प्रशासन ने दिए शाहबेरी की इमारतों को गिराने के आदेश, आशियाने को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग

प्रशासन ने दिए शाहबेरी की इमारतों को गिराने के आदेश, आशियाने को बचाने के लिए सड़कों पर उतरे लोग

lokesh verma | Updated: 10 Jun 2019, 06:48:01 PM (IST) Greater Noida, Gautam Budh Nagar, Uttar Pradesh, India

  • बोले- जब बनाने के दौरान किसी ने आपत्ति नहीं की तो अब क्यों किया जा रहा बेघर
  • सैकड़ों फ्लैट बायर्स ने अधिकारियों पर लगाया मिलीभगत का आरोप
  • डीएम ने दिए हैं ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर शाहबेरी में हुए अवैध निर्माण को गिराने के आदेश

ग्रेटर नोएडा. शाहबेरी में अपने सपनों के आशियाने को बचाने की जद्दोजहद जारी है। बता दें कि अब से करीब दो साल पहले शाहबेरी में दो भवनों के धराशायी होने के बाद से ही प्रशासन और प्राधिकरण हरकत में है। जबकि गांव में पूरा निर्माण ही अफसरों की शह पर हुआ है। अब जिलाधिकारी ने ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण को पत्र भेजकर शाहबेरी में हुए अवैध निर्माण को गिराने के आदेश जारी कर दिए हैं। इस कड़ी में शाहबेरी के लोगों ने अपने आशियाने पर मंडराने वाले खतरे को टालने के लिए सोमवार को पैदल मार्च कर डीएम को ज्ञापन दिया और उसके बाद वहां से प्राधिकरण दफ्तर पहुंचकर प्रदर्शन किया।

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shahberi buyers protest

डीएम कार्यालय पर प्रदर्शन करने पहुंचे शाहबेरी के फ्लैट बायर्स ने कहा कि 2011 में शाहबेरी गांव की जमीन का अधिग्रहण रद्द होने के बाद किसानों ने अपनी जरूरतों को पूरा करने के लिए अपनी जमीन बेचनी शुरू की थी। तब बेघर लोगों ने अपना आशियाना बनाने के लिए उस जमीन को खरीद लिया था। उस दौरान खरीददारों की रजिस्ट्री और दाखिल खारिज होने में भी किसी तरह की कोई कानूनी अड़चन सामने नहीं आई। इस तरह से लोगों का विश्वास बढ़ता गया और इसी विश्वास में कुछ युवाओं ने प्रधानमंत्री के मेक इन इंडिया से प्रेरित होकर स्व-रोजगार के लिए जमीन खरीदकर फ्लैट बनाने शुरू कर दिए। उन्होंने बड़े बिल्डरों के मुकाबले सस्ते और जल्दी फ्लैट बनाकर ग्राहकों को दिए थे।

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डीएम को दिए पत्र में बायर्स ने कहा है कि 17 जुलाई-2018 में दो इमारतों के गिरने के बाद ही ज्यादातर लोगों को इन जमीनों का ग्रेटर नोएडा प्राधिकरण का अधिसूचित क्षेत्र होने का पता चला, लेकिन तब तक 7-8 साल बीत चुके थे और यहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपने मकान बना लिए थे और कुछ ने फ्लैट खरीद लिए थे।

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बायर्स का यह भी आरोप है कि इमारत गिरने के हादसे से पहले प्राधिकरण के अधिकारियों या कर्मचारियों ने किसी भी तरह से यहां हो रहे निर्माण को रोकने या बंद करने का कानूनी कार्रवाई नहीं की। मकान का निर्माण पूरा हो जाने के बाद और फ्लैट खरीदने के बाद सभी लोगों ने बिजली के कनेक्शन के लिए आवेदन किया, लेकिन बिजली विभाग ने भी कनेक्शन देते समय किसी प्रकार की आपत्ति नहीं की। इसलिए शाहबेरी में बने किसी भी मकान या फ्लैट को न गिराया जाए।

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