GIMS से लापता कोरोना संक्रमित का शव मोर्चरी में मिला, लापरवाही सामने आने पर बोले- सड़क से उठाकर लाए

राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Gims) में बड़ी लापरवाही उजागर, कोरोना संक्रमित को लापता बताकर शव को मोर्चरी में रखवाया

By: lokesh verma

Published: 02 May 2021, 12:31 PM IST

पत्रिका न्यूज नेटवर्क
ग्रेटर नोएडा. कोरोना महामारी के दौरान राजकीय आयुर्विज्ञान संस्थान (Gims) में बड़ी लापरवाही का मामला सामने आया है। जिम्स में 20 अप्रैल को भर्ती हुआ एक संक्रमित 47 वर्षीय महेश अचानक गायब हो गया। जब परिजनों को अस्पताल प्रबंधन की बात हजम नहीं हुए तो उन्होंने सख्त रुख अपनाते हुए कई गंभीर आरोप लगाए। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मोर्चरी में रखे शवों को दिखाया, जिसमें महेश की पहचान हो सकी। अब अस्पताल प्रबंधन को महेश के परिजनों के सवालों का जवाब देते नहीं बन रहा है।

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जिम्स प्रबंधन ने अपनी सफाई में कहा है कि महेश को कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद आइसोलेशन वार्ड में भर्ती किया था। जहां उसे दो दिन तक रखा गया। अचानक हालत खराब होने पर उसे आईसीयू में शिफ्ट कर दिया गया। उसकी बेहोशी के कारण आईसीयू में तैनात स्टाफ को उसके नाम के साथ अन्य जानकारी नहीं मिल सकी थी। इसलिए स्टाफ ने उसे अज्ञात में भर्ती दिखाया था। उन्होंने बताया कि आईसीयू में मरीज को बचाने के भरसक प्रयास किए गए थे, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। 25 अप्रैल को मरीज ने उपचार के दौरान दम तोड़ दिया था, जिसके बाद शव को मोर्चरी में रखवा दिया गया था।

मोर्चरी में रखे अज्ञात शवों में की पहचान

इसी दौरान शिफ्ट बदलने पर आइसोलेशन वार्ड के स्टाफ ने महेश को बिस्तर पर नहीं पाकर रिकॉर्ड में भागना दर्ज कर दिया। जब महेश के परिजनों ने कई दिनों तक अस्पताल के चक्कर काटे और अस्पताल प्रबंधन से सख्त लहजे में जानकारी मांगी तब जाकर मोर्चरी में अज्ञात शवों को उन्हें दिखाया गया। जिसमें उन्होंने महेश की पहचान की। बता दें कि महेश को जिले के नोडल अधिकारी नरेंद्र भूषण के निर्देश पर जिम्स में भर्ती किया गया था। सोशल मीडिया पर इससे जुड़ी कई पोस्ट भी की गई हैं। महेश के आधार कार्ड से लेकर सहयोगी के फोन नंबर भी फाइल में दर्ज हैं।

सुलगते सवाल

अब सवाल उठता है कि ऐसे में महेश को लावारिश क्यों बताया गया? इतना ही नहीं परिजनों को मोर्चरी में शव भी नहीं दिखाया जा रहा था और जब परिजनों ने शव की पहचान की तो परिजनों ने पूछा कि आखिर महेश के शव को लावारिस में क्यों दाखिल किया? इसका भी अस्पताल प्रबंधन के पास कोई जवाब नहीं है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि इस व्यक्ति को सड़क से उठाकर लाए थे। सबसे बड़ा सवाल ये है कि अस्पताल में शिफ्ट बदलने के दौरान मरीज का रिकॉर्ड क्यों नहीं था? इससे साफ पता चलता है कि अस्पताल प्रबंधन अपनी लापरवाही छिपाने के लिए फर्जी रिपोर्ट बनवाई थी।

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