सीमा परिहार ही नहीं, इन दस्यु सुंदरियों ने भी राजनीति में दिग्गजों को दी है कड़ी टक्कर, जानिए इनके बारे में

चंबल की घाटी में बंदूक के दम पर अपना लोहा मनवाने वाली दस्यु सुंदरी आज राजनीति में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है।

By: virendra sharma

Published: 22 May 2018, 02:31 PM IST

वीरेंद्र शर्मा@ पत्रिका

नोएडा. चंबल घाटी का नाम जेहन में आते ही डकैतों की तस्वीर सामने आती है। मान सिंह, ददुआ, निर्भय गुर्जर, मलखान सिंह जैसे डकैतों का खौफ लोगों के दिलों में रहा है। इनमें एक डकैत ऐसा भी था, जो गिरोह में लड़कियों को रखता था। इनमें नीलम गुप्ता, सीमा परिहार जैसे नाम शामिल है। इन्हें दस्यु सुंदरी कहा जाता था। इन दस्यु सुंदरियों का दबदबा भी जगजाहिर है। कभी चंबल की घाटी में बंदूक के दम पर अपना लोहा मनवाने वाली दस्यु सुंदरी आज राजनीति में भी बढ़ चढ़कर हिस्सा ले रही है।

गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट से दस्यु सुंदरी सीमा परिहार ने चुनाव लड़ने का ऐलान किया है। जिससे राजनीति जगत में हलचल मच गई है। वहीं सीमा परिहार ने लोकसभा सीट पर चुनाव लड़ने की कवायद भी शुरू कर दी है। लेकिन क्या आप जानते है कि सिर्फ सीमा परिहार हीं नहीं, बल्कि कई और महिला डकैत राजनीति में किस्मत अजमा चुकी है। यहां तक की चुनाव जीतने के बाद में लोकसभा पहुंची है।

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चंबल से लोकसभा पहुंचने वाली डकैत

अस्सी के दशक में फूलन देवी चंबल के बीहड़ों की सबसे खतरनाक डाकू मानी जाती थी। कठोर दिल वाली फूलन देवी का बड़ा अचूक निशाना था। फूलन देवी ठाकुरों से दुश्मनी मानती थी। जिसके चलते फूलन देवी ने 14 फरवरी 1981 को बहमई में एक लाइन में खड़ा कर 22 ठाकुरों की हत्या कर दी थी। लगातार 9 साल तक बीहड़ों में रहने के बाद में दस्यु सुंदरी फूलन देवी ने 1983 में मध्यप्रदेश के भिंड के एमजेएस मैदान में तत्कालीन सीएम अर्जुन सिंह के सामने गिरोह के साथ आत्मसमर्पण कर दिया था। बता दें कि यूपी में 1963 में जन्मी फूलन देवी का 16 साल की उम्र में डकैतों ने अपहरण कर लिया था। यहीं से उनका डाकू बनने का सफर शुरू हुआ था। सामाजिक कुरीतियों आैर खुद पर हुए अत्याचार के खिलाफ उन्होंने हथियार उठाए थे। जिसकी वजह से फूलन देवी को लोग मसीहा मानने लगे थे। 1996 में हुए लोकसभा चुनाव के दौरान सामाजवादी पार्टी ने उन्हें मिर्जापुर-भदौही लोकसभा सीट से टिकट दिया आैर फूलन देवी भारी मतों से जीतकर लोकसभा पहुंची। फूलन की 25 जुलाई 2001 को दिल्ली में उनके आवास के बाहर ही शेर सिंह राणा ने हत्या कर दी थी।

