13वीं सदी में ईरान-अफगानिस्तान से भारत आई कव्वाली फंसी धर्मसंकट के फेर में, मचा बवाल

13वीं सदी में ईरान-अफगानिस्तान से भारत आई कव्वाली फंसी धर्मसंकट के फेर में, मचा बवाल

Virendra Sharma | Publish: Sep, 12 2018 12:03:29 PM (IST) Greater Noida, Uttar Pradesh, India

13वीं सदी में भारत आई कव्वाली पर अब धर्म संकट खड़ा हो गया है

ग्रेटर नोएडा. 13वीं सदी में भारत आई कव्वाली पर अब धर्म संकट खड़ा हो गया है। कव्वाली पर एक कार्यक्रम के दौरान रोक लगाने की मांग मुखर हुई है। ग्रेटर नोएडा के ग्रु द्रोण् की नगरी दनकौर में विरोध को देखते हुए स्थानीय प्रशासन ने रोक लगा दी है। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ता ने कव्वाली को धर्म के खिलाफ बताते हुए अश्लील बता रहे है, जबकि दूसरा धड़ा हिंदू युवा वाहिनी का भी विरोध कर रहा है। बढ़ती तकरार को देखते हुए प्रशासन भी बीच में आ खड़ा हुआ है। ताकि बवाल न हो सके। उधर, यह पूरा मामला यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ के दरबार में पहुंच गया है।

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कव्वाली का इतिहास

कव्वाली 700 साल पुरानी संगीत की एक लोकप्रिय विधा है। आठवीं सदी में ईरान और अफगानिस्तान में दस्तक देने वाली कव्वाली सूफी रंगत में डूबी एक विधा है। यह तेरहवीं सदी में भारत आई। इस्लाम का सूफी स्वर और उपेक्षा की शिकार निचली जातियों को अपनी तरफ खीचा है। यह धीरे—धीरे इंसानियत की आवाज बन चुकी है। कव्वाली का आगाज मुस्लिम धर्म के सूफी पीर/फकीरों ने किया। 8चीं सदी में ईरान और दूसरे मुस्लिम देशों में धार्मिक महफिलों का आयोजन किया जाता था। जिसे समां कहा जाता था। समां का आयोजन धार्मिक विद्वानों यानी शेख की देखरेख में होता था। इसके जरिए ईश्वर के साथ संबंध स्थापित करना होता था। लेकिन अब इसे लेकर विवाद खड़ा हो गया है।

यह विवाद की वजह

ईरान-अफगानिस्तान से भारत आई कव्वाली अजीब धर्मसंकट में फंस गई है। यह विवाद दनकौर स्थित द्रोण मंदिर का है। इस मंदिर में श्रीकृष्ण जन्मोत्सव के अवसर पर मेले का आयोजन पिछले 95 साल से किया जा रहा है। मेले में पिछले 70 साल से कव्वाली भी होती रही है। बुधवार को कव्वाली का आयोजन होना था। लेकिन योगी की संस्था हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने कव्वाली को मुस्लिम परंपरा बताते हुए विरोध में उतर आई है। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं ने मंदिर में कव्वाली के प्रोग्राम पर सवाल खड़े करते हुए इस रोक लगाने की मांग की थी। कार्यकर्ताओं की माने तो इस दौरान कथित तौर पर अश्लील डांस भी होता है। हिंदू युवा वाहिनी के कार्यकर्ताओं के विरोध को देखते हुए प्रशासन भी अलर्ट मोड़ पर आ गया। प्रशासन ने मेले में कव्वाली के आयोजन पर फिलहाल रोक लगा दी है।

इसके अलावा दूसरे पक्ष ने हिंदू युवा वाहिनी का विरोध किया है। मेले के आयोजकों ने आरोप लगाए है कि हिंदू युवा वाहिनी कव्वाली के जरिए सांप्रदायिक बवाल कराने में उतरी हुई है। बवाल कराने का आरोप लगाते हुए आयोजकों ने यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ को शिकायती पत्र भेजा है। उधर, हर साल मेले समिति की तरफ से कव्वाली के आयोजन को लेकर प्रशासन से अनुमत्ति भी ली जाती है। पुलिस रेकॉर्ड के अनुसार 2011 से लेकर 16 तक हर कव्वाली हुई है। आयोजकों ने ऐलान किया है कि अगर कव्वाली नहीं हुई तो बीच में ही मेले को खत्म कर दिया जाएगा। वहीं हिंदू युवा वाहिनी के मंडल अध्यक्ष ने आयोजकों पर जान से मारने का आरोप लगाया है।

यह है इतिहास

दनकौर का जिक्र महाभारत काल से होता है। दनकौर को महाभारत में कौरव व पांड़वो के ग्रुरु रहे द्रोणाचार्य की नगरी कहा जाता है। यहीं पर द्रोणाचार्य ने कौरवों और पांड़वो को शिक्षा-दीक्षा दी थी। एकलव्य ने दनकौर में ही द्रोणाचार्य की मूर्ति की स्थापना कर धर्नुविद्याा सीखी थी। बताया जाता है कि महाभारत काल में एकलव्य के दुवारा स्थापित की गई ग्रुरु द्रोण की मूर्ति पूरे वैभव के साथ विराजमान है। ग्रुरु द्रोण के मंदिर में हर साल मेले का आयोजन किया जाता है।

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