शहर के पार्कों की हालत हो चुकी है खस्ता, खेलने के लिए भी नहीं है कोई सुविधा

ग्रेटर नोएडा के विभिन्न पार्कों की हालत हो चुकी है खस्ताहाल

By: Iftekhar

Published: 20 Jan 2018, 10:47 PM IST

ग्रेटर नोएडा. शहर के विभिन्न पार्कों की हालत इन दिनों खस्ताहाल है। पार्कों की ग्रिल टूटी हुई है। वहीं, बच्चों के खेलने के लिए भी कोई संसाधन मौजूद नहीं है। पार्को में गंदगी का अंबार है। शिकायत करने के बाद भी अथॉरिटी अफसर पार्को की कोई सुध नहीं ले रहे हैं। इसकी वजह से गंदगी के अंबार लगे हुए हैं। सेक्टरवासियों की माने तो कई बार पार्को की साफ-सफआई और मेटीनेंस करने की शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अभी तक अथॉरिटी अधिकारियों की तरफ से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

पार्कों की हरियाली अब राम भरोसे है। अगर अथॉरिटी अफसरों की तरफ से समय रहते पार्कों का ध्यान नहीं रखा गया तो हरियाली का नामो-निशान मिट सकता है। सेक्टरवासी दीपक ने बताया कि शहर के पार्कों की देख-रेख के लिए अथॉरिटी की तरफ से करोड़ों रुपए खर्च किए जाते हैं, लेकिन पार्कों की देख-रेख अथॉरिटी के कागजों तक ही सिमट गई है। शहर के बीटा-1, 2, अल्फा-1, 2, गामा-1,2, डेल्टा-1,2,3 समेत अन्य सेक्टरों के पार्को की हालत खस्ता हो चुकी है। कहीं ग्रिल टूटी हुई है तो कहीं पार्को में गंदगी फैली हुई है। इसके अलावा पार्को में बच्चों के खेलने के लिए कोई सुविधा नहीं है।

पार्को के चारों तरफ ग्रेटर नोएडा अथॉरिटी ने बाउंड्री वॉल बनाई हुई है। बाउंड्री वॉल के तौर पर लोहे और सीमेंट की ग्रिल्स लगाई गई हैं, जिससे आवारा पशु यहां की हरियाली को नुकसान न पहुंचा सके। लेकिन सेक्टर के लोगों का आरोप है कि समय से मेंटिनेंस न होने से पार्कों की हालत बहुत खराब हो गई है। बाउंड्री वॉल टूट चुकी है। साथ ही अवारा पशुओं का जमावड़ा लगा रहता है।

लोग भी पार्को में गंदगी फैलाने से बाज नहीं आ आते हैं। वहीं, अथॉरिटी की तरफ से लगाए गए सफाई कर्मचारी ठीक से सफाई नहीं करते हैं। यही वजह है कि पार्कों में गंदगी फैली रहती है। यहां तक की पार्क के पास रहने वाले लोग अपने घरों से निकलने वाली गंदगी को पार्क में डाल देते है। पार्कों में गंदगी के अंबार लग चुके हैं। गंदगी और पार्कों में सुविधा न होने की वजह से बच्चों ने भी खेलना बंद कर दिया है। डेल्टा-1 निवासी प्रियंका सिंह ने बताया कि गंदगी होने की वजह से पार्क में जाना बंद कर दिया। शिकायत करने के बाद भी कोई सुनने को तैयार नहीं होता है। अथॉरिटी अधिकारियों का कहना है कि सेक्टरों में सफाई कराई जाती है।

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