डॉ जुलेखा दाउद: भारतीय मूल की महिला डॉक्टर जिसने यूएई में बदल दी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

डॉ जुलेखा दाउद: भारतीय मूल की महिला डॉक्टर जिसने यूएई में बदल दी स्वास्थ्य सेवाओं की तस्वीर

Siddharth Priyadarshi | Publish: Jun, 05 2019 05:12:04 PM (IST) | Updated: Jun, 06 2019 08:30:37 AM (IST) गल्फ

  • महाराष्ट्र के नागपुर में एक कट्टर मुस्लिम परिवार में पैदा हुई थीं जुलेखा दाऊद
  • डॉ जुलेखा दाउद 1964 में भारत से शारजाह आई थीं
  • प्रवासी भारतीय सम्मान से नवाजी जा चुकी हैं डॉ जुलेखा दाउद

अबू धाबी । भारतीय मूल की यूएई की पहली महिला डॉक्टर 81 वर्षीय जुलेखा दाउद इन दिनों एक बार फिर चर्चा में हैं। जुलेखा दाऊद वो महिला हैं जिन्होंने खाड़ी के इस मुस्लिम देश में स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली को आकार देने में मदद की है। समय के जाने कितने उतार चढाव झेल चुकी यह महिला यूएई जैसे कट्टर मुस्लिम देश में एक विजेता की तरह सामने आई है। उनके बारे में अब सऊदी मीडिया में दावा किया जा रहा है कि जल्द ही उन्हें खाड़ी देशों में महिलाओं के स्वास्थ्य को सुधारने के लिए विशेष दूत के रूप में नियुक्त किया जा सकता है।

 

Dr. Zulekha Daud

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कौन हैं जुलेखा दाउद

डॉ ज़ुलेखा दाउद को संयुक्त अरब अमीरात में रहने वाले लोगों द्वारा 'मामा ज़ुलेखा' कहा जाता है। जुलेखा हेल्थकेयर ग्रुप की संस्थापक और चेयरपर्सन डॉ ज़ुलेखा दाऊद अपनी समाज सेवा और अथक मेहनत के लिए मशहूर रही हैं। यूएई के साथ-साथ उनके भारत में भी दो अस्पताल हैं। डॉ दाउद 1964 में शारजाह में काम करने भारत से आई थीं। इससे पहले वह कुवैत में अमरीकन मिशन अस्पताल में काम करती थी। 1992 में उन्होंने शारजाह में पहला निजी अस्पताल स्थापित किया, जिसका नाम था जुलेखा अस्पताल। आज की तिथि में शारजाह और दुबई के दो अस्पतालों के बीच अमीरात के तीन चिकित्सा केंद्रों में ज़ुलेखा समूह सालाना 550,000 लोगों का इलाज करता है। उनकी लोकप्रियता और काम करने की लगन से प्रेरित होकर 23 जनवरी 2019 को, डॉ ज़ुलेखा को प्रवासी भारतीयों के लिए भारत के शीर्ष सम्मान प्रवासी भारतीय पुरस्कार से सम्मानित किया गया। यूएई में जुलेखा एक जाना माना नाम है। देश में ऐसा कोई नहीं है जो उन्हें नहीं पहचानता हो।

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कैसा रहा जीवन चक्र

डॉक्टर जुलेखा नागपुर, महाराष्ट्र के एक रूढ़िवादी मुस्लिम परिवार में पैदा हुई थीं। अपने जीवन के बारे में मीडिया से बात करते हुए डॉक्टर जुलेखा ने कहा, " मेरे माता-पिता हालांकि अपने विचारों में उदार थे और कभी भी मेरे साथ भेदभाव नहीं करते थे महज इसलिए कि मैं एक लड़की थी। वास्तव में मेरे पिता ने मुझे और मेरे भाई-बहनों को शिक्षित करने का सपना देखा था।" अपने डॉक्टर बनने के सफर के बारे में उन्होंने बताया, “मेरे मामा एक डॉक्टर थे और मेरे माता-पिता चाहते थे कि मैं भी मेडिसिन की पढाई करूं। मेरी माँ हमारे पड़ोसी और ईसाई नर्स एक महिला से प्रभावित थीं। उसने मुझे डॉक्टर बनाने का सपना देखा था। घर में बहुत कम पैसा था, लेकिन मेरे पिता के लिए मेरी शिक्षा महत्वपूर्ण थी।" डॉ ज़ुलेखा ने भारत के नागपुर में गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज से स्त्री रोग में एमबीबीएस की विशेषज्ञता हासिल की। शारजाह में काम करने के लिए आने से पहले डॉ ज़ुलेखा ने कुवैत में अमरीकन मिशन अस्पताल में काम किया। उनके पति डॉ आदिल दाउद ने रास अल खैमाह में एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के रूप में नौकरी पाई थी।

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केवल स्त्री रोग तक ही नहीं थी भूमिका

हालांकि डॉक्टर जुलेखा स्त्री रोग विशेषज्ञ थीं लेकिन उनकी भूमिका इसी कहीं अधिक थी। छोटी-चेचक से लेकर वायरल संक्रमण तक कई रोगों की चिकित्सा उन्होंने की, वह भी बिना किसी विशेष सुरक्षा के। उन दिनों मलेरिया का भी जबरदस्त प्रकोप व्याप्त था और उन्हें तुरंत इलाज करना पड़ता था। इसके अलावा शहर में कोई महिला डॉक्टर नहीं थी। अव्वल तो इस मुस्लिम देश में महिलाएं नौकरी शुदा नहीं थीं और अगर वह मेडिकल फिल्ड में थीं तो केवल नर्सों के रूप में । मस्कट जैसे इलाकों से परामर्श के लिए उन्हें पास लोग आते थे। दूर-दराज से आईं ज्यादातर महिलाएं उनके पास तब पहुंचती थीं, जब उनकी बिमारी बिगड़ चुकी होती थी। अपने पुराने दिनों को याद करते हुए डॉक्टर जुलेखा कहती हैं कि मैंने अपना जीवन एक डॉक्टर के रूप में तब शुरू किया जब यूएई में बिजली और टेलीफोन जैसी बेसिक चीजें भी नहीं थीं। लोग इतने अनपढ़ थे कि एक्स-रे कराना भी पाप समझते थे।

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पुरस्कार और सम्मान

23 जनवरी 2019 को डॉ ज़ुलेखा को प्रवासी भारतीयों के लिए भारत के शीर्ष सम्मान से सम्मानित किया गया - प्रवासी भारतीय सम्मान। यह पुरस्कार उन व्यक्तियों को प्रदान किया जाता है जिन्होंने परोपकारी और धर्मार्थ कार्यों में महत्वपूर्ण योगदान दिया है और अपने क्षेत्र में प्रमुखता के साथ निवास के देश में भारत की प्रतिष्ठा को बढ़ाया है। वयोवृद्ध डॉक्टर जुलेखा को इस बार भारत के माननीय राष्ट्रपति श्री राम नाथ कोविंद द्वारा वाराणसी में आयोजित एक समारोह में यह पुरस्कार प्रदान किया गया। इसके अतिरिक्त डॉ ज़ुलेखा के जीवन में एक और विशेष क्षण था जब उनके महामहिम और यूएई के विदेश मामलों के मंत्री शेख अब्दुल्ला बिन जायद अल नाहयान ने उनको नई दिल्ली में सम्मानित किया और यूएई में उनके पांच दशकों के बहुमूल्य योगदान के लिए उन्हें धन्यवाद पत्र और प्रशंसा पत्र भेंट किया।

 

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