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नीलम गुप्ता

चंबल के खूंखार डकैत रहे निर्भय गुर्जर की पत्नी नीलम गुप्ता इटावा से नगर पालिका निकाय का चुनाव लड़ चुकी है। कभी बीहड़ में कंधे पर बंदूक रखकर चलने वाली दस्यु सुंदरी का 12 साल की उम्र में डकैत निर्भय गुर्जर ने अपहरण कर लिया था। नीलम उस समय 6वीं क्लास में पढ़ रही थी और उस दिन स्कूल पढ़ाई करने के लिए जा रही थी। निर्भय गुर्जर लड़कियों का अपहरण कर उन्हें ट्रेनिंग देकर गिरोह में शामिल कर लिया करता था। निर्भय गुर्जर ने चार लड़कियों से शादी की थी। निर्भय गुर्जर ने नीलम का अपहरण 2001 में किया था। यूपी के औरैया जिले के विधूना कस्बे की रहने वाली नीलम के अपहरण के बाद में पहनावा भी बीहड़ की दस्यु सुंदरियों की तरह हो गया। नीलम ने 2004 में इटावा के एक मंदिर निर्भय गुर्जर से शादी की थी। बाद में नीलम निर्भय के रिलेटिव श्याम के साथ में भाग गई थी। बाद में नीलम और श्याम ने कोर्ट में सरेंडर कर दिया। लगभग 12 साल तक जेल में काटने के बाद में कोर्ट ने 2017 में रिहा कर दिया। और फिर राजनीति में सक्रिय हो गई।

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रेणु यादव

औरेया जिले के गांव जमालीपुर की रहने वाली रेणु यादव का बीहड़ों में कभी तूती बोलती थी। शुरू से ही पढ़ाई में अव्वल रहने वाली रेणु का नवंबर 2003 में घर से स्कूल जाते समय अपहरण कर लिया था। पिता किसान थे, डकैत चंदन यादव ने 10 लाख रुपये की फिरौती मांगी थी। फिरौती की रकम जुटाना रेणु के पिता के लिए आसान नहीं था, जिसकी वजह से चंदन यादव ने रेणु का शोषण करना शुरू कर दिया। बाद में उसने हथियार उठा लिए और चंदन गैंग की सक्रिय सदस्य बन गई। इस दौरान रेणु यादव के खिलाफ हत्या, अपहरण, डकैती जैसी वारदातों के करीब 17 मामले यूपी, राजस्थान और मध्यप्रदेश में दर्ज हुए। चंदन यादव का राइट हैंड माने जाने वाले रामवीर गुर्जर ने गैंगवार के दौरान चंदन की हत्या कर दी। जनवरी 2005 में चंदन मारा गया। रामवीर ने रेणु को बंधक बना लिया। 15 जनवरी 2005 को रेणु ने एसएलआर से रामवीर गुर्जर की हत्या कर दी। हत्या करने के बाद वह घर पहुंची और पुलिस कसे सामने सरेंडर कर दिया। जेल से छूटने के बाद में राजनीति में सक्रिय हो गई।

 

सीमा परिहार

13 साल की उम्र मेंं हथियार उठाने वाली सीमा परिहार गौतमबुद्धनगर लोकसभा सीट से चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। सीमा के खिलाफ 70 हत्या और 200 से ज्यादा लोगों के अपहरण के मामले दर्ज हुए थे। 90 के दशक में बीहड़ों में सीमा का खौफ था। बिग बॉस मेंं जैसे रियलिटी शो में किस्मत अजमा चुकी सीमा लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारी में जुटी है। इससे पहले सीमा 2007 में मिर्जापुर भदोही से लोकसभा सीट से किस्मत अजमा चुकी है। सीमा परिहार ने बताया कि डकैत लालाराम ने 1983 में 13 वर्ष की उम्र अपहरण कर लिया था। बीहड़ में रहने के बाद में हथियार उठाने को विवश होना पड़ा और लाला राम व निर्भय गुर्जर में गैंगवार हुई। जिसमें लालराम मारा गया और बाद में उसने निर्भय गुर्जर से शादी कर ली। 8 नंवबर 2005 को पुलिस मुठभेड़ में निर्भय गुर्जर मारा गया। बताया जाता है कि निर्भय गुर्जर अपने गिरोह में लड़कियां रखता था। जिन्हें दस्यु सुंदरी कहा गया। नीलम गुप्ता और सरला उसके साथ रहती थी। लड़कियों के शौकीन निर्भय गुर्जर ने 4 शादी की थी।

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