उलटी दिशा में चलती हैं स्कूल बसें, एक बच्चे की मौत के बाद भी नहीं सुधरे हालात

कंडक्टर और ड्राईवर का नही होता वेरीफिकेशन, हो चुके हैं कई हादसे, एक बच्चे की हो चुकी है मौत, एक को गंवाना पड़ा था हाथ

By: amit2 sharma

Published: 11 Sep 2017, 08:42 PM IST

ग्रेटर नोएडा. गुरुग्राम के रॉयन स्कूल के बस कंडक्टर पर बच्चे की हत्या करने का आरोप लगा है। शहर में ऐसे स्कूलों की संख्या बहुत अधिक है। जिनमें बच्चें की जिदंगी से खिलवाड़ किया जा रहा है। नामचीन स्कूलों में ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था खस्ता है, साथ ही ड्राईवर और कंडक्टर के वेरीफिकेशन तक पर उंगलियां उठाई गयी हैं। नामचीन स्कूलों भी निजी ट्रांसपोर्टर को हायर करते है और उनके ड्राईवर व कंडक्टर तक का वेरीफिकेशन उठाने की जहमत तक नहीं समझते है। पत्रिका संवाददाता ने स्कूलोें में दी जाने वाली ट्रॉसपोर्ट व्यवस्था को लेकर सोमवार को रियलिटी चेक किया।

 

ग्रेटर नोएडा में ऐसे स्कूलों की संख्या अधिक है, जिनमें ट्रॉसपोर्ट व्यवस्था नही है। इनमें ज्यादातर स्कूल निजी ट्रॉसपोटर की बसेंं हायर की हुई है। वहीं कुछ स्कूलों में पैरेंट्स की जिम्मेदारी स्कूल में बच्चों को छोडने आौर ले जाने की है। पैरेंट्स की मानेे तो जिन स्कुलोें ने ट्रॉसपोटर को हायर किया हुआ है। मोटी फीस तो स्कूल संचालक वसूलते है, लेकिन इनका वेरीफिकेशन करने तक की जहमत नही उठाते है। रॉयन स्कूल में आज पैरेंट्स ने यह मुद्दा उठाया है। वहीं निजी ट्रॉसपोर्ट न होने की वजह से पैरेंट्स को वैन हॉयर करनी पड़ती है। लेकिन प्रशासन की सुस्ती की वजह से ये नियम फोलो नही करते है। जिसकी वजह से बच्चों की जिदंगी से खिलवाड़ किया जा रहा है।


यहां नही रखते स्कूल संचालक कोई रेकॉर्ड

 

ट्रॉसपोर्ट को लेकर स्कूल संचालक गंभीर नही है। यहां डग्गेमार वैन भी स्कूलों में बच्चों को छोड़ती है। इनसे स्कूल संचालकों से कोई मतलब नही होता है। इनके बारे में कोई डिटेंल होती है और न ही स्कूल संचालक अपनी जिम्मेदारी समझते है। वहीें ट्रॉसपोर्ट की अच्छी व्यवस्था न होने और कई स्कूलों की तरफ से प्रोवाइड न कराने की वजह से मजबूरी में पैरेंट्स को इनका सहारा लेना पड़ता है। रोहित का बेटा 3 क्लास में शहर के सेंट जोसेफ स्कुल में 2 दूसरी क्लास में पढ़ता है। रोहित ने बताया कि स्कूल की तरफ से ट्रॉसपोर्ट मजबूत न होने की वजह से मजबूरी में पैरेंट्स वैन और इको कार में बच्चों को भेजने को मजबूर है।

 

क्षमता से ज्यादा होते है स्टूडेंट्स

 

शहर के बड़े स्कूलों की बसों में बच्चे को सीट की उपलब्धता से अधिक बैठाया जाता है। वहीं वैन कार में भी बच्चों को भूसे की तरह भरा जाता है। पैरेंट्स काा आरोप है कि पुलिस प्रशासन भी इस तरफ कोई ध्यान नही देता है। घटना होने पर पुलिस प्रशासन कार्रवाई करता है, लेकिन बाद में मामले से इतिश्री कर लेते है। पैरेंट्स ने रुटीन में कार्रवाई होने की मांग की है। आरोप है कि पुलिस को समय—समय पर अभियान चलाकर कार्रवाई अलके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए।

 

होते है हादसे

 

रॉग साइड और हाईस्पीड स्टूडेंंट्स की जान ले चुके है। 2 साल पहले हाईस्पीड की वजह से एक बच्चे को अपना हाथ गंवाना पड़ा था। विश्वभारती स्कूल की बस बच्चों को छोड़ने घर जा रही थी। बताया गया है कि बस का ड्राईवर हाईस्पीड में चला रहा था। क्राउन प्लाजा होटल के सामने डिसबैलेंस होकर बस पलट गई। बस में सवार बच्चे घायल हो गए और एक बच्चे को अपना हाथ गंवाना पडा। वहीं गामा—2 में 3 साल पहले अथॉरिटी के पास में बच्चे को उतारकर जा रही बस ने बैक करते समय एक बच्चे को कुचल दिया, जिससे उसकी मौत हो गई। बस भी स्कूल की थी और पढ़ने वाला बच्चा भी। मां के सामने यह हादसा हुआ था। बच्चा आर्यदीप पब्लिक स्कूल में पढ़ता था।

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