म 'द ब्रदरहुड' को फिल्म ट्रिब्यूनल ने मंजूरी दे दी है।

By: Rahul Chauhan

Updated: 26 Jan 2018, 01:07 PM IST

ग्रेटर नोएडा। बिसाहड़ा कांड की पृष्ठभूमि में हिन्दू-मुस्लिम एकता पर बनी डॉक्यूमेंटरी फिल्म 'द ब्रदरहुड' को फिल्म ट्रिब्यूनल ने मंजूरी दे दी है। फिल्म ट्रिब्यूनल ने सेंसर बोर्ड की आपत्तियों को गलत करार दिया है। इस फिल्म को ट्रिब्यूनल ने देश में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच सांप्रदायिक सौहार्द्र को बढ़ावा देने वाला बताया है। वहीं फिल्म के सीन भी नहीं काटे जाएंगे। सेंसर बोर्ड ने कई सीन काटने को कहा था। वहीं फिल्म ट्रिब्यूनल ने सेंसर बोर्ड को यूए की बजाय यूवी सर्टिफिकेट देने का आदेश दिया है।

डॉक्यूमेंटरी फिल्म 'द ब्रदरहुड' बिसाहड़ा गांव में अखलाख हत्याकांड के बाद पैदा हुए हालातों की पृष्ठभूमि में ग्रेटर नोएडा के दो गांवों घोड़ी बछेड़ा और तिल बेगमपुर के ऐतिहासिक रिश्तों पर आधारित है। निर्माता और निर्देशक पंकज पाराशर ने बताया कि फिल्म की कहानी लोगों के लिए प्रेरणादायक है। घोड़ी बछेड़ा गांव में भाटी गोत्र वाले हिन्दू और तिल बेगमपुर गांव में इसी गोत्र के मुस्लिम ठाकुर हैं। लेकिन घोड़ी बछेड़ा गांव के हिन्दू तिल बेगमपुर गांव के मुसलमानों को बड़ा भाई मानते हैं। एक हिन्दू गांव का बड़ा भाई मुस्लिम गांव है। फिल्म बताती है कि अखलाख हत्याकांड जैसे दुर्भाग्यपूर्ण हादसे से यहां के सामाजिक ताने-बाने पर कोई असर नहीं पड़ा। यहां के लोग इसे केवल राजनीति करार देते हैं।

तीन कट लगाने के दिए थे निर्देश

सेंसर बोर्ड ने फिल्म में तीन कट लगाने के निर्देश दिए थे। जिन सीन को कट करने को कहा गया उनमें हिन्दुओं और मुसलमानों के गोत्र एक नहीं हो सकते। दूसरी आपत्ति ग्रेटर नोएडा के खेरली भाव गांव में 2 अप्रैल 2016 को एक मस्जिद की नींव वैदिक मंत्रोच्चार के साथ रखने के दृश्य पर थी। वहीं तीसरी आपत्ति बीजेपी से संबंधित एक वाक्य को हटाने की थी। फिल्म निर्माता ने ट्रिब्यूनल के सामने वाक्य को हटाने की सहमति दी थी। उससे फिल्म पर कोई प्रभाव नहीं पड़ता है। फिल्म निर्माता ने बताया कि दो दृश्यों पर बेवजह कट और सर्टिफिकेट की श्रेणी पर आपत्ति थी। जिसे अपील के जरिए चुनौती दी थी। ट्रिब्यूनल ने दोनों कट खारिज कर दिए हैं।

फिल्म के निर्माता-निर्देशक ने ट्रिब्यूनल के सामने दस्तावेज पेश किए। ट्रिब्यूनल के अध्यक्ष जस्टिस मनमोहन सरीन, सदस्य शाजिया इल्मी और पूनम ढिल्लों ने सुनवाई के दौरान फिल्म देखी। फिल्म देखने के बाद ट्रिब्यूनल ने सेंसर बोर्ड की आपत्तियों को निराधार बताते हुए खारिज कर दिया है। ट्रिब्यूनल ने कहा, यह 24 मिनट की डॉक्यूमेंटरी फिल्म देश में सांप्रदायिक सौहार्द्र और खासतौर से सबसे बड़े हिन्दू और मुस्लिम संप्रदायों के बीच एकता का संदेश देने के लिए एक प्रशंसनीय प्रयास है। दृश्यों का हटाने का सेंसर बोर्ड का आदेश निराधार है।

Rahul Chauhan
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