इन सरकारी स्कूलों में बढ़ गई फीस, विरोध करने पर चार छात्रों के काट दिए नाम

Virendra Kumar Sharma | Publish: Apr, 17 2019 10:51:00 AM (IST) | Updated: Apr, 17 2019 10:51:01 AM (IST) Greater Noida, Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh, India

  • फीस के मामले में शिकायत मिलने पर एक्शन लेगा जिला प्रशासन
  • बढ़ी फीस के विरोध में 21 अप्रैल को पैरेंट्स करेंगे प्रदर्शन

 

ग्रेटर नोएडा. इस बार जिले के सीबीएसई बोर्ड के चार सरकारी स्कूलों की फीस बढ़ा दी गई है। फीस बढ़ने के लिए विरोध पैरेंट्स आ गए है। विरोध में पैरेंट्स असोसिएशन के पदाधिकारियों ने जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) से मीटिंग की। मीटिंग में उन्होंने फीस वापस लेने की बात रखी है। वहीं, डीआईओएस का कहना है कि 20 अप्रैल को डीएम की अध्यक्षता में फीस नियतन कमेटी की मीटिंग होगी। उसमें निजी स्कूलों में बढ़ी फीस के बारे में भी निर्णय लिया जाएगा।

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नोएडा और ग्रेटर नोएडा में सावित्री बाईफुले बालिका इंटर कॉलेज, गौतम बुद्ध् बालक इंटर कॉलेज, पंचशील बालक और महामाया बालिका इंटर कॉलेज है। ये चारों सरकारी स्कूल सीबीएसई बोर्ड से मान्यता प्राप्त है। पैरेंट्स का कहना है कि इस सत्र से कॉलेजों में फीस कई गुना बढ़ा दी गई है। फीस बढ़ने की वजह से पैरेंट्स की जेब अधिक ढीली होने लगी है। पैरेंट्स का कहना है कि फीस की वजह से बजट बिगड़ गया है। बढ़ी फीस का विरोध पैरेंट्स असोसिएशन ने करना शुरू कर दिया है। संघ के अध्यक्ष राजेश पंडित का कहना है कि एक साथ ही कुई गुना फीस बढ़ाना ठीक नहीं है। उन्होंने बताया कि यूपी के डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा से भी इस संबंध में मीटिंग की जा चुकी है। उन्होंने बताया कि डिप्टी सीएम दिनेश शर्मा ने बढ़ी हुई फीस वापस लेने के लिए कहा था, लेकिन अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। उन्होंने बताया कि बढ़ी फीस का विरोध करना कई पैरेंट्स को भारी पड़ गया है। स्कूल प्रबंधन ने उनके बच्चों का नाम काट दिया है। बताया गया है कि बढ़ी फीस को पैरेंट्स की तरफ से जमा नहीं की गई है।


डीएम बीएन सिंह का कहना है कि कुछ दिनों से निजी स्कूलों में बढ़ी फीस को लेकर अभिभावक विरोध कर रहे हैं। बीते वर्ष ही उत्तर प्रदेश सरकार ने निजी स्कूलों में फीस वृद्धि के संबंध में कानून बनाया है। इसके तहत विद्यार्थी, अभिभावक और उसे स्कूल के पैरेंट टीचर एसोसिएशन के लोग शिकायत दर्ज करा सकते हैं। नियमानुसार यह शिकायत स्कूल के प्रमुख से करनी होगी। उसके बाद में 15 दिनों के अंदर कोई समाधान नहीं निकलता है तो इसकी शिकायत डिस्ट्रिक्ट फी रेगुलेटरी कमेटी को करनी होती है। उस कमेटी के प्रमुख जिलाधिकारी होते हैं। शिकायत मिलने के बाद कमेटी दूसरे पक्ष को भी अपनी बात रखने का मौका देगी और उसके बाद ही कोई कार्रवाई करेगी। उन्होंने बताया कि बीते वर्ष इस कानून का प्रचार प्रसार किया गया था। उस दौरान एपीजे स्कूल की शिकायत सच पाए जाने पर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाया गया था। डीएम ने बताया कि 20 अप्रैल को कमेटी की बैठक बुलाई गई। फिलहाल उनके पास 7 स्कूलों की शिकायतें हैं। अगर किसी स्कूल की शिकायत अभिभावक करना चाहते है तो वे दें, उसके बाद कार्रवाई की जाएगी।

